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शहर में 2500 से ज्यादा धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर, डीएम ने तैयार की रणनीति

Tue, 09 Jan 2018 05:33 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 09 Jan 2018 05:33 PM IST
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Loudspeakers are engaged in more than 2500 religious places in city, read the full news in one click
मस्जिद व मंदिर पर लगे लाउडस्पीकर - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने 15 जनवरी के बाद से धार्मिक स्थलों पर बिना अनुमति लगे लाउडस्पीकर हटाने का आदेश दिया है। लेकिन बात अगर मेरठ जनपद की करें तो करीब तीन हजार धार्मिक स्थलों में से 2500 से ज्यादा जगहों पर लाउडस्पीकर लगे हैं। और किसी के पास इसकी अनुमति नहीं है। ऐसे में बिना अनुमति लगे इन लाउडस्पीकर को हटाना पुलिस प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। 

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मेरठ के आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने पिछले दिनों एसएसपी से जनपद के धार्मिक स्थलों (मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च) को लेकर सूचना मांगी थी। इसमें इनकी संख्या, धार्मिक विवाद और लाउडस्पीकर की अनुमति पर पूछा गया था। एसएसपी ने सभी क्षेत्राधिकारियों को अपने-अपने सर्किल से इसकी सूचना एकत्र करने का निर्देश दिया था। 
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ये आयी सूचना 
आरटीआई में कैंट क्षेत्र के सीओ ने तो धार्मिक स्थिति बिगड़ने की बात कहते हुए सूचना देने से ही इंकार कर दिया। जबकि नौचंदी थाना क्षेत्र ने जहां अपने यहां एक गुरुद्वारा होने की सूचना दी तो मंदिर मस्जिद पर बहुत ही हास्यास्पद जवाब देते हुए कहा कि उनके थाना क्षेत्र में यह पर्याप्त संख्या में हैं। इसके अलावा कई थानाध्यक्षों ने तो अपने यहां धार्मिक स्थलों की संख्या शून्य ही दर्शा दी। जबकि 17 थानों से जो सूचना प्राप्त हुई, उनमें 788 मंदिर, 616 मस्जिद, 42 गुरुद्वारे और दो चर्च होने बताये गये। लेकिन थानों में भी अपने यहां के धार्मिक स्थलों का डाटा अपडेट नहीं है। इसका पता इस बात से चलता है कि परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र से जो सूचना प्राप्त हुई उसमें मंदिरों की संख्या मात्र तीन बतायी गई। जबकि परीक्षितगढ़ कस्बे में आधा दर्जन से ज्यादा मंदिर हैं। इस सूचना के अनुसार किठौर थाना क्षेत्र ऐसा है जहां पर जनपद में सबसे ज्यादा 72 मस्जिद हैं, जबकि सरधना में सबसे ज्यादा 126 मंदिर हैं। 
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किसी के पास नहीं अनुमति 
जिन थानाध्यक्षों ने सूचना भेजी, उनमें सभी ने कहा कि लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति किसी भी धार्मिक स्थल पर नहीं है। ऐसे में साफ है कि जनपद में किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर  की अनुमति नहीं है। 

हो चुके हैं विवाद 
शहर में शिव चौक पर लाउडस्पीकर को लेकर विगत वर्ष विवाद गहराया था। तब शिव प्रतिमा स्थल पर जहां एक वर्ग ने डीजे लगाया, तो दूसरे वर्ग ने सड़क पर नमाज अदा की। इसे लेकर कई माह तक माहौल तनाव पूर्ण रहा। वहीं खरखौदा थाना क्षेत्र के गांव नरहाड़ा, लिसाड़ी थाना क्षेत्र के लिसाड़ी गांव, किठौर के नंगलामल गांव में भी विवाद हो चुके हैं।

15 जनवरी तक लेनी होगी अनुमति, उसके बाद हटेंगे लाउडस्पीकर

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डीएम समीर वर्मा

डीएम समीर वर्मा और एसएसपी मंजिल सैनी ने सोमवार को संयुक्त रूप से बचत भवन में पुलिस, प्रशासनिक और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें हाईकोर्ट के धार्मिक स्थलों से 15 जनवरी के बाद बगैर अनुमति लगे लाउडस्पीकर को हटाने की रणनीति तैयार की गई। डीएम ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराया जायेगा। 

डीएम ने पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिये कि वह शासन से जारी निर्देशों के अनुरूप अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण करें। ऐसे धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों को चिन्हित करें, जहां पर बिना अनुमति के लाउडस्पीकर लगे हैं। उन्होंने कहा कि थानावार राजस्व व पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित करें। यह टीम जिस भी धार्मिक और सार्वजनिक स्थल पर बिना अनुमति के लाउडस्पीकर या अन्य किसी प्रकार के ध्वनि प्रसारण यंत्र को देखें उन्हें निर्धारित प्रारूप पर नोटिस जारी करें। ऐसे स्थलों के चिन्हीकरण 10 जनवरी तक पूर्ण हो जाने चाहिए।

दिया जायेगा अनुमति का मौका 
डीएम ने बताया कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर या अन्य किसी प्रकार के ध्वनि प्रसारण यंत्र के संचालनकर्ता को अनुमति लेने के लिए मौका दिया जाएगा। संचालन कर्ता को निर्धारित प्रारूप पर 15 जनवरी तक आवेदन कर अनुमति लेनी होगी। इस अवधि तक अनुमति नहीं लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जायेगी। 

