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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Kapsad incident: Medical report shows accused's age as 19 years, adult or minor decision on 27th

कपसाड़ कांड : मेडिकल रिपोर्ट में आरोपी की आयु 19 साल, बालिग या नाबालिग फैसला 27 को

Thu, 21 May 2026 09:00 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2026 09:00 PM IST
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Kapsad incident: Medical report shows accused's age as 19 years, adult or minor decision on 27th
नोट: अन्य केंद्रों के लिए भी ध्यानार्थ
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- किशोर न्याय बोर्ड में अभियोजन और आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं में हुई जिरह
- मां सुनीता की हत्या कर उसकी बेटी रूबी का किया था अपहरण
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी की आयु मेडिकल रिपोर्ट में लगभग 19 वर्ष बताई गई है। चिकित्सकों के मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के बाद बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं में जिरह हुई। आरोपी नाबालिग है या फिर बालिग,किशोर न्याय बोर्ड में अभियोजन और आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं में हुई जिरह

- मां सुनीता की हत्या कर उसकी बेटी रूबी का किया था अपहरण

माई सिटी रिपोर्टर

मेरठ। सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में सुनीता हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी की आयु मेडिकल रिपोर्ट में लगभग 19 वर्ष बताई गई है। चिकित्सकों के मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के बाद बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं में जिरह हुई। आरोपी नाबालिग है या फिर बालिग, इस पर किशोर न्याय बोर्ड 27 मई को फैसला सुनाएगा।
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वारदात के बाद परिजनों ने आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया था। इसके समर्थन में उन्होंने न्यायालय में उसकी हाईस्कूल की अंकतालिका भी प्रस्तुत की थी। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी की आयु तय करने के लिए मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया था। किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई के दौरान आरोपी के विद्यालय के शिक्षक समेत अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। कक्षा एक से चार तक का आरोपी का शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए 11 मई को आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया था।
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इसके बाद आरोपी को बाल सुधार गृह से जिला अस्पताल लाकर उसका परीक्षण कराया गया।

डाॅक्टरों के पैनल ने उसका मेडिकल परीक्षण कर रिपोर्ट किशोर न्याय बोर्ड में पेश की थी। यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को किशोर न्याय बोर्ड में खोली गई। इसके मुताबिक आरोपी की आयु लगभग 19 वर्ष बताई गई है। अभियोजन पक्ष के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी ने संगीन अपराध किया है। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके बालिग होने की पुष्टि हुई है। उस पर बालिगों की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए। वहीं, आरोपी पक्ष के वकील ने कहा कि हाईस्कूल की मार्कशीट के आधार पर आरोपी नाबालिग है। वारदात भी आरोपी के मेडिकल परीक्षण कराने से चार महीने पहले हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में आयु का सटीक आकलन नहीं होता। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट मायने नहीं रखती। उन्होंने उसे नाबालिग मानकर मुकदमा चलाने के लिए कहा। किशोर न्याय बोर्ड ने जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। 27 मई को आरोपी की आयु पर फैसला सुनाया जाएगा।

आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर 29 मई को सुनवाई

आरोपी के वकील का कहना है कि उन्होंने जिला न्यायालय में अपील दायर कर किशोर न्याय बोर्ड के मेडिकल परीक्षण के आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत यदि विद्यालय से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता। इस अपील पर जिला न्यायालय में 29 मई को सुनवाई निर्धारित की गई है। का इस पर किशोर न्याय बोर्ड 27 मई को फैसला सुनाएगा।


वारदात के बाद परिजनों ने आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया था। इसके समर्थन में उन्होंने न्यायालय में उसकी हाईस्कूल की अंकतालिका भी प्रस्तुत की थी। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी की आयु तय करने के लिए मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया था। किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई के दौरान आरोपी के विद्यालय के शिक्षक समेत अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। कक्षा एक से चार तक का आरोपी का शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए 11 मई को आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया था। इसके बाद आरोपी को बाल सुधार गृह से जिला अस्पताल लाकर उसका परीक्षण कराया गया।
डाॅक्टरों के पैनल ने उसका मेडिकल परीक्षण कर रिपोर्ट किशोर न्याय बोर्ड में पेश की थी। यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को किशोर न्याय बोर्ड में खोली गई। इसके मुताबिक आरोपी की आयु लगभग 19 वर्ष बताई गई है। अभियोजन पक्ष के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी ने संगीन अपराध किया है। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके बालिग होने की पुष्टि हुई है। उस पर बालिगों की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए। वहीं, आरोपी पक्ष के वकील ने कहा कि हाईस्कूल की मार्कशीट के आधार पर आरोपी नाबालिग है। वारदात भी आरोपी के मेडिकल परीक्षण कराने से चार महीने पहले हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में आयु का सटीक आकलन नहीं होता। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट मायने नहीं रखती। उन्होंने उसे नाबालिग मानकर मुकदमा चलाने के लिए कहा। किशोर न्याय बोर्ड ने जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। 27 मई को आरोपी की आयु पर फैसला सुनाया जाएगा।

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आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर 29 मई को सुनवाई

आरोपी के वकील का कहना है कि उन्होंने जिला न्यायालय में अपील दायर कर किशोर न्याय बोर्ड के मेडिकल परीक्षण के आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत यदि विद्यालय से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता। इस अपील पर जिला न्यायालय में 29 मई को सुनवाई निर्धारित की गई है।
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