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अध्यादेश बर्दाश्त नहीं, 25 सितंबर को भाकियू का किसान कर्फ्यू

Mon, 21 Sep 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2020 11:21 PM IST
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kisan curfew
अध्यादेश बर्दाश्त नहीं, 25 सितंबर को भाकियू का किसान कर्फ्यू
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बागपत। कृषि अध्यादेश के विरोध में भाकियू कार्यकर्ताओं ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह गुर्जर ने कहा कि किसान विरोधी अध्यादेश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने किसान की आय दोगुनी करने की बात कही थी, लेकिन बकाया भुगतान तक नहीं मिला है। संगठन की ओर से 25 सितंबर को किसान कर्फ्यू का आयोजन किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर के नेतृत्व में कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पहुंचे। मुख्य गेट पर भाकियू कार्यकर्ताओं पर पुलिस की नोकझोंक हो गई। यहां भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। जिलाध्यक्ष ने कहा कि कृषि अध्यादेश से किसान का उत्पीड़न बढ़ेगा। कंपनियां खेतों में मनमर्जी करेंगी और किसान सिर्फ मजदूर बनकर रह जाएगा। सरकार अगर किसान हितैषी है तो चीनी मिलों पर बकाया करोड़ों रुपये अब तक क्यों नहीं दिलाए गए। निजी कंपनियों का दखल किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे। खेती में खर्च बढ़ गया है, लेकिन किसान की आय नहीं बढ़ी है। सरकार को अध्यादेश वापस लेने होंगे। इसके बाद डीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा गया। इस दौरान युवा जिलाध्यक्ष हिम्मत सिंह, देशपाल सिंह, धर्मेंद्र कुमार, उपेंद्र तोमर, कर्मपाल सिंह, कालू राम, शिवदत्त शर्मा, हरेंद्र दांगी, प्रताप पहलवान आदि मौजूद रहे।
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पीड़ित परिवारों को मिले पांच लाख मुआवजा
भाकियू की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष हिम्मत सिंह ने कहा कि किशनपुर बिराल बस स्टैंड पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत हुई है। पीड़ित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। प्रशासन या सरकार ने अभी तक मुआवजे की घोषणा नहीं की है।
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किसानों की बदहाली को बढ़ा रही सरकार : आप
फोटो - 17
बागपत। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कृषि अध्यादेश के विरोध में कलक्ट्रेट पर हंगामा प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट प्रभारी एसडीएम रामनयन सिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने कृषि अध्यादेश पारित कर देश में किसानों की बदहाली में एक और काला अध्याय जोड़ने का काम किया है। कृषि सेक्टर को प्राइवेट हाथों में देने के लिए यह बिल लाया गया है, जिससे फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त हो जाएगा। देश के 80 फीसदी लोग कृषि पर निर्भर हैं। अब किसानों से उनकी खेती को भी छीना जा रहा है। बिल पास होने से बड़े-बड़े पूंजिपतियों को कृषि क्षेत्र में आने का मौका मिलेगा। 10 से 20 एकड़ जमीन के क्लस्टर बनेंगे और पूंजीपति कहीं से भी फसल खरीद कर, देश में कहीं भी उसका भंडार कर सकेंगे।

धरना देने वालों में जिलाध्यक्ष ओमबीर सिंह सैन, एडवोकेट सुधीर धामा, सुरजीत ढाका, मौहम्मद इरफान, शमशाद, फुरकान, मोहसिन, राकेश कुमार, बिजेंद्र कुमार, ललित, राजकुमार धामा, आसिफ, वीरेन्द्र आर्य, संजीव कुमार, राजू सैनी आदि मौजूद रहे।
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