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किडनी ट्रांसप्लांट को नहीं मिल रहा ब्लड ग्रुप तो भी स्वैप ट्रांसप्लांट से संभव : डाॅ. संदीप
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- आइएमए में विश्व गुर्दा दिवस पर किडनी देने-लेने वाले हुए सम्मानित
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। विश्व गुर्दा दिवस के अवसर पर न्यूटीमा अस्पताल की ओर से आइएमए बच्चा पार्क में समारोह हुआ। इसमें किडनी से जुड़े रोगों की जानकारी, आधुनिक उपचार पद्धतियों को बताया गया। वरिष्ठ गुर्दा रोग एवं प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा. संदीप कुमार गर्ग ने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए गुर्दा देने और लेने वालों का ब्लड ग्रुप एक होना आवश्यक होता है। यदि दोनों का ब्लड ग्रुप मेल नहीं खाता है तो आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की सहायता से स्वैप ट्रांसप्लांट या एबीओ-इनकंपीटेबल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि स्वैप ट्रांसप्लांट में दो अलग-अलग परिवारों के बीच अंगों का आदान-प्रदान किया जाता है। जब किसी परिवार के डोनर का ब्लड ग्रुप अपने ही मरीज से मेल नहीं खाता तो दूसरे परिवार के साथ आपसी सहमति एवं वैधानिक प्रक्रिया से यह संभव है। इसके अलावा एबीओ इनकंपीटेबल ट्रांसप्लांट के तहत डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है तब विशेष जांचों के जरिए शरीर में एंटीबॉडी स्तर का आकलन किया जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में अतिरिक्त प्रतिरक्षा दमनकारी दवाओं की सहायता से गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा सकता है। डा. संदीप गर्ग ने कहा कि गुर्दा प्रत्यापेराण के बाद जीवनभर दवाइयां लेनी होती हैं, जिसका मासिक खर्च पांच से साढ़े सात हजार रुपये तक हो सकता है। मुख्य अतिथि सीएमओ डा. अशोक कटारिया ने दीप प्रज्जवलन से शुभारंभ किया। किडनी देने व लेने वालों को सम्मानित किया गया। डा. शालीन शर्मा, डा. शरत चंद्र गर्ग, डा. अवनीत राणा, डा. अमित उपाध्याय, डा. श्वेता गर्ग, डा. मनीषा त्योगी, आरेके भटनागर, डा. धीरज बालियान आदि मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। विश्व गुर्दा दिवस के अवसर पर न्यूटीमा अस्पताल की ओर से आइएमए बच्चा पार्क में समारोह हुआ। इसमें किडनी से जुड़े रोगों की जानकारी, आधुनिक उपचार पद्धतियों को बताया गया। वरिष्ठ गुर्दा रोग एवं प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा. संदीप कुमार गर्ग ने बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए गुर्दा देने और लेने वालों का ब्लड ग्रुप एक होना आवश्यक होता है। यदि दोनों का ब्लड ग्रुप मेल नहीं खाता है तो आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की सहायता से स्वैप ट्रांसप्लांट या एबीओ-इनकंपीटेबल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि स्वैप ट्रांसप्लांट में दो अलग-अलग परिवारों के बीच अंगों का आदान-प्रदान किया जाता है। जब किसी परिवार के डोनर का ब्लड ग्रुप अपने ही मरीज से मेल नहीं खाता तो दूसरे परिवार के साथ आपसी सहमति एवं वैधानिक प्रक्रिया से यह संभव है। इसके अलावा एबीओ इनकंपीटेबल ट्रांसप्लांट के तहत डोनर और रिसीवर का ब्लड ग्रुप अलग-अलग होता है तब विशेष जांचों के जरिए शरीर में एंटीबॉडी स्तर का आकलन किया जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में अतिरिक्त प्रतिरक्षा दमनकारी दवाओं की सहायता से गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा सकता है। डा. संदीप गर्ग ने कहा कि गुर्दा प्रत्यापेराण के बाद जीवनभर दवाइयां लेनी होती हैं, जिसका मासिक खर्च पांच से साढ़े सात हजार रुपये तक हो सकता है। मुख्य अतिथि सीएमओ डा. अशोक कटारिया ने दीप प्रज्जवलन से शुभारंभ किया। किडनी देने व लेने वालों को सम्मानित किया गया। डा. शालीन शर्मा, डा. शरत चंद्र गर्ग, डा. अवनीत राणा, डा. अमित उपाध्याय, डा. श्वेता गर्ग, डा. मनीषा त्योगी, आरेके भटनागर, डा. धीरज बालियान आदि मौजूद रहे।
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