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जागरूकता के अभाव में ठप पड़ी कंगारू मदर केयर यूनिट

Wed, 12 Jun 2019 05:03 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Wed, 12 Jun 2019 05:03 AM IST
सार

महीने में एक-दो केस ही आ रहे, जिला अस्पताल में इसी साल जनवरी में खुली थी यूनिट
प्री मैच्योर बेबी के लिए बेहद जरूरी है कंगारू मदर केयर, महिलाओं में जागरूकता का अभाव

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Kangaroo Mother Care Unit stalled due to lack of awareness
डॉ, मनीषा, महिला जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिला जिला अस्पताल में इस साल जनवरी माह में शुरू की गई कंगारू मदर केयर यूनिट पूरी तरह से परवान नहीं चढ़ पा रही है। यहां महीने में इक्का-दुक्का केस ही आ रहे हैं। चिकित्सक-स्टाफ इस बाबत महिलाओं को जागरूक नहीं कर रहे हैं, इसी कारण वे इसका लाभ लेने से वंचित हो रही हैं।
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दरअसल, कमजोर नवजात तमाम कवायदों के बाद भी मौत के मुहाने तक पहुंच जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए यह पहल की गई थी। महिला जिला अस्पताल में हर साल दो हजार से ज्यादा बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से एक हजार से ज्यादा बच्चे ऐसे रहते हैं, जिन्हें कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। पिछले साल 961 बच्चों को महिला जिला अस्पताल की नर्सरी में रखना पड़ा था, जिनमें से अधिकांश को कंगारू केयर की जरूरत पेश आई थी, जिन्हें मेडिकल कालेज रेफर किया गया था। उसमें से अधिकांश मेडिकल कालेज न जाकर निजी अस्पतालों में चले गए थे।
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महिला जिला अस्पताल में बनी कंगारू मदर केयर यूनिट छह बेड का वार्ड है। साथ ही चार विशेष प्रकार की कुर्सियां लगाई गई हैं, जिन पर बैठकर मां नवजात को अपने दुलार की गर्माहट दे सकती हैं, जिससे वह स्वस्थ रहें। इससे पहले महिला जिला अस्पताल में कंगारू केयर यूनिट नहीं थी। इसके खोलने के लिए लंबे समय से कवायद चली थी।
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ऐसे बच्चों को होती है जरूरत
कई नवजात ऐसे होते हैं, जो समय से पहले जन्म लेते हैं। यह नवजात नौ माह के बजाय 7 या 8 माह में पैदा होते हैं। समय से पहले जन्म शिशु के शारीरिक विकास को कम कर देता है। इस कारण नवजात औसत ढाई किलो से कम वजन के जन्म लेते हैं। ऐसे बच्चों में 1.80 किलोग्राम, दो किलोग्राम तक वजन निकल रहा है। इन बच्चों को कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। एक बार में कम से कम एक घंटा और एक दिन में 6 से 8 घंटे माताएं अपने बच्चे को कंगारू थैरेपी दे सकती हैं। कंगारू मदर केयर से मां में दूध बढ़ता है और साथ ही बच्चे में भी सुरक्षात्मक गुणों का विकास होता है।

स्टाफ-चिकित्सकों को दी जाएगी ट्रेनिंग
इस योजना को परवान चढ़ाने के लिए अब चिकित्सकों और स्टाफ को और ट्रेनिंग दी जाएगी। महिलाओं को जागरूक किया जाएगा। बताया जाएगा कि मां और शिशु को इस थैरेपी के समय किस तरह से काम करना है और इसका कितना फायदा मिलता है।


- डॉ. मनीषा, प्रमुख अधीक्षक, महिला जिला अस्पताल


यह है कंगारू मदर केयर
आस्ट्रेलियन जीव कंगारू समय से पहले बच्चे को जन्म देता है। इसके बाद मादा कंगारू प्रीमैच्योर बच्चों को अपनी थैली में साथ रखती है। बच्चों के पूर्ण विकसित होने के बाद ही उन्हें थैली से बाहर निकालती है। कंगारू मदर केयर यूनिट भी इसी थीम पर काम करती है।
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