मिशन 2019: चुनावी परीक्षा के लिए तैयार 'मुस्लिम उम्मीदवार', ये रहा आजादी से 2014 का तक आंकड़ा
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मोदी लहर कहा जाए या ध्रुवीकरण। लोकसभा चुनाव 2014 के चक्रव्यूह में समूचे उत्तर प्रदेश के मुस्लिम उम्मीदवार ऐसे फंसे कि धड़ाम हो गए थे। एक भी मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर सका था।
2019 के महासमर में इस बार गठबंधन और कांग्रेस दोनों ही फिर से कई मुस्लिम उम्मीदवारों पर दांव खेलने जा रहे हैं। नजर यह रहेगी कि क्या इस चुनावी चक्रव्यूह को मुस्लिम उम्मीदवार तोड़ पाएंगे। आजादी के बाद से वर्ष 2014 के चुनाव तक ऐसा पहली बार हुआ, जब सबसे कम मुस्लिम सांसद लोकसभा पहुंचे। उप्र में तो सूपड़ा ही साफ हो गया। एक भी मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया। आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में मुस्लिम तबके से बीएसपी ने 19, सपा ने 13 और कांग्रेस ने 11 उम्मीदवार उतारे थे। वैसे कुल 52 मुस्लिम प्रत्याशी थे जो सभी धराशायी हो गए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हार गए थे कई सूरमा
2014 के चुनाव में पश्चिम यूपी की कई सीटों से मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। लेकिन सभी को हार का सामना करना पड़ा था। सहारनपुर से कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद चुनाव हारे थे तो कैराना से सपाई उम्मीदवार नाहिद हसन और बसपा के कंवर हसन दोनों ही चित हो गए। बिजनौर में साइकिल पर सवार होकर चुनावी मैदान में पहुंचे शाहनवाज राणा हार गए। मेरठ में हाथी पर सवार होकर आए शाहिद अखलाक हारे तो सपा से उम्मीदवार शाहिद मंजूर भी चुनावी रण में धड़ाम हो गए। बागपत में सपाई उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद हारे। गाजियाबाद में आप से चुनाव लड़ीं शाजिया इल्मी दस हजार वोटों का आंकड़ा भी नहीं छू पाईं। अलीगढ़ में सपा के जफर आलम हारे। मुरादाबाद में सपा के एसटी खान, बसपा के हाजी याकूब कुरैशी, पीस पार्टी के मो. इरफान और कांग्रेस की बेगम नूरबानो चुनाव हार गईं। मुरादाबाद जैसी ही हालत रामपुर में रही। यहां सपा के नसीर खान, कांग्रेस के नवाब काजम अली, बसपा के अकबर हुसैन व एआईएमएफ की जन्नत निशां चुनाव हार गईं। अमरोहा में बसपा के फरहत हसन हारे।
उपचुनाव में एक सीट मिली
कैराना उपचुनाव में अवश्य मुस्लिम प्रत्याशी को सफलता मिली। रालोद से चुनाव लड़ीं तब्बसुम हसन चुनाव जीत गईं। उन्होंने लोकसभा में यूपी की ओर से पहली मुस्लिम सांसद होने का रास्ता तय किया।
कांग्रेस लगा सकती है सेंध
इस समीकरण में कांग्रेस सेंध लगा सकती है। कहीं कांग्रेस मजबूत मुस्लिम को चुनावी मैदान में उतार सकती है तो कहीं दलित या ओबीसी को। ऐेसे में इन सीटों पर कांग्रेस भारी परेशानी खड़ी कर सकती है।
संख्या भारी, गठबंधन भी है तैयार
देश के सर्वाधिक आबादी वाले प्रांत उत्तर प्रदेश में 3.84 करोड़ मुसलमान हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 19 फीसदी है। प्रदेश में सर्वाधिक मुस्लिम बहुल रामपुर है जहां 50.57 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। राज्य में कुल 20 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले जिलों की संख्या 21 है। जनगणना-2011 के मुताबिक देश की कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या 14 प्रतिशत है जबकि उत्तर प्रदेश में यह 19 प्रतिशत है। देश में सर्वाधिक मुस्लिम आबादी भी उत्तर प्रदेश में है। हालांकि कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या के प्रतिशत के मामले में लक्षद्वीव, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल और केरल के बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है। उत्तर प्रदेश को रामपुर में 50.57 प्रतिशत, मुरादाबाद में 47.12 प्रतिशत, बिजनौर 43 प्रतिशत, सहारनपुर 42 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर 42 प्रतिशत, ज्योतिबाफुलेनगर 40 प्रतिशत, बलरामपुर में 37 प्रतिशत है। इसी तरह मेरठ, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बागपत, गाजियाबाद, पीलीभीत, संत कबीर नगर, बाराबंकी, बुलंदशहर, बदायूं, लखनऊ और खीरी में मुस्लिम आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है। उत्तर प्रदेश में सबसे कम मुस्लिम आबादी ललितपुर में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां मुस्लिम आबादी अधिक है वहीं बुंदेलखंड में यह अपेक्षाकृत कम है।
वहीं अनुसूचित जाति के लोगों की आबादी मेरठ में 18.44, बागपत में 10.98, गाजियाबाद में 18.4, सहारनपुर में 21.73, मुजफ्फरनगर में 13.50, गौतमबुद्धनगर में 16.31, बिजनौर में 20.94, बुलंदशहर में 20.21, अलीगढ़ में 21.20, मुरादाबाद में 15.86, रामपुर में 13.38 प्रतिशत बताई जाती है। हालांकि यह गणना साल 2011 की है। अब इसमें इजाफा हो चुका है। ऐसे में यह तो तय माना जा रहा है कि दलित मुस्लिम का समीकरण यहां खासी ताकत रखता है जिसका लाभ गठबंधन को हो सकता है। इसके अलावा बसपा सोशल इंजीनियरिंग की भी तैयारी कर रही है।
लोकसभा में मुस्लिम सांसदों की संख्या
वर्ष संख्या
1952 36
1957 24
1962 32
1967 29
1971 27
1977 32
1980 46
1985 41
वर्ष संख्या
1989 33
1991 28
1996 26
1998 29
1999 31
2004 37
2009 28
2014 22
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