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अवैध हथियारों की बड़ी मंडी बन रहा मेरठ का यह क्षेत्र, एटीएस की कार्रवाई के बावजूद आंखें मूदे रहती है पुलिस

Mon, 08 Jun 2020 11:05 PM IST
Dimple Sirohi देवेंद्र कुमार गुप्ता, अमर उजाला, मेरठ
देवेंद्र कुमार गुप्ता, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 08 Jun 2020 11:05 PM IST
सार

- एनआईए, एटीएस की कार्रवाई के बाद भी अनजान रहती है थाना पुलिस
- आरोपियों से साठगांठ के लगते रहे हैं आरोप,
- 2000 में तमंचा और 30 हजार रुपये तक में बिकती है पिस्टल

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kithore in Meerut is becoming a big market for illegal arms
अवैध हथियार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का किठौर क्षेत्र अवैध हथियारों की सप्लाई का गढ़ बन चुका है। पहले आतंकी गतिविधियों के चलते एनआईए और अब खालिस्तान आतंकियों को अवैध हथियार सप्लाई करने के खुलासे के बाद भी किठौर पुलिस ने दूसरे दिन जांच नहीं की। ऐसे में पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं।
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किठौर क्षेत्र में कई बार दिल्ली, पंजाब, बिहार आदि राज्यों की पुलिस अवैध हथियारों को लेकर छापा मार चुकी है। इन राज्यों की पुलिस अपने यहां किठौर क्षेत्र के सप्लायर पकड़ चुकी है। इसके बाद भी स्थानीय पुलिस नेटवर्क को नहीं तलाशती। सूत्रों के अनुसार हथियार सप्लायर सत्ता बदलते ही उसी पक्ष की तरफ हो जाते हैं, जिस कारण पुलिस दबाव में कार्रवाई नहीं कर पाती।
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किठौर क्षेत्र के राधना, नंगली अब्दुल्ला और मुंडाली के जिसौरा, जिसौरी, शफियाबाद लौटी, कैथवाडा बढ़ला, परीक्षितगढ़ के अहमदनगर बढ़ला, सौंदत और खादर क्षेत्र के कई गांवों में अवैध हथियारों का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है।
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2000 में तमंचा और 30 हजार रुपये तक में बिकती है पिस्टल
यहां तमंचा 2000 से लेकर 7000 रुपये तक और पिस्टल 25 हजार से 30 हजार रुपये तक में बेची जाती है। सूत्रों के अनुसार हथियार सप्लाई करने वाले सत्ता बदलते ही सत्ता दल के करीबियों से सांठगांठ कर उस पक्ष के साथ हो जाते हैं। पुलिस भी इन पर कार्रवाई से बचती है।

एजेंसियों की कार्रवाई से अनजान रहती है पुलिस
अमरोहा में एनआईए की कार्रवाई के बाद किठौर के राधना के एक व्यक्ति का नाम भी आया था। करीब एक साल पहले यहां एनआईए ने छापा मारा था। इसके बाद से राधना चर्चा में ही रहता है। एनआईए की कार्रवाई के बाद राधना में सन्नाटा फैल गया और यहां से अधिकतर युवक रिश्तेदारियों में चले गए।

यही नहीं, गांव में महापंचायत भी हुई जिसमें कुछ चंद लोगों के चलते गांव बदनाम होने पर चर्चा चली और आरोपी लोगों का बहिष्कार करने की घोषण की, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर से वैसे ही हालात हो गए। इतना होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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