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Meerut News: प्रकृति की पाठशाला में सीखा वन्यजीव संरक्षण का पाठ
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कार्यक्रम में मौजूद शिक्षक और बच्चे स्रोत संवाद
वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर वन रेंज कार्यालय परिसर में कार्यक्रम का आयोजन
-नेचर ट्रेल पर बच्चों ने देखे रंग-बिरंगे परिंदे,
-फोटोग्राफी और चित्रकला में दिखाया हुनर
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर बृहस्पतिवार को वन रेंज कार्यालय परिसर में वन विभाग की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के उपायों पर चर्चा हुई। दस प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के अलावा राजकीय महाविद्यालय हस्तिनापुर के विद्यार्थियों व प्रोफेसरों ने भाग लिया। फोटोग्राफी चैलेंज में भी प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन संरक्षक आदर्श कुमार रहे। कार्यक्रम की शुरुआत नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग से हुई। वन संरक्षक आदर्श कुमार ने कहा कि वन्यजीवों और मानव के बीच बेहतर तालमेल बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने हस्तिनापुर की जैव विविधता, पक्षियों, स्थानीय वनस्पतियों और गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख नितिन पोसवाल, शिक्षाविद सुनील पोसवाल, पक्षीविद् रजत भार्गव, जंतु विज्ञानी प्रो. नरेश कुमार, वनस्पति विज्ञानी विजयबीर सिंह, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओमप्रीति सिंह, साहित्य के प्रोफेसर मोनू सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. अमान समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी और चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया।
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वन विभाग के संसाधनों की लगी प्रदर्शनी
कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से विशेष प्रदर्शनी लगाकर छात्रों को जागरूक किया गया। इसमें अग्निशमन उपकरण, वन्यजीव रेस्क्यू में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, नर्सरी और वृक्षारोपण से संबंधित संसाधनों को प्रदर्शित किया गया। बच्चों को वन विभाग के कार्यों, वन्यजीव संरक्षण, अग्नि सुरक्षा, तेंदुआ रेस्क्यू में इस्तेमाल होने वाली गन, ट्रैप कैमरे नाइट विजन कैमरे के साथ पौधशाला और वृक्षारोपण गतिविधियों की जानकारी दी।
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-नेचर ट्रेल पर बच्चों ने देखे रंग-बिरंगे परिंदे,
-फोटोग्राफी और चित्रकला में दिखाया हुनर
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर बृहस्पतिवार को वन रेंज कार्यालय परिसर में वन विभाग की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के उपायों पर चर्चा हुई। दस प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों के अलावा राजकीय महाविद्यालय हस्तिनापुर के विद्यार्थियों व प्रोफेसरों ने भाग लिया। फोटोग्राफी चैलेंज में भी प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन संरक्षक आदर्श कुमार रहे। कार्यक्रम की शुरुआत नेचर ट्रेल और बर्ड वॉचिंग से हुई। वन संरक्षक आदर्श कुमार ने कहा कि वन्यजीवों और मानव के बीच बेहतर तालमेल बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने हस्तिनापुर की जैव विविधता, पक्षियों, स्थानीय वनस्पतियों और गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया।
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कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय, ब्लॉक प्रमुख नितिन पोसवाल, शिक्षाविद सुनील पोसवाल, पक्षीविद् रजत भार्गव, जंतु विज्ञानी प्रो. नरेश कुमार, वनस्पति विज्ञानी विजयबीर सिंह, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओमप्रीति सिंह, साहित्य के प्रोफेसर मोनू सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. अमान समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ ने संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी और चित्रकला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय और सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया।
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वन विभाग के संसाधनों की लगी प्रदर्शनी
कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से विशेष प्रदर्शनी लगाकर छात्रों को जागरूक किया गया। इसमें अग्निशमन उपकरण, वन्यजीव रेस्क्यू में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, नर्सरी और वृक्षारोपण से संबंधित संसाधनों को प्रदर्शित किया गया। बच्चों को वन विभाग के कार्यों, वन्यजीव संरक्षण, अग्नि सुरक्षा, तेंदुआ रेस्क्यू में इस्तेमाल होने वाली गन, ट्रैप कैमरे नाइट विजन कैमरे के साथ पौधशाला और वृक्षारोपण गतिविधियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में मौजूद शिक्षक और बच्चे स्रोत संवाद

कार्यक्रम में मौजूद शिक्षक और बच्चे स्रोत संवाद