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अर्ध रात्रि में चमत्कारों के बीच हुआ कृष्ण का जन्म: राधा चेतन
Wed, 27 Aug 2025 02:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 27 Aug 2025 02:34 AM IST
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श्रद्धा पुरी फेज 2 में कथा का आयोजन।
श्रद्धापुरी फेस दो में चल रही भागवत कथा में श्रीकृष्ण और वामन अवतार की लीला कथा सुनाई
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रद्धापुरी फेस दो में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से आए कथा व्यास राधा चेतन जी महाराज ने वामन अवतार और कृष्ण जन्म की कथा सुनाई।
कथा व्यास ने बताया कंस भगवान श्रीकृष्ण को मारना चाहता था लेकिन जब कृष्ण का जन्म हुआ तब आधी रात को एक चमत्कार हुआ। वासुदेव की बेड़ियां खुल गई और जेल के द्वार खुद खुल गए। वासुदेव ने नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार की और गोकुल में नंद और यशोदा के पास छोड़ दिया। यशोदा की पुत्री के साथ कृष्ण की अदला बदली हुई। कंस ने उस कन्या को मारने की कोशिश की पर वह देवी बनकर उड़ गई। इस तरह कृष्ण गोकुल में सुरक्षित रहे और वहां उनका लालन पालन हुआ। कथा के मध्य में वामन अवतार के विषय में वर्णन करते हुए बताया कि वामन एक छोटे कद के ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए। उनका स्वरूप सौम्य, विद्वान और आकर्षक था। उनके हाथ में छत्र और कमंडल जैसे संन्यासी के चिह्न थे। बलि के दरबार में पहुंचे वामन ने दान में केवल तीन पग भूमि मांगी। बलि ने उनकी सादगी पर हंसते हुए सहमति दे दी। प्रथम पग में उन्होंने संपूर्ण पृथ्वी, द्वितीय पग में स्वर्ग और अंतरिक्ष नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान शेष न रहा तो बलि ने भक्ति और समर्पण के साथ अपना सिर झुका दिया। वामन ने बलि को पाताल लोक भेजा। किंतु उनकी भक्ति और सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल का राजा नियुक्त किया। कथा श्रवण करने वालों में महेंद्र उपाध्याय, रविंद्र उपाध्याय, मयंक, संदीप ठाकुर, विवेक भार्गव, पवन, अक्षित, अमित, अनिल पांडेय, राजेश और देवेंद्र रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। श्रद्धापुरी फेस दो में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से आए कथा व्यास राधा चेतन जी महाराज ने वामन अवतार और कृष्ण जन्म की कथा सुनाई।
कथा व्यास ने बताया कंस भगवान श्रीकृष्ण को मारना चाहता था लेकिन जब कृष्ण का जन्म हुआ तब आधी रात को एक चमत्कार हुआ। वासुदेव की बेड़ियां खुल गई और जेल के द्वार खुद खुल गए। वासुदेव ने नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना नदी पार की और गोकुल में नंद और यशोदा के पास छोड़ दिया। यशोदा की पुत्री के साथ कृष्ण की अदला बदली हुई। कंस ने उस कन्या को मारने की कोशिश की पर वह देवी बनकर उड़ गई। इस तरह कृष्ण गोकुल में सुरक्षित रहे और वहां उनका लालन पालन हुआ। कथा के मध्य में वामन अवतार के विषय में वर्णन करते हुए बताया कि वामन एक छोटे कद के ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए। उनका स्वरूप सौम्य, विद्वान और आकर्षक था। उनके हाथ में छत्र और कमंडल जैसे संन्यासी के चिह्न थे। बलि के दरबार में पहुंचे वामन ने दान में केवल तीन पग भूमि मांगी। बलि ने उनकी सादगी पर हंसते हुए सहमति दे दी। प्रथम पग में उन्होंने संपूर्ण पृथ्वी, द्वितीय पग में स्वर्ग और अंतरिक्ष नाप लिया। तीसरे पग के लिए जब कोई स्थान शेष न रहा तो बलि ने भक्ति और समर्पण के साथ अपना सिर झुका दिया। वामन ने बलि को पाताल लोक भेजा। किंतु उनकी भक्ति और सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल का राजा नियुक्त किया। कथा श्रवण करने वालों में महेंद्र उपाध्याय, रविंद्र उपाध्याय, मयंक, संदीप ठाकुर, विवेक भार्गव, पवन, अक्षित, अमित, अनिल पांडेय, राजेश और देवेंद्र रहे।