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महापौर की गुगली पर भाजपा पार्षद बोल्ड  

Tue, 09 Jan 2018 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 09 Jan 2018 12:46 AM IST
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mahaapaur ki gugli par bjp parshad bold
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बसपा महापौर की रणनीति के आगे भाजपा पार्षदों की प्लानिंग परिचय बैठक में ही फ्लॉप हो गई। वे सदन में अपनी बात मनवाना तो दूर प्रस्ताव तक नहीं दे पाए। महापौर गुट ने ऐसी सधी चाल चली कि भाजपा पार्षद मुंह ताकते रह गये और बैठक समाप्त हो गई। यही नहीं जिस तरह की तैयारी महापौर खेमे की तरफ से दिखी, उसने भाजपाइयों के अनुभव की कलई खोल दी। 
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बसपा की महापौर सुनीता वर्मा को गृहणी के रूप में देखने वाले भाजपाई सोमवार को उनके अलग अंदाज से चित हो गए। सुनीता वर्मा ने जिस सधे और संयत अंदाज में बैठक को अंजाम दिया, वह उनके भविष्य के अंदाज को बताने के लिए काफी है। भाजपा के 36 पार्षदों में से एक को भी बोर्ड बैठक में उन्होंने प्रस्ताव रखने का अवसर नहीं दिया। यह हाल तब हुआ जब बोर्ड बैठक से पहले तमाम भाजपा पार्षद सदन में महापौर को घेरने की तैयारी करते दिख रहे थे। सुनीता वर्मा ने इस तैयारी पर एक झटके में पानी फेर दिया। यही नहीं उनकी सफलता इससे सिद्ध हुई कि बसपा पार्षद सविता सामूहिक रूप से प्रस्ताव पढ़ने में कामयाब रहीं और महापौर ने भी उनके प्रस्तावों को पारित होने की घोषणा कर डाली। 
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संगठन की खुली कलई
भाजपा अब तक अपने पार्षदों को पहली बोर्ड बैठक में तैयारी के साथ भेजती थी। महापौर चाहे भाजपा का रहा हो या अन्य किसी दल का, लेकिन भाजपा पार्षद पिछले बोर्ड में विपक्षी महापौर पर हावी और अपने महापौर के पक्ष में विपक्षी पार्षदों पर भारी पड़ते रहे हैं। इस बार संगठन स्तर से नवनिर्वाचित पार्षदों को पहली बोर्ड बैठक के लिए तैयार नहीं किया गया। पार्षदों के बीच आपसी समन्वय की कमी साफ नजर आई। जिस कारण भाजपा पार्षद ललित नागदेव ने प्रस्ताव रखने का प्रयास किया तो महापौर ने उन्हें चुप कर दिया। इसके बावजूद भाजपाई पार्षद चुप्पी साधे रहे। 
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बोर्ड में रखा गया प्रस्ताव कैंप कार्यालय पर ही पास 
नगर निगम की बोर्ड बैठक में बसपा महिला पार्षद ने छह प्रस्ताव वाला पत्र पढ़ा। उस पर लगभग 50 पार्षदों के हस्ताक्षर हैं। न तो यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में तैयार हुआ और न ही सदन में पार्षदों के हस्ताक्षर कराए गए। जिससे साफ है कि ये महापौर ने रविवार को कैंप कार्यालय पर आयोजित बसपा पार्षदों की बैठक में तैयार कराया। इसके आधार ही महापौर ने छह प्रस्तावों को सदन में पास किए जाने की बात कही। 

संख्या बल में भी खाई मात 
भाजपा के 36 पार्षद जीतकर आए हैं। बाकी तीन-चार निर्दलीय हिंदू पार्षद भी बोर्ड बैठक में भाजपा पार्षदों के साथ नजर आए। संख्या बढ़ाने के लिए भाजपा सांसद और मेरठ दक्षिण विधायक भी बोर्ड बैठक में पहुंचे। इसके बावजूद महापौर खेमे में 50 पार्षदों का एकजुट होना भाजपा को मात दे गया। हालांकि बसपा के चुनाव चिह्न पर मात्र 28 पार्षद ही जीतकर आए हैं। 


कार्यकारिणी चुनाव के अच्छे संकेत नहीं
जिस तरह पहली ही बोर्ड बैठक में महापौर ने भाजपाई खेमे को झटका दिया और अपने पक्ष में करीब 50 पार्षद लामबंद करके दिखाये। उससे साफ हो चला है कि नगर निगम कार्यकारिणी गठन में भी भाजपा को तगड़ा झटका लगने वाला है। यदि भाजपाई समय रहते नहीं चेते तो कार्यकारिणी पर भी महापौर खेमे का कब्जा होगा और तब भाजपाई बोर्ड बैठक में सिवाय मुंह ताकने के कुछ नहीं कर पाएंगे।
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