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कटान किया और मीट फैक्टरी के बाहर फेंक दिए अवशेष

Thu, 31 Jan 2019 01:48 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Thu, 31 Jan 2019 01:48 AM IST
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ktan kiya aur meat factory ke bhar faink diye avsesh
meerut - फोटो : meerut
 हापुड़ रोड पर गांव अलीपुर के आसपास चल रही मीट फैक्टरियां पानी को तो जहरीला बना ही रही हैं, साथ ही वातावरण को भी दूषित कर रही हैं। ज्यादातर फैक्टरियों के अवशेषों को आसपास ही या फिर दूषित पानी के तालाबों में फेंका जा रहा है। इन अवशेषों के कारण बुरी तरह दुर्गंध फैली हुई है।
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हापुड़ रोड पर बनी मीट फैक्टरियों के आसपास के 25 गांवों में एक साल में करीब 400 मौतें हो चुकी हैं। वहीं मीट फैक्टरी संचालकों का दावा है कि वे ईटीपी का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे निकलने वाले पानी को सिंचाई के काम में ला रहे हैं। लेकिन मीट फैक्टरियों के पास बने तालाब इस बात को झुठला रहे हैं। बोरों में भरकर अवशेषों को बाहर फेंका जा रहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने की छापामारी
अमर उजाला में मामला प्रकाशित होने के बाद बुधवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने अलीपुर क्षेत्र में छापेमारी की। गुपचुप तरीके से जांच की और कागजात चेक किए। सैंपलिंग की बात भी सामने आ रही है।
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गांवों में नहीं पेयजल के उचित साधन  
हापुड़ रोड के आसपास भूजल दूषित होने के कारण जल निगम ने कई गांवों में गहरी बोरिंग कर टंकी के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था कराई है। कई गांवों में अभी तक ग्रामीण सरकारी नलों, निजी हैंडपंपों या सबमर्सिबल का पानी पी रहे हैं। क्योंकि सभी गांवों में टंकियां नहीं हैं।

प्रदूषण विभाग ने स्थिति को बताया सामान्य         
प्रदूषण विभाग का कहना है कि इस क्षेत्र में दो तरह के प्लांट हैं। पहला जिसमें मीट प्रोसेेसिंग का काम होता है, दूसरा जिसमें पशुओं के अवशेषों से मुर्गी दाना बनाया जाता है। चल रहे सभी स्लाटर हाउसों में ईटीपी लगा है। मुर्गी दाना प्लांट में पानी का प्रयोग नहीं होता। सभी ठीक काम कर रहे हैं।
हाल ही में प्रदूूषण विभाग ने मौतों का कारण पता लगाने के लिए कई गांवों में भूजल के नमूने लिए थे। कुछ नमूनों में आयरन की मात्रा ज्यादा मिली थी।
- डा. योगेंद्र, सहायक वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मेरठ
 - खरखौदा कस्बे में कई सालों से बीमारी से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका कारण मीट फैक्टरियों से निकलने वाला दूषित जल ही है। ं
- रमेश चंद ठेकेदार, चेयरमैन, नगर पंचायत खरखौदा
मामला गंभीर है। मैंने स्वास्थ्य विभाग को जांच सौंपी है कि आखिर ये मौतें क्यों हो रही है। रिपोर्ट आने पर आगे का एक्शन लिया जाएगा।
- अनिल ढींगरा, डीएम
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