ये रहेगा ध्वनि का मानक 
डीएम ने कहा कि अधिकारी सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत औद्योगिक क्षेत्र में दिन में 75, रात्रि में 70, व्यवसायिक क्षेत्र में दिन में 65 व रात्रि में 55, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 व रात्रि में 45 तथा साइलेंस जोन में दिन में 50 और रात्रि में 40 डेसीबल ध्वनि की सीमा होनी चाहिए।

ये रहे बैठक में मौजूद 
बैठक में एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, एसपी सिटी मान सिंह चौहान, देहात राजेश कुमार, नगर मजिस्ट्रेट एमपी सिंह, एसडीएम सदर निशा अनंत, सरधना राकेश कुमार सिंह, मवाना अंकुर श्रीवास्तव, एसीएम अमिताभ यादव सहित सभी पुलिस क्षेत्राधिकारी एवं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे। 

अजान से नमाज का बुलावा 
शहर काजी जैनुससाजिदीन ने कहा कि मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर से अजान देने का मकसद है। हमें उम्मीद है जिन मस्जिदों में पहले से ही लाउडस्पीकर लगे हैं उन पर अजान देने के लिए जिला प्रशासन अनुमति देगा। इस पर किसी भी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए। अन्यथा विवाद हो सकता है। मस्जिदों के जिम्मेदार लोगों को अनुमति ले लेनी चाहिए। 

प्रशासन से लेंगे अनुमति 
अध्यक्ष खैरनगर बाजार की होज वाली मस्जिद कमेटी अफजाल अहमद खान ने कहा कि कोर्ट का आदेश सभी के लिए है और उसका सभी को सम्मान करना चाहिए। जहां तक मस्जिदों  पर लगे अजान के लिए लाउडस्पीकर का मामला है, इसके प्रयोग के लिये प्रशासन से अनुमति लेने को आवेदन किया जायेगा।

कोर्ट का आदेश सार्वजनिक हित में 

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लाउडस्पीकर

मुतवल्ली शहर घंटा घर की छोटी मस्जिद जफर अहमद अलवी ने बताया कि कोर्ट का आदेश सार्वजनिक हित में है। उसका सम्मान करते हुए आदेश में सबके साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। किसी की धार्मिक भावना आहत नहीं होनी चाहिए। कानून का पालन करना सबका दायित्व है, जहां तक अनुमित का प्रश्न है, उसके लिये प्रयास किया जाएगा। 

ढाई मिनट की अजान 
मुतवल्ली, पुर्वा महावीर की आलिया मस्जिद डा. अमीर अहमद ने कहा, सभी को कानून का पालन करना चाहिए। लेकिन जहां तक मस्जिदों के लाउडस्पीकर का प्रश्न है, उसके द्वारा नमाज के लिये केवल पांच वक्त की अजान दी जाती है। अजान ढाई मिनट की होती है। इस लिए लाउडस्पीकर मस्जिदों से नहीं उतरने चाहिए। इसके लिये अनुमति ली जाएगी। 
 
डीजे से होता है ध्वनि प्रदूषण 
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व पार्षद हाजी मौ. इकबाल अंसारी ने कहा कि घनी आबादी के चलते शोर-शराबा रहने से बिना लाउडस्पीकर के अजान की आवाज दब जाती है। ध्वनि प्रदूषण ढाई मिनट की अजान से नहीं बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर डीजे बजाने से होता है। उम्मीद है अजान के लिये प्रशासन अनुमति दे देगा। 

मंदिर में तो धीमी आवाज में बजता है
अध्यक्ष, औघड़नाथ मंदिर डा. महेश बंसल ने कहा कि हमारे मंदिर कैंट क्षेत्र में है, यहां पर तो पहले से बहुत धीमी आवाज में लाउडस्पीकर बजता है। यह सही है कि अनुमति नहीं है, वैसे भी मंदिर में लंबे समय से लाउडस्पीकर लगा है, तब शायद अनुमति नहीं ली जाती होगी। फिर भी हाईकोर्ट का जो आदेश आया है, उसका पालन किया जायेगा।

एक समान हो कार्रवाई  
महामंडलेश्वर, शनिधाम पीठ सदर महेंद्र दास महाराज ने कहा, हम हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं। लेकिन सरकार से चाहते हैं कि सभी धार्मिक स्थलों से एक साथ लाउडस्पीकर हटाए जाएं। सबसे पहले मेरठ में मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने वालों में हम रहेंगे। रही बात अनुमति की तो अनुमति लेकर ही बजाएंगे। 

सुबह-शाम बजता है लाउडस्पीकर
महामंडलेश्वर एवं पीठाधीश्वर बाबा मनोहर नाथ मंदिर मां नीलिमानंद महाराज ने कहा कि हमारे मंदिरों पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर नहीं बजते हैं। वैसे भी मंदिरों पर सुबह शाम ही लाउडस्पीकर बजते हैं। मस्जिदों पर दिन में पांच बार ही नहीं बल्कि कई बार लाउडस्पीकर बजता है। वह भी तेज आवाज में। सबसे पहले प्रशासन को मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाने चाहिए। हम तो कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने को तैयार हैं। अनुमति लेकर ही लाउडस्पीकर बजेगा। 

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