लोकसभा चुनाव 2019: बड़ा मुद्दा बनेगा 'विकास', पश्चिमी यूपी में भाजपा का होमवर्क अधूरा
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पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने विकास को मुद्दा बनाया था, इस दौरान सड़कों पर काम भी होता दिखा, लेकिन निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार समस्या बनी रही। गांवों के संपर्क मार्गों का हाल काफी खराब है। कई परियोजनाएं अधूरी हैं। स्मार्ट सिटी जैसी महत्वाकांक्षी योजना पांच साल तक सर्वे की होड़ में ही दौड़ती रही, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत इसमें शामिल नहीं हो पाए, सहारनपुर शामिल हुआ भी तो कागजों में ही योजनाएं बनती रही, धरातल पर कुछ नहीं बदला। इस चुनाव में फिर विकास मुद्दा होगा, लेकिन इस बार परीक्षा भाजपा की है। विकास के मुद्दे पर धरातल की स्थिति की पड़ताल करती अमर उजाला की रिपोर्ट...
मेरठ: बस दावों में ही सिमटकर रह गया विकास
विकास की राह में देखे गए सपने अधूरे ही रह गए। खास तौर पर ऐसे प्रोजेक्ट जिनको चुनाव से पहले पूरे करने की बात कही गई, लेकिन वह पूरे नहीं हो पाए। ऐसे में इस चुनाव में भी विकास का मुद्दा बना रहेगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे
सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट रहा। चूंकि यातायात मेरठ की बड़ी समस्या है। मेरठ से दिल्ली के बीच सवा से डेढ़ लाख वाहन रोज आते-जाते हैं। दिल्ली से मेरठ के बीच रोज ही घंटों जाम लगता है। ऐसे में दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे पर काम शुरू हुआ। सात हजार करोड़ से ज्यादा के इस प्रोजेक्ट पर जल्द ही काम पूरा करने की बात कही गई।
मेरठ की सीमा में अलग काम हो रहा है और गाजियाबाद में अन्य टीमें लगी हैं। यह काम भी अधूरा रह गया। अभी तक सभी जगह जमीन का अधिग्रहण भी नहीं हुआ है। किसानों को मुआवजा न मिलने से काम बाधित है। इंटरचेंज, आरओबी, अंडरपास पर काम अधूरे पड़े हैं। दावा था कि चुनाव से पहले कम से कम एक तरफ से चालू कर दिया जाएगा, पर यदि अगले एक साल में भी यह चालू हो जाए तो बड़ी बात होगी।
रैपिड ट्रेन
30 हजार करोड़ का यह प्रोजेक्ट पूरा होना तो दूर, शुरू तक नहीं हो पाया। चुनाव आते-आते इसके शिलान्यास की रस्म अदायगी ही हुई। मिट्टी जांच भी हुई, लेकिन अभी भी इस पर काम शुरू होना है। इसमें दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन चलाई जानी है।
मेट्रो ट्रेन
मेट्रो के एक एलाइनमेंट को खारिज कर दिया गया। इस पर रैपिड ही चलाने को मंजूरी मिली। दूसरे एलाइनमेंट यानी श्रद्धापुरी से गोकुलपुर तक पर इसे चलाने की बात कही जा रही है, पर डीपीआर भी केन्द्र सरकार ने मंजूर नहीं की।
आईटी पार्क
मेरठ में आईटी पार्क इस बार भी सपना ही रह गया। काम शुरू हुआ पर कब खत्म होगा, इसकी कोई डेडलाइन नहीं। कहा गया था कि यह मेरठ के युवाओं के लिए बड़ा काम होगा। रोजगार के नए द्वारा खोले जाएंगे, पर कुछ नहीं हो पाया। वेदव्यासपुरी में निर्माणाधीन आईटी पार्क अब भी अधर में है।
गंगा पर पुल
गंगा पर पुल का निर्माण शुरू तो हुआ, पर इस बार भी पूरा नहीं हो पाया। यह पुल हस्तिनापुर से चांदपुर को जोड़ रहा है। मेरठ और बिजनौर के लोग अर्से से इनके पूरा होने की बाट जोह रहे हैं। इसकी लागत 140 करोड़ रुपये है।
