मेरठ में दिल्ली की युवतियों से सरेआम छेड़छाड़, गुंडागर्दी, पुलिस ने पीड़ितों को ही बनाया मुल्जिम
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विरोध करने पर युवतियों को घसीटकर ले जाने की कोशिश की। युवतियों के रिश्तेदार बचाव में आए तो दबंगों ने खुलेआम गुंडागर्दी दिखाते हुए सड़क पर गिराकर पीटा। लालकुर्ती पुलिस भी पीड़ितों की मदद करने के बजाय अराजकता पर उतर आई। युवतियों और उनके रिश्तेदारों का मेडिकल कराकर धमकाकर भेज दिया।
युवतियों ने इसका तीखा विरोध किया तो उनके साथ अश्लील हरकतें करनी शुरू कर दी। तभी वहां पहुंचे उनके रिश्तदारों ने इन लोगों से विरोध जताते कहा कि वह फैमिली से हैं और दिल्ली से आए हैं। जिस पर आरोपियों ने युवकों को सड़क पर गिराकर पीटा। युवती बचाव के लिए चिल्लाती रहीं, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इस दौरान युवतियों से पर्स भी छीन लिया।
हंगामे की सूचना पर लालकुर्ती पुलिस पहुंची। युवतियों ने शोर मचाते हुए पुलिसकर्मियों से कहा कि शराब के ठेके के बाहर जो लोग खड़े हैं इन्होंने छेड़छाड़ और मारपीट की है। इस बीच सेल्समैन शराब के ठेके में जा घुसा। आरोप है कि पुलिस ने सेल्समैन को तो कुछ नहीं कहा। लेकिन युवतियों पर ही नशा करने का आरोप लगाकर धमकाना शुरू कर दिया। पुलिस पीड़ितों को ही जबरन जीप में डालकर थाने ले गई।
जिस तरह से लालकुर्ती पुलिस ने अराजकता दिखाई, उससे पुलिस की भूमिका पर ही प्रश्नचिह्न लगने लगा है। आरोप है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की और पीड़ितों को ही कार्रवाई की धमकी देती रही। जबकि खुलेआम छेड़छाड़ और गुंडागर्दी करने वालों का बचाव करती रही। यह पहला मामला नहीं जब ठेके के सेल्समैन का पुलिस ने पक्ष लिया है। इससे पहले भी बेगमपुल स्थित शराब के ठेके पर छेड़छाड़ की घटनाएं हो चुकी हैं।
इंस्पेक्टर का अटपटा बयान
इंस्पेक्टर लालकुर्ती दिलीप शर्मा ने कहा कि पुलिस की जीप बेगमपुल पर पहुंची तो देखा कि वहां बखेड़ा हो रहा है। शराब के नशे में जो लोग थे, उन्हें पुलिस थाने ले आई। बिना शिकायत के भी पुलिस थाने ला सकती है, इसलिए मेडिकल कराया गया है। युवतियों के साथ जो युवक थे वह रिश्तेदार नहीं थे। वहीं, सीओ संजीव देशवाल ने भी मामला संज्ञान में न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
पीड़ितों को ही बनाया मुल्जिम
लालकुर्ती पुलिस ने मदद के बजाय पीड़ितों को ही मुल्जिम बना दिया। मौके पर कोई भी महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। दोनों युवतियों को पुरुष सिपाहियों ने घसीटकर पुलिस की जीप में बैठाया। उनके साथ के लोगों को धक्का देकर गिराया और धमकी दी। जब युवतियों ने सच्चाई बताई तो पुलिसकर्मी नहीं माने और पीड़ितों को ही कसूरवार बताने लगे।
युवतियां चेहरा ढंककर अपने को बेगुनाह बताती रहीं लेकिन पुलिस नहीं मानी। थाने में भी दोनों युवतियां बिलखने लगीं और परिजनों को कॉल कर आपबीती सुनाई। पुलिस ने पीड़ित पक्ष से ही महिला, उसके बेटे और दो युवकों का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया। उसके बाद उन्हें वहां से भगा दिया।
मामला गंभीर, जांच कराएंगे
मेरे पास मामला मारपीट का आया था। लेकिन यदि युवतियों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट हुई है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। लालकुर्ती पुलिस ने अगर पीड़ितों को ही मुल्जिम बनाया है तो उसकी भी जांच होगी। डॉ. एएन सिंह, एसपी सिटी