लोकसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा: संगठन के जिम्मेदारों पर लटकी कार्रवाई की तलवार, पढ़िए खास रिपोर्ट
Meerut News : लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद संगठन के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। अमर उजाला की यह खास रिपोर्ट पढ़िए।
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लोकसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। समीक्षाओं का दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक जानकार इस गुणाभाग में लगे हैं कि किसकी रणनीति कहां कमजोर रह गई। अलग-अलग पार्टियों में इसकी गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
2019 के चुनाव की तरह इस बार भी मेरठ में हार-जीत का अंतर काफी कम रहा। 29 राउंड तक भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर रही और ज्यादातर सुनीता वर्मा ने लीड ली। इसके बाद अंतिम चरणों में नतीजा अरुण गोविल के पक्ष में आया। माना यह जा रहा था कि गोविल को मेरठ से बड़ी जीत मिलेगी, लेकिन भाजपा संगठन में जमीनी स्तर पर वह उत्साह नहीं दिखा। अंदरूनी तौर पर अरुण गोविल के बाहरी होने की चर्चा भी रही। रालोद के साथ गठबंधन होने के बाद भी दोनों दलों के बीच तालमेल ठीक नहीं था। कुछ स्थानों पर एक-दूसरे के बीच टकराव भी देखने को मिला।
इसका खामियाजा कहीं न कहीं दोनों संगठनों के जिला अध्यक्षों को उठाना पड़ सकता है। भाजपा के जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा हैं। वह मूलरूप से रार्धना के रहने वाले हैं। खुद ठाकुर हैं और ठाकुर चौबीसी में रहते हैं। हमेशा से इस क्षेत्र में भाजपा का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार राजपूतों ने भाजपा के खिलाफ इसी जगह से विरोध का बिगुल फूंका। जिलाध्यक्ष होने के बावजूद वह इस विरोध को संभाल नहीं सके और मुजफ्फरनगर में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
इस लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सपा का प्रदर्शन शानदार रहा है, लेकिन मेरठ सीट नहीं जीत सके। इस सीट पर कभी भी साइकिल नहीं दौड़ी। इस बार भी जीत के नजदीक पहुंच कर पार्टी हार गई। लिहाजा सपा संगठन पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। पिछली बार जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह थे, उन्हें बदलकर जिलाध्यक्ष विपिन चौधरी को बनाया गया, मगर नतीजा नहीं बदला। महानगर अध्यक्ष दोनों बार आदिल चौधरी सपा रहे। सरधना विधायक अतुल प्रधान भी सुनीता वर्मा का प्रचार करते नजर नहीं आए। हालांकि उनकी विधानसभा मुजफ्फरनगर में पड़ती है, जहां से सपा के हरेंद्र मलिक जीत गए हैं, लेकिन अतुल उन्हें सरधना से ज्यादा वोट नहीं दिला सके। हरेंद्र मलिक सिर्फ 45 वोट से भाजपा के संजीव बालियान से आगे रहे। मेरठ में सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा के समर्थन में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रैली हुई तो भीड़ नहीं जुटी। सपाइयों में आपसी खींचतान जगजाहिर है। अखिलेश यादव की रैली के बाद जिलाध्यक्ष ने एक रिपोर्ट भी सपा हाईकमान को भेजी हुई है, जिसमें रैली के फेल होने का जिम्मेदार सपा के कद्दावर नेताओं को बताया गया था। सपा के कद्दावर नेताओं ने इसका जिम्मेदार जिलाध्यक्ष और संगठन को बताया था।
रालोद के जिलाध्यक्ष मतलूब गौड़ हैं। वह किठौर के रहने वाले हैं। किठौर में बूथ-97 पर भाजपा के पक्ष में 163 वोट सराज्ञान ही दिला सके, जबकि यहां से सपा को 700 से अधिक वोट मिले। ऐसे में कार्रवाई की तलवार कहीं न कहीं मतलूब गौड़ पर भी लटक रही है।
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बसपा का इतना खराब प्रदर्शन पहले कभी नहीं रहा। इसकी गाज पदाधिकारियों पर गिरेगी, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं। जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह पाल हों, या मंडल कोआर्डिनेटर सतपाल पेपला, मोहित जाटव, शाहजहां सैफी और शम्सुद्दीन राइन। इनके अलावा राष्ट्रीय महासचिव मुनकाद अली, बसपा के कद्दावर नेता हैं। मेरठ के किठौर में रहते हैं। इनके बूथ पर बसपा को एक बूथ पर 23 और दूसरे पर छह वोट पड़े। बसपा एक लाख का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई।
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सपा और कांग्रेस का गठबंधन था, लेकिन कांग्रेसी भी सपा प्रत्याशी को ज्यादा वोट नहीं दिला पाए। मेरठ में या कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अवनीश काजला और महानगर अध्यक्ष जाहिद अंसारी हैं।