{"_id":"5c99eee8bdec22146a72d1ff","slug":"lok-sabha-elections-2019-saveral-chief-ministers-could-not-make-a-bridge-in-saharanpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिशन 2019: यूपी के इस जिले में एक पुल न बनवा पाए चार मुख्यमंत्री, योगी कर चुके हैं छह दौरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिशन 2019: यूपी के इस जिले में एक पुल न बनवा पाए चार मुख्यमंत्री, योगी कर चुके हैं छह दौरे
Tue, 26 Mar 2019 02:50 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 26 Mar 2019 02:50 PM IST
विज्ञापन
रामपुर मनिहारन में टूटा पड़ा पुल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के सहारनपुर में रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव कल्लरपुर गुर्जर में दो दशक से अधिक समय से पूर्वी यमुना नहर का पुल टूटा पड़ा है। इस पुल के निर्माण के लिए ग्रामीण तत्कालीन चार मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव, राजनाथ सिंह, मायावती और अखिलेश यादव से गुहार लगा चुके हैं। हर बार आश्वासन देकर उन्हें टरका दिया जाता है। सहारनपुर लोकसभा सीट के दर्जन भर गांवों के ग्रामीण पुल न होने से परेशानी झेल रहे हैं।
विज्ञापन
काम न आया चुनाव बहिष्कार
पिछली विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार तक की घोषणा की थी। कई बार धरना प्रदर्शन भी किया। लेकिन कोई तरकीब काम नहीं आई। सांसद राघव लखनपाल शर्मा को भी ज्ञापन देकर पुल बनवाने की मांग की, लेकिन पुल नहीं बनवाया गया।
विज्ञापन
ये गांव हैं प्रभावित
कल्लरपुर गुर्जर, ढाकादेवी, तुरमतखेड़ी, नैनखेड़ी, जानखेड़ा, सतीवाला, हंगावली, सांचलू, सलेमपुर, राजपुर, बबयाला आदि के ग्रामीण इससे प्रभावित हैं। इन्हें अपनी खेतों और दूसरे गांव तक पहुंचने में काफी लंबा सफर तय करना पड़ता है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं ग्रामीण
तुरमतखेड़ी के प्रधान प्रतिनिधि कौशर अली, कल्लरपुर गुर्जर प्रधान डिंपल, ढाकादेवी के प्रधान शमशाद आदि का कहना है कि पुल निर्माण में किसी भी जनप्रतिनिधि ने दिलचस्पी नहीं ली। नरेश कुमार, रामपाल सिंह, प्रवीन कुमार, प्रेम सिंह आदि का कहना है कि चुनाव के समय नेता वादे करते हैं। जीतने के बाद पलटकर गांव नहीं आते।