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Meerut News: संयम के बिना मुक्ति संभव नहीं, जीवन में आत्मनियंत्रण जरूरी
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। पर्युषण महापर्व के अवसर पर श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे तीन लोक महामंडल विधान में सोमवार को धर्म की गंगा प्रवाहित हुई। विधान के छठवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ का जलाभिषेक किया। श्रद्धालु मल्लिनाथ भगवान के समवशरण में पहुंचे और जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया। शांतिधारा करने का सौभाग्य पंकज जैन को प्राप्त हुआ। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का तिलक और माला पहनाकर स्वागत किया।
क्रांतिकारी मुनि प्रतीक सागर महाराज ने संयम धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि पंच इंद्रियों और मन को वश में रखना तथा षट्कायिक जीवों की रक्षा करना संयम है। उन्होंने कहा कि संयम के अभाव में मनुष्य स्वच्छंद होकर अपने लक्ष्य से भटक जाता है। जिस प्रकार हाथी के लिए अंकुश, घोड़े के लिए लगाम, वाहन के लिए ब्रेक और नदी के लिए तट जरूरी हैं, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में संयम आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में संयम अपनाने का आह्वान किया।
प्रवचन के बाद पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने समवशरण महामंडल विधान की मांगलिक क्रियाएं कराईं। नित्य नियम पूजन के बाद शीतलनाथ भगवान की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मंडल पर श्रीफल अर्पित कर पुण्यार्जन किया।
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दोपहर में सुगंध दशमी व्रत की कथा सुनाई गई। श्रद्धालुओं ने सभी मंदिरों में सामूहिक रूप से धूप अर्पित कर कर्मों की निर्जरा की। शाम को संगीतमय आरती, भजन और भक्ति कार्यक्रम हुआ। आरती का दीप प्रज्वलन पंकज जैन ने किया। गुरुकुल के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। भजन प्रतियोगिता के विजेताओं को आशा जैन और आभा जैन की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।
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हस्तिनापुर। पर्युषण महापर्व के अवसर पर श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे तीन लोक महामंडल विधान में सोमवार को धर्म की गंगा प्रवाहित हुई। विधान के छठवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ का जलाभिषेक किया। श्रद्धालु मल्लिनाथ भगवान के समवशरण में पहुंचे और जिनेंद्र भगवान का अभिषेक किया। शांतिधारा करने का सौभाग्य पंकज जैन को प्राप्त हुआ। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का तिलक और माला पहनाकर स्वागत किया।
क्रांतिकारी मुनि प्रतीक सागर महाराज ने संयम धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि पंच इंद्रियों और मन को वश में रखना तथा षट्कायिक जीवों की रक्षा करना संयम है। उन्होंने कहा कि संयम के अभाव में मनुष्य स्वच्छंद होकर अपने लक्ष्य से भटक जाता है। जिस प्रकार हाथी के लिए अंकुश, घोड़े के लिए लगाम, वाहन के लिए ब्रेक और नदी के लिए तट जरूरी हैं, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में संयम आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में संयम अपनाने का आह्वान किया।
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प्रवचन के बाद पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने समवशरण महामंडल विधान की मांगलिक क्रियाएं कराईं। नित्य नियम पूजन के बाद शीतलनाथ भगवान की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने मंडल पर श्रीफल अर्पित कर पुण्यार्जन किया।
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दोपहर में सुगंध दशमी व्रत की कथा सुनाई गई। श्रद्धालुओं ने सभी मंदिरों में सामूहिक रूप से धूप अर्पित कर कर्मों की निर्जरा की। शाम को संगीतमय आरती, भजन और भक्ति कार्यक्रम हुआ। आरती का दीप प्रज्वलन पंकज जैन ने किया। गुरुकुल के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। भजन प्रतियोगिता के विजेताओं को आशा जैन और आभा जैन की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।