फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Sangwan won and got legacy back to the Chaudhary family after ten years

RLD के गढ़ की दिलचस्प कहानी: इस बार सांगवान ने रचा इतिहास, चौधरी परिवार को वापस दिलाई विरासत, पढ़िए रिपोर्ट

Wed, 05 Jun 2024 05:44 PM IST
मेरठ ब्यूरो अंकित चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
अंकित चौहान, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Updated Wed, 05 Jun 2024 05:44 PM IST
सार

UP Chunav Results 2024 : रालोद के गढ़ में 10 साल बाद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। डॉ. राजकुमार सांगवान ने यह सीट जीतकर चौधरी परिवार की विरासत को वापस दिलाने का काम किया है। दादा की जीत से पोते की हार तक का सियासी सफर पढ़िए।

विज्ञापन
Sangwan won and got legacy back to the Chaudhary family after ten years
चौधरी चरण सिंह और चौधरी जयंत के साथ डॉ. राजकुमार सांगवान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के डाॅ. राजकुमार सांगवान ने जीतकर 10 साल बाद चौधरी परिवार को उसकी विरासत कही जाने वाली बागपत सीट वापस दिलाई है। इस सीट को वर्ष 2014 में भाजपा के डाॅ. सत्यपाल सिंह ने अजित सिंह को हराकर चौधरी परिवार से छीना था। मगर चौधरी परिवार को वर्ष 2019 में विरासत छिन जाने का जख्म जयंत की हार से गहरा हो गया था। अब यहां की जीत से चौधरी जयंत को काफी राहत मिली है।

विज्ञापन


बागपत लोकसभा सीट को चौधरी परिवार के लिए इसलिए भी अहम माना जाता है, क्योंकि चौधरी चरण सिंह ने वर्ष 1977 में पहला लोकसभा चुनाव यहां से जीता था। वह यहां से लगातार तीन बार जीत दर्ज करके सांसद बने और यहां से जीतकर ही देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे।

विज्ञापन

उनके बाद चौधरी अजित सिंह ने वर्ष 1989 में विरासत को संभाला और वह लगातार जीत दर्ज करते रहे। मगर उनको वर्ष 1998 में एक बार हार का सामना करना पड़ा और एक साल बाद ही लोगों ने उनको दोबारा से संसद में पहुंचाया तो वह फिर लगातार सांसद रहे। मगर वर्ष 2014 में भाजपा के डाॅ. सत्यपाल सिंह ने चौधरी अजित सिंह को हराकर चौधरी परिवार से यह सीट छीन ली।

जिसके बाद दस साल से विरासत की इस सीट को वापस लेने के लिए चौधरी परिवार को जूझना पड़ रहा था। इस बार ऐसा हुआ कि 47 साल से लगातार चुनाव मैदान में उतर रहा चौधरी परिवार पीछे हट गया और अपने पुराने कार्यकर्ता को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला लिया।

विज्ञापन

उम्मीदों पर खरा उतरे राजकुमार सांगवान
रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने काफी उम्मीदों के साथ डाॅ. राजकुमार सांगवान को चुनाव मैदान में उतारा था। उनकी उम्मीदों पर सांगवान भी पूरी तरह से खरा उतरे और एक बड़े अंतर से जीत दर्ज करके चौधरी परिवार का दस साल का सूखा खत्म करके उनको विरासत की सीट दोबारा वापस सौंप दी। इसलिए ही इस जीत को सांगवान की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें: इकरा हसन ने कैराना में भेदा भाजपा का किला: बोलीं- मैं सर्वसमाज की बेटी; आपने आशीर्वाद दिया, मैं निभाऊंगी फर्ज

15 साल पहले भाजपा के साथ से बने थे पांच सांसद
रालोद ने इससे पहले वर्ष 2009 में भाजपा के साथ मिलकर ही लोकसभा चुनाव लड़ा था। वह चुनाव भी काफी टक्कर वाला रहा था और उसमें बसपा के मुकेश शर्मा ने चौधरी अजित सिंह को टक्कर दी थी। हालांकि, उस चुनाव को चौधरी अजित सिंह करीब 50 हजार वोटों से जीत गए थे। उस चुनाव में अजित सिंह खुद जीते थे और उनकी पार्टी को बिजनौर, अमरोहा, हाथरस व मथुरा की सीट भी मिली थी। अब 15 साल बाद भी भाजपा के साथ मिलकर रालोद के दो सांसद जीते हैं।

यह भी पढ़ें: UP Chunav Results 2024: भाजपा को रास न आया रालोद का साथ... RLD को फायदा, BJP को बड़ा नुकसान; गैरमुस्लिम बिखरे

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed