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मेरठ मंडल की पांचों सीटों पर गठबंधन धड़ाम, आठ प्रत्याशी मिलकर भी नहीं पा सके 8 हजार वोट

Fri, 24 May 2019 04:29 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 24 May 2019 04:29 PM IST
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Lok Sabha Election 2019 Result: Coalition fall off on the five seats of Meerut division
हाजी याकूब कुरैशी -बसपा - फोटो : अमर उजाला
मेरठ मंडल की पांचों सीटों पर गठबंधन धड़ाम हो गया। भाजपा ने अपनी जीत का रास्ता प्रशस्त कर दिया। यहां न दलित-मुस्लिम समीकरण चल पाया और न ही दिग्गजों के दावे। भाजपा एक बार फिर यहां सिरमौर साबित हुई।
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मेरठ में मुकाबला सबसे ज्यादा मुश्किल रहा। आमने-सामने की कड़ी टक्कर रही। लेकिन आखिरकार राजेंद्र अग्रवाल ने मैदान मार ही लिया। यहां माना यह जा रहा था कि दलित-मुस्लिम समीकरण के अलावा जाटों तथा अन्य वर्ग का कुछ वोट मिलकर हाथी की नैया पार लगा देगा।
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इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र अग्रवाल पर भी निगाहें थीं कि वह किसका कितना वोट काट पाएंगे। उन्हें 34 हजार वोट मिले और उन्होंने भाजपा के वोट काटे भी। लेकिन भाजपा की नैया मामूली अंतर से ही सही, पर मंझधार से बाहर निकल ही गई। 
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बागपत में एक बार फिर से सत्यपाल सिंह भारी पड़े। रालोद सुप्रीमो अजित सिंह ने यहां राजनीतिक पैतरा इस्तेमाल किया था। खुद को मुजफ्फरनगर शिफ्ट किया और अपने पुत्र जयंत चौधरी के लिए बागपत से जमीन तैयार करने की कोशिश की।

जमकर मेहनत भी की और बार बार यह मैसेज देने की कोशिश की कि मुजफ्फरनगर में वह बड़ी उम्मीद से और शायद अंतिम चुनाव लड़ रहे हैं। बागपत में भी खूब इसके समीकरण तैयार किया। लेकिन यह दांव नहीं चल पाया। दोनों जगह के समीकरण ध्वस्त हो गए। वहां अजित सिंह हारे और यहां जयंत भी धड़ाम हो गए। 

तिलिस्म नहीं तोड़ पाए
गाजियाबाद सीट पर भाजपा सिरमौर रही। भाजपा के प्रत्याशी व पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। गाजियाबाद लोकसभा सीट का मिजाज नहीं बदला। गठबंधन यहां बेअसर रहा। गठबंधन की तमाम मशक्कत के बावजूद भाजपा के जीत का अंतर करीब यहां पांच लाख का रहा। 

गौतबुद्घनगर में डॉ. महेश शर्मा ने फिर से जीत की पटकथा लिख दी। उधर बुलंदशहर में भी यही हाल रहा है। यहां भी भोला सिंह ने जबरदस्त तरीके से अपनी जीत की पटकथा लिख दी। 

ये कई सीटें तो ऐसी रहीं, जहां शुरूआत से ही भाजपा ने बढ़त बना ली थी। मेरठ मंडल की इन सभी सीटों पर भाजपा का ही जादू चला। दरअसल, इन सीटों पर दलित-मुस्लिम समीकरण तो रहा। लेकिन अन्य सभी वोटों का बना तिलिस्म यह समीकरण तोड़ ही नहीं पाया। नतीजा, भाजपा की काट गठबंधन ढूंढ ही नहीं पाया।

8 प्रत्याशी मिलकर भी नहीं पा सके 8 हजार वोट
मेरठ। 2019 में मेरठ हापुड़ लोकसभा का चुनाव कुछ आंकड़ों के कारण हमेशा याद रहेगा। भाजपा और गठबंधन के बीच लड़ाई ऐसी सिमटी की कुल मतदान का करीब 96 प्रतिशत इन्हीं दोनों के बीच सिमट गया। हालत ऐसी रही कि कुल 11 प्रत्याशियों में से यदि भाजपा, बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी को छोड़ दें तो बाकी 8 प्रत्याशियों को कुल 8 हजार वोट भी नहीं मिल सके।  

अमर उजाला ने 20 मई को साफ लिख दिया था कि मेरठ सीट पर आमने सामने की टक्कर है और 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता भाजपा और बसपा प्रत्याशी के बीच ही सिमटे नजर आ रहे हैं। ऐसे में बाकी 9 प्रत्याशियों के सामने जमानत बचाना भी बड़ी चुनौती होगा। ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर अमर उजाला का यह सर्वे पूरी तरह सही साबित हुआ और मतगणना के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई।

मेरठ सीट पर ईवीएम और पोस्टल बैलेट सहित कुल 1216413 वोट पड़े। जिसमें भाजपा और बसपा प्रत्याशी को 11,67,639 वोट बांट लिए। बाकी बचे वोटों में से कांग्रेस के हरेंद्र अग्रवाल ने 34479 मत हासिल किए।
जबकि अन्य आठ प्रत्याशी अफजाल को 882, आरती अग्रवाल को 957, किरण आरसी जाटव को 512, धर्मेंद्र को 489, नासिर अली को 921, राजेश गिरि को 978, श्रवण अग्रवाल को 1025 और सहंसरपाल को 2215 वोट मिले। जबकि नोटा के नाम पर भी 6316 का आंकड़ा दर्ज हुआ। भाजपा और बसपा प्रत्याशी को छोड़ दें तो बाकि प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। 

नोटा रहा चौथे नंबर पर, आठ प्रत्याशियों से आगे 
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर हार जीत को लेकर रात तक खींचतान होती रही। हार जीत में नोटा की भी अहम भूमिका रही। नोटा चौथे नंबर पर रहा। मतदान के दौरान 6316 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया। अगर यह नोटा न दबता और हारने या जीतने वाले के पक्ष में डलता तो हार जीत में काफी फर्क पड़ सकता था। मेरठ में 11 प्रत्याशी थे।

सामान्य शब्दों में नोटा का मतलब यह होता है कि अगर मतदाता किसी प्रत्याशी को पसंद नहीं करता है तो वह नोटा का बटन दबाए। नोटा की बात करें  तो ईवीएम पर 6271 लोगों ने नोटा दबाया और 45 लोगों ने पोस्टल वोट केजरिए नोटा का इस्तेमाल किया। कुल वोटों में से 0.52 प्रतिशत वोट नोटा पर पड़े। नोटा से नीचे रहने वाले प्रत्याशियों में बहुजन महापार्टियों के अफजाल को 882 वोट  पड़े। शिवसेना की आरती अग्रवाल को 957 वोट पड़े।

कर्तव्य राष्ट्रीय पार्टी की किरन सी जाटव को 512 वोट, भारतीय जनता दल के धर्मेंद्र को 489 वोट, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशी नासिर अली खान को 921 वोट, सर्वोदय भारत पार्टी के राजेश गिरी को 978 वोट, निर्दलीय प्रत्याशी श्रवण कुमार अग्रवाल को 1025 वोट और निर्दलीय सेंसरपाल सिंह को 2215 वोट पड़े। तीन प्रत्याशी भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल, गठबंधन के हाजी याकूब कुरैशी और कांग्रेस के हरेंद्र अग्रवाल  ही नोटा से आगे रहे।

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