इनर रिंग रोड
400 करोड़ से ज्यादा के इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं हो पाया। मेरठ के चारों ओर इनर रिंग रोड बनाई जानी थी, ताकि यातायात सुलभ हो सके।
कांवड़ मार्ग
335 करोड़ की लागत से गंगनहर की दूसरी पटरी का निर्माण होना था, पर यह शुरू ही नहीं हो पाया।
अधर में लटकीं परियोजनाएं
मेरठ : जो पूरे नहीं हुए या शुरुआत ही नहीं हुई-दिल्ली एक्सप्रेस वे, रैपिड ट्रेन, मेट्रो ट्रेन, आईटी पार्क, गंगा पर पुल, इनर रिंग रोड, कांवड़ मार्ग, हॉकी एस्ट्रोटर्फ मैदान, अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज, ग्रामीण क्षेत्र में मिनी स्टेडियम
सहारनपुर: 11 सितंबर को 2018 को सहारनपुर में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे का शिलान्यास किया लेकिन सात माह भी काम शुरू नहीं हो पाया।
बिजनौर: केंद्रीय विद्यालय का निर्माण शुरू नहीं। विदुर कुटी के विकास और मेडिकल कालेज की स्थापना घोषणा से आगे नहीं बढ़ी।
मुजफ्फरनगर: दिल्ली-सहारनपुर हाइवे और मेरठ-सोनीपत हाईवे फोरलेन करने का काम चल रहा है लेकिन धीमी रफ्तार से लोग परेशान है।
बागपत: पिछला लोकसभा चुनाव भाजपा ने दिल्ली-सहारनपुर हाइवे को मुद्दा बनाकर लड़ा था। इसके हाईवे निर्माण की सुध भी चुनावी साल में ली है।
शामली: कलक्ट्रेट निर्माण के लिए बजट नहीं मिला, बाईपास निर्माण पर काम शुरू नहीं हो पाया। मेरठ करनाल हाईवे की हालत खस्ता है।
चुनाव से पहले सहारनपुर में विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की गई। कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई और पुवांरका राजकीय महाविद्यालय का चयन हो गया, लेकिन यूनिवर्सिटी का शिलान्यास होने से पहले ही आचार संहिता लग गई।
सहारनपुर स्मार्ट सिटी में शामिल तो हो गया, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी कोई खास काम इस पर नहीं हुआ। सहारनपुर- नागल मिनी बाईपास का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। आचार संहिता लगने से पहले आनन फानन में विकास कार्यों के शिलान्यास कराए। पुल खुमरान को बनाने का कार्य शुरू किया गया है।
हकीकतनगर निवासी विरेंद्र बहल का कहना है कि घोषणाओं के अनुसार काम होता तो आज तस्वीर अलग ही होती। खानआलमपुरा निवासी इसरार खान का कहना कि चुनाव से दावे और वायदे तो बहुत हुए, मगर अमल नहीं होता है। अमित गुलाटी का कहना है कि शहर की सबसे बड़ी समस्या बिगड़ी यातायात व्यवस्था और रोजाना लगने वाला जाम है। इससे राहत नहीं मिल पाई है। पुरानी मंडी निवासी अधिवक्ता खालिद अंसारी का कहना है कि विकास कार्यों की रफ्तार बहुत धीमी है।
शामली -कुछ आस पूरी तो कुछ रही अधूरी
जिले में पिछले पांच साल में शहर के अंदर सड़के बनी हैं। लेकिन शहर में जाम, शामली बाईपास और कलेक्ट्रेट का निर्माण की आस अभी अधूरी है। जिले में चार नए राजकीय कालेज मंजूर हुए हैं, जिनमें दो बन चुके हैं। पानीपत -करनाल हाईवे को स्वीकृति मिली। वर्तमान में हालत खस्ता है। शामली बाईपास निर्माण का काम भी शुरू नहीं हुआ। पानीपत-कोटद्वार मार्ग को राष्टीय राजमार्ग का दर्जा दिया गया है।
जलालपुर में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना हुई है। उद्यमी अंकित गोयल का कहना है कि कंडेला इंडस्ट्रीयल एरिया में पांच सालों में काफी काम हुए हैं। पहले यहां सड़कों, बिजली, नालों की हालत काफी खराब थी। व्यापारी नेता धनश्यामदास गर्ग का कहना है कि शहर में जाम की समस्या पर सरकार ध्यान देना चाहिए।
पिछले पांच साल में जिले को कई नई सौगात मिलीं। इनमें से कुछ काम पूरे हो गए तो कुछ की स्वीकृति मिल चुकी है। सड़कों और रेलमार्गों के अलावा जिले को अभी कई सुधार की दरकार है। पर्यटन स्थल के रूप में शुकतीर्थ का विकास नहीं हो सका। हालांकि उसका नाम शुक्रताल से शुकतीर्थ जरूर किया गया। शहर की सफाई और जाम बड़ी समस्याएं हैं।
3500 करोड़ से पानीपत-खटीमा वाया शामली, मुजफ्फरनगर, जानसठ, नगीना तक राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का शिलान्यास हो चुका है। 550 करोड़ की लागत से तीन मीटर अतिरिक्त चौड़ाई बढ़ाने का कार्य चल रहा है। मेरठ-करनाल राज्य राजमार्ग को एनएच का दर्जा मिला। पीनना से रामपुर तिराहे तक रिंग रोड और मुजफ्फरनगर-बुढ़ाना-बड़ौत मार्ग का निर्माण शुरू हुआ। रेलवे स्टेशन का विस्तारीकरण शुरू हो चुका है।
पेपर और लोहा उद्योग को नहीं मिला पैकेज
उद्यमी भीमसेन कंसल का कहना है कि विभिन्न कारणों से उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। सरकार ने जो कदम उठाए हैं उनका फायदा आने वाले समय में लगेगा। जीएसटी भी उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। उद्यमी सतीश गोयल का कहना है कि स्टील कारोबार की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। फिलहाल डिमांड और सप्लाई में बड़ा अंतर चल रहा है। बिजली दरों में इजाफा भी उद्यमियों पर भारी पड़ रहा है।
पिछले पांच साल की बात करें तो विकास कार्यों की शुरूआत तो हुई है। लेकिन अभी बागपत की सूरत नहीं बदली। रेलवे के दोहरीकरण का प्रस्ताव मंजूर, जिवाना में रेलवे हाल्ट, ईएमयू ट्रेन का संचालन, बावली में केंद्रीय विद्यालय की शुरूआत कराई गई। दिल्ली-सहारनपुर हाइवे को सरकार ने स्वीकृति दी। लेकिन कार्य मिट्टी भराव से आगे नहीं बढ़ा। छपरौली पुल का निर्माण भी अभी तक अधूरा है। मेरठ-सोनीपत मार्ग का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की शुरूआत हुई। इससे पश्चिम यूपी ही नहीं बल्कि चार राज्यों के लोगों को लाभ हुआ। गढ़ी कलंजरी में हिंडन नदी पर 182 मीटर के पुल का निर्माण भी चल रहा है।
बिजनौर -इस बार कसौटी पर होगी भाजपा
विकास के मुद्दे पर पिछला चुनाव लड़ी भाजपा को इस बार इसी मुद्दे की कसौटी पर परीक्षा देनी है। फोर लेन सड़कों का जाल बिछा है, लेकिन शहर व आसपास के गांवों में सड़कों की हालत अब भी खस्ता है। बिजनौर-मुरादाबाद मार्ग फोर लेन हुआ। उत्तराखंड व कुमांयू को जोड़ने के लिए जिले में फोर लेन मार्ग पर काम चल रहा है।
बिजनौर -बदांयू, चांदपुर-नूरपुर -स्योहारा, नूरपुर -केेतवाली, मडावर -दयालवाला मार्ग हाल ही में फोरलेन के लिए स्वीकृत हुए हैं। मुजफ्फरनगर-नगीना को फोर लेन के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। किसान राजपाल सैनी कहते हैं कि सड़कों पर जितना काम हुआ है, उतना बाकी चीजों में भी होना चाहिए। व्यापारी निश्चल अग्रवाल के अनुसार गांवों में सड़कों की हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। गांवों में भी सड़कों की हालत खराब है।