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मिशन 2019: रालोद पर कांग्रेस मेरहबान, इस सीट पर नहीं उतारा प्रत्याशी, भाजपा-गठबंधन का सीधा मुकाबला

Mon, 18 Mar 2019 01:34 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 18 Mar 2019 01:34 PM IST
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Lok sabha 2019: Congress Candidate will not contested in Baghpat seat, BJP-Coalition's direct fight
राहुल गांधी, अजित चौधरी

आखिरकार यह तय हो गया कि बागपत सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी नहीं उतारेगी। भाजपा और गठबंधन का यहां सीधा मुकाबला होने के आसार बन गए हैं। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह से पुराने रिश्ते और वक्त की जरूरत के चलते कांग्रेस ने यहां से हाथ पीछे खींच लिए हैं। लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन की संभावनाओं को बरकरार रखा गया है। 

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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने एलान कर दिया है कि सूबे की सात सीटों पर प्रत्याशी नहीं उतारे जाएंगे। इनमें बागपत के अलावा मुजफ्फरनगर सीट भी शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि पहले रालोद के लिए सिर्फ बागपत सीट छोड़े जाने की चर्चा शुरू हुई,  लेकिन रालोद अध्यक्ष अजित सिंह इस बार बागपत सीट छोड़कर मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ रहे हैं।
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चौधरी अजित सिंह के कांग्रेस से पुराने रिश्ते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह भी साल 1967 तक कांग्रेस के थिंक टैंक में शामिल रहे। यही वजह है कि कांग्रेस ने दोनों सीटें छोड़ दी, इसका सीधा लाभ गठबंधन के प्रत्याशियों को होगा। भाजपा के नेता कांग्रेस की चाल पर नजर रखे हैं। 

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यूं ही मेहरबान नहीं हुई कांग्रेस
साल 2009 का लोकसभा चुनाव भाजपा और रालोद ने साथ मिलकर लड़ा। चुनाव के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए कुछ सांसदों की जरूरत पड़ सकती है। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह भाजपा का साथ छोड़कर जाट आरक्षण दिलाने का दावा कर कांग्रेस सरकार में शामिल हुए। 

दंगे से बढ़ी नजदीकियां
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद कांग्रेस से रालोद की नजदीकी रही। साल 2014 का चुनाव साथ मिलकर लड़ा। यही नहीं राजस्थान के चुनाव में भी कांग्रेस और रालोद साथ मिलकर लड़े और रालोद के अकेेले विधायक वहां की सरकार में मंत्री है। 

नब्बे के दशक तक कांग्रेस ने दिखाया दम
बागपत सीट पर कांग्रेस के टिकट पर साल 1952 में खुशीराम, 1957 में विष्णुशरण दुबलिश, 1962 में किशन चंद शर्मा, 1967 में रामचंद्र विकल सांसद चुने गए। वर्ष 1977 से 1991 तक के लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। इसके बाद लगातार वोट बैंक गिरता चला गया।

अमर उजाला ने जताई संभावना
अमर उजाला ने छह मार्च के अंक में कांग्रेस की रणनीति पर समाचार प्रकाशित किया। संभावना जताई थी कि बागपत से कांग्रेस प्रत्याशी नहीं उतारेगी। 

निर्दलीय मुस्लिम बन सकते हैं भाजपा की उम्मीद
कांग्रेस के फैसले के बाद भाजपा के रणनीतिकार फिर से मंथन में जुटे हैं। राजनीतिक सूत्रों को संभावना थी कि यदि कांग्रेस किसी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो गठबंधन को नुकसान होगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशियों पर भाजपा की उम्मीद रहेगी।

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