सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन से अमर उजाला की खास बातचीत, दिए इन 10 सवालों के जवाब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले पांच साल में यहां काफी राजनीतिक उतार-चढ़ाव हुए हैं। 2014 में हुकुम सिंह इस सीट पर चुनाव जीते थे। उनके निधन के बाद 2018 में हुए उपचुनाव में गठबंधन की ओर से रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन चुनाव जीतीं। तबस्सुम फिर से चुनाव मैदान में हैं, लेकिन इस बार चुनाव चिह्न सपा का है। उप चुनाव में भाजपा से चुनाव लड़ीं मृगांका की जगह गंगोह से विधायक प्रदीप चौधरी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस से हरेंद्र मलिक प्रत्याशी हैं। प्रस्तुत है दस सीधे सवालों पर दो टूक बातचीत...
मोदी के खिलाफ माहौल और जनता का प्यार बनेगा जीत का आधार : तबस्सुम
1-सवाल : आपको जनता क्यों वोट दे। आपने चुनाव लड़ने का फैसला क्यों किया है?
जवाब : क्षेत्र की जनता चाहती थी कि मैं चुनाव लड़ूं। सांसद जी (पति मन्नवर हसन) के इंतकाल के बाद से ही चुनाव लड़ रही हूं। उनके जाने के बाद मैं बसपा से सांसद बनी। बाद में सपा की भी सांसद रही। 2018 के उपचुनाव में अखिलेश यादव के कहने पर रालोद में गई थी। उनके कहने पर ही सपा में वापस आ गई हूं।
2-सवाल : आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं? आप चुनाव जीत गईं तो क्या करेंगी?
जवाब : उपचुनाव के वक्त जो मुद्दे थे, वे जस के तस हैं। केंद्र और यूपी में भाजपा सरकार होने की वजह से काम नहीं हो सके। नई सरकार बनेगी और चुनाव जीतने पर संसद में भी बात सुनी जाएगी।
3-सवाल : आपकी जीत का आधार क्या है। ऐसी क्या चीजें हैं, जिनसे आप अपनी जीत तय मान रही हैं?
जवाब : मेरी जीत का आधार जनता है। मोदी सरकार से लोग तंग आ चुके हैं। कारोबार में मंदी है। रोजगार खत्म हो रहे हैं। जनता केंद्र सरकार को बदलना चाहती है। मोदी की खिलाफत और जनता का प्यार ही मेरी जीत का आधार बनेगा।
4-सवाल : नए या युवा वोटर आपको क्यों आदर्श मानकर वोट करें। युवाओं के लिए आपका नजरिया क्या है?
जवाब : युवाओं को रोजगार देने का वादा भाजपा ने किया था। अब उनसे पकौड़े बेचने को कहा जा रहा है। मैं जीती और सरकार बदली, तो युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए क्षेत्र में उद्योग लगवाऊंगी।
5-सवाल : शिक्षा के क्षेत्र में आपका क्या नजरिया है। क्या सुधार की जरूरत हैं?
जवाब : शिक्षा में हमारा क्षेत्र पिछड़ा है। कैराना और उसके आसपास डिग्री कालेजों की जरूरत है। खासतौर से लड़कियों के लिए। उन्होंने अपने कार्यकाल में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खुलवाया। खुरगार, भूरा और केरटू में बनवाया। आगे भी कई कालेज बनवाने की योजना है।
6-सवाल : स्वास्थ्य के क्षेत्र में आप क्या बदलाव लाएंगी?
जवाब : जिला स्वास्थ्य सुविधाओं में पिछड़ा है। केंद्र सरकार ने जो योजनाएं चलाई हैं कागजों में हैं। हमने पिछली सरकार में ट्रामा सेंटर बनवाया था। छोटे अस्पतालों में काम किया था। सरकार बदलने पर रुकावटें पैदा हुईं। सरकार ने हमारी बात को तव्वजो नहीं दी। सरकार बदलने पर वे काम कराएंगी।
7-सवाल : वर्तमान में कानून-व्यवस्था कैसी है। आप इसमें क्या बदलाव करेंगी?
जवाब : वर्तमान में कानून व्यवस्था बेहद खराब है। लोगों को नाजायज ढंग से मामलों में फंसाया जा रहा है। पलायन के मुद्दे पर शोर मचाया, लेकिन यूपी और केंद्र दोनों में भाजपा सरकार होने की वजह से विपक्षी की सुनवाई नहीं हुई। अब जनता मोदी सरकार को बदलेगी और कानून व्यवस्था में सुधार को पूरा प्रयास करेंगी।
8-सवाल : कोई ऐसा प्रोजेक्ट जिसकी जरूरत आपके संसदीय क्षेत्र को सर्वाधिक है, उसे पूरा कराने में आपके क्या प्रयास रहेंगे?
जवाब : जिला मुख्यालय शामली में जाम की सबसे बड़ी समस्या है। शामली में जाम से पूरा जिला प्रभावित होता है। शामली शुगर मिल का शहर के बीच में होने की वजह से ये समस्या है। उन्होंने संसद में भी ये समस्या उठाई, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। केवल आश्वासन दे दिए जाते हैं। इस बार वे इस समस्या को प्रमुखता के साथ उठाकर इसके समाधान का पूरा प्रयास करेंगी।
9-सवाल : कैराना पलायन और गन्ना बकाया के मुद्दे पर आपकी क्या राय है?
जवाब : कैराना से ना पलायन हुआ था न हुआ है और न होगा। कैराना तो भाईचारे वाला कस्बा है, लेकिन पलायन के नाम पर इसे सांप्रदायिक रुप देकर ध्रुवीकरण की कोशिश की गई, लेकिन जनता ने 2017 के विस चुनाव और फिर 2018 के लोक उपचुनाव में जवाब दे दिया। गन्ना भुगतान के लिए किसान तरस रहे हैं । परेशान हैं मगर सरकार अपने गुणगान करने में लगी है।
10-सवाल : हाल के दिनों में आपने क्या संघर्ष किया है?
जवाब : उन्होंने अपने क्षेत्र की कई समस्याएं संसद में उठाई, लेकिन केंद्र और प्रदेश दोनों में भाजपा सरकार है। कोई सुनने वाला नहीं है। रेलवे के नीचे अंडरपास बनाकर डाल दिए, उनमें बरसात में पानी भरता है। गांवों में आने जाने के रास्ते बंद हो जाते हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। वे लगातार इन्हें खत्म कराने को प्रयासरत हैं।
ताकत और जीत का आधार
-मुस्लिम, अनुसूचित जाति, जाट समेत सर्वसमाज का सहयोग
- पति मरहूम सांसद मन्नवर हसन की छवि
जानिए तबस्सुम बेगम को
उम्र:48
पार्टी : समाजवादी पार्टी
राजनीतिक करियर: 2009 में बसपा से सांसद चुनी गई। उसके बाद 2018 के उप चुनाव में सांसद बनीं, पति मुनव्वर हसन और ससुर अख्तर हसन भी सांसद रहे हैं।
शैक्षिक योग्यता : इंटर
परिवार: बेटा नाहिद हसन भी कैराना से विधायक, बेटी इकरा हसन
शौक : मैगजीन पढ़ना
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/