फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Lok sabha Elections: Tough test of SP, BSP and RLD coalition on kairana seat

कैराना सीट पर सपा, बसपा और रालोद का कड़ा इम्तिहान, उप-चुनाव में ही पड़ी थी गठबंधन की नींव

Tue, 02 Apr 2019 05:27 PM IST
Dimple Sirohi रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 02 Apr 2019 05:27 PM IST
सार

  • 2014 में भाजपा के हुकुम सिंह ने जीती थी कैराना लोकसभा सीट।
  • 2018 में हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उप चुनाव में रालोद जीता।

विज्ञापन
Lok sabha Elections: Tough test of SP, BSP and RLD coalition on kairana seat
गठबंधन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैराना लोकसभा सीट सियासी उलटफेर के लिए जानी जाती है। 1980 में कांग्रेस की लहर में जब पूरे विपक्ष का सफाया हो गया तब, यहां के मतदाताओं ने चौधरी चरण सिंह की धर्मपत्नी गायत्री देवी को जिताकर संसद में भेजा था। पिछले पांच साल में यहां के  समीकरणों में काफी बदलाव आया है। 2014 में भाजपा के हुकुम सिंह ने सपा को हराकर यह सीट जीती थी। 
विज्ञापन


2018 में उनके निधन के चलते यहां हुए उप चुनाव में ही सपा, रालोद और बसपा के बीच गठबंधन की नींव पड़ी थी। पूर्व सांसद तबस्सुम हसन उस समय सपा में थीं और उन्हें रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ाया गया। बसपा और कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। उप चुनाव में तबस्सुम हसन ने हुकुम सिंह की बेटी भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को हराकर सीट जीत ली थी। 
विज्ञापन


इस बार गठबंधन तो बरकरार है, लेकिन कई समीकरण बदल गए हैं। भाजपा ने इस बार गंगोह से विधायक प्रदीप चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने भी हरेंद्र मलिक को चुनाव में उतारकर गठबंधन की चुनौती बढ़ा दी है। कैराना की सियासत हसन और हुकुम सिंह के परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार हुकुम सिंह परिवार से प्रत्याशी नहीं है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी इस सीट पर इस बार गठबंधन का इम्तिहान है। लोकसभा चुनाव के दौरान विकास, एयर स्ट्राइक, कानून व्यवस्था समेत कई मुद्दे हावी तो हैं, साथ ही सांसद और विधायक के कामों की भी परीक्षा है। प्रत्याशी अपने अपने फायदे के मुद्दे उछाल रहे हैं और मतदाता उन्हें परख रहे हैं। 

कैराना निवासी दुकानदार अनिल बंसल कहते हैं कि कानून व्यवस्था बहुत सुधरी है। अपराधियों में पुलिस का डर है।  यहीं के मोहल्ला आलकलां निवासी किसान चौधरी इकबाल कहते हैं कि गुंडागर्दी तो खत्म हुई है। अब पहले से शांति है, लेकिन चुनाव में इसका कोई फर्क नहीं पड़ेगा। 

कलस्यान चौपाल के पास एसटीडी बूथ संचालक आसिफ और शामली बस स्टैंड के पास इलेक्ट्रानिक कारोबारी आरिफ उर्फ भूरा भी मानते है कि गुंडागर्दी खत्म हुई है, लेकिन साथ ही वे यह भी कहते हैं कि चुनाव में इसके कोई मायने नहीं हैं। वह वोट अपनी पसंद के प्रत्याशी को देंगे। बनत में खेत में काम कर रहे किसान विनोद कहते हैं कि पौने तीन लाख का गन्ना मिल को दे चुके हैं, भुगतान 20 हजार भी नहीं मिला। किसान परेशान हैं।

कैराना लोकसभा सीट पर अहम मुद्दे
मोदी फैक्टर, एयर स्ट्राइक, दंगों के मुकदमों में सुलह ना होना, कानून व्यवस्था, कैराना पलायन और वापसी, अपराधों पर अंकुश, गन्ना भुगतान, खाद, बिजली के दाम में बढ़ोतरी, सांसद और विधायकों के कार्यों की परीक्षा।

राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दे प्रभावी
थानाभवन कस्बे में अर्पित गोयल की दुकान में चुनावी चर्चा में मशगूल नवीन माहेश्वरी, ब्रजकिशोर और सौरभ सिंहल और अश्वनी गोयल एयर स्ट्राइक को बड़ा मुद्दा मान रहे हैं। गंगोह विधान सभा क्षेत्र के गांव बैरखेड़ी में चारपाई पर बैठे संजय चौधरी कहते हैं कि उनके विधायक प्रदीप चौधरी ने तीन साल में कोई ढंग का काम नही किया। वह मृगांका का टिकट कटने से भी नाराज नजर आए। रविंद्र पाल, प्रदीप कहते थे कि यहां तो मोदी फैक्टर चलेगा। भावसी गांव के अंकित राजपूत का कहना था कि उनके गांव का ट्रांसफार्मर फुंक गया था। विधायक ने गौर नहीं किया। 

खाप चौधरियों के गांवों का रुख भी होगा अहम
बतीसा खाप चौधरी बाबा सूरजमल के गांव भैंसवाल में बाबा के घेर में बैठे चुनावी चर्चा में मशगूल देवराज पहलवान कहते हैं, इस सरकार ने गन्ने का एक रुपया नहीं बढ़ाया। सतवीर मूंछ कहते हैं कि किसानों का गन्ने का भुगतान नहीं हो रहा। आवारा गोवंश मुसीबत बने हैं। मीर सिंह का कहना था कि दिल्ली में अपने हक की लड़ाई के लिए शांति मार्च लेकर गए किसानों पर आंसू गैस के बरसाए गोले कैसे भूल जाएं।

बतीसा खाप चौधरी बाबा सूरजमल कहते हैं कि उप चुनाव में जयंत चौधरी के कहने पर वोट दी पर सांसद ने उनके गांव की सुध तक नहीं ली। इसी गांव में खेत में काम करने वाले हरेंद्र और प्रदीप, लिसाढ़ के हमेंद्र मलिक एयर स्ट्राइक से प्रभावित दिखे। गठवाला खाप चौधरी बाबा हरकिशन मलिक के गांव लिसाढ़ में भी दंगों के मुकदमों सुलह नहीं कराए जाने की नाराजगी दिखी। हरकिशन सिंह मलिक के पुत्र राजेंद्र इस बात से नाराज थे कि उप चुनाव के बाद इस दिशा में प्रयास नहीं किए गए। 

परिणाम 2014 
हुकुम सिंह भाजपा 5,65,909
नाहिद हसन सपा 3,29,081
करतार भड़ाना रालोद 42,706
कंवर हसन बसपा 1,60,414
2,36,828 मतों से हुकुमसिंह जीते थे।
 
   

उपचुनाव 2018
तब्बसुम हसन रालोद 4,81,182
मृगांका सिंह भाजपा 4,36,564
44,618 मतों से तब्बसुम ने जीत हासिल की थी।    

2019 में मतदाताओं की संख्या 
वोटरों की संख्या 16,48,414
महिला वोटर  8,92,086
पुरुष वोटर   7,56,227
अन्य वोटर  101

कैराना से अब तक चुने गए सांसद
1962 -   यशपाल सिंह (निर्दलीय)    134581
1967- गयूर अली (सोशलिस्ट)    764515
1971-    शफकतजंग (कांग्रेस)    162276
1977-    चंदन सिंह (जपा)    242500
1980-    गायत्री देवी (बीकेडी)    208242
1984-    अख्तर हसन (कांग्रेस)    236904
1989-    हरपाल पंवार (जद)    306119
1991-    हरपाल पंवार (जद)    223892
1996-    मुनव्वर हसन (सपा)    184636
1998-    वीरेंद्र वर्मा (भाजपा)    289110
1999-    अमीर आलम (रालोद)    206345
2004-   अनुराधा चौधरी    523923


रालोद- सपा गठबंधन

2009-   तबस्सुम हसन (बसपा)    283259
2014-    हुकुम सिंह (भाजपा)     565909
2018-    तबस्सुम हसन      481182
उपचुनाव    रालोद-सपा गठबंधन
कैराना लोकसभा सीट 1962 से अस्तित्व में आई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed