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निशांत के बाद कंचन सिंह..., आईएसआई के टारगेट पर अब सेना के अफसर और जवान, जानें क्या है पीआईओ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 18 Oct 2018 01:13 PM IST
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मेरठ न्यूज
- फोटो : अमर उजाला
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पहले बीएसएफ का सिपाही अच्युतानंद मिश्रा फिर नागपुर के रक्षा अनुसंधान में इंजीनियर निशांत अग्रवाल और अब जवान कंचन सिंह। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी लगातार सेना के अफसरों और जवानों को अपना निशाना बना रही है।
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निशांत पर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रम्होस की खुफिया जानकारी पाकिस्तान को देने का आरोप है। उसने मिसाइल की डिजाइन, स्केच रिपोर्ट और तकनीकी जानकारी को पाकिस्तान के साथ साझा किया है।
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अंदेशा तो यह भी जताया जा रहा है कि मेरठ से गिरफ्तार जवान भी इसी मिसाइल से जुड़ी जानकारी दुश्मन तक पहुंचा रहा था। हालांकि इस बात की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन कंचन सिंह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के जाल में आखिर कैसे फंसा? इसकी जांच की जा रही है।
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जवान कंचन सिंह हनी ट्रैप का शिकार हुआ या फिर उसे सेना के किसी दूसरे जवान ने इस दलदल में धकेला। इन सब बातों को अभी सेना उजागर नहीं कर रही है। सैन्य गतिविधियों के हिसाब से मेरठ कैंट को बेहद संवेदनशील माना जाता है। पहले जितने भी यहां एजेंट पकड़े गए वे सब आम आदमी थे या फिर पाकिस्तानी जासूस।
इन सभी को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने पैसे का लालच देकर अपने जाल में फंसाया था। लेकिन अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी सेना के अफसरों और जवानों को अपने जाल में फंसा रही है। इसके लिए पैसों के साथ ही खूबसूरत लड़कियों का सहारा लिया जा रहा है। हनी ट्रैप में जवानों को फंसाकर फिर उनसे भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी मांगी जाती हैं।
उत्तर प्रदेश एटीएस ने बीएसएफ के एक सिपाही अच्युतानंद मिश्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के इल्जाम में पकड़ा था। अच्युतानंद ने कुबूल किया था कि वह लड़की से दोस्ती के बाद उसको फेसबुक के जरिए यहां से गोपनीय सूचनाएं मुहैया कराता था। इसके बाद हाल ही में नागपुर में सेना के इंजीनियर निशांत अग्रवाल को पकड़ा गया। निशांत पर आरोप था कि वो ब्रह्मोस मिसाइल से संबंधित तकनीकी जानकारियां चोरी कर दूसरे देशों को बेच रहा था।
इस कार्रवाई के तुरंत बाद सेना की वेस्टर्न कमान चंडीगढ़ यूनिट ने मेरठ से सिग्नल रेजीमेंट के जवान कंचन सिंह को पकड़ा। कंचन सिंह खास इनपुट मिलने के बाद से मिलिट्री इंटेलीजेंस के निशाने पर था।
क्या है पीआईओ?
पीआईओ (पाकिस्तान इन्टेलिजेंस ऑपरेटिव) पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के समूह का विशेषण है। किसी मामले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का नाम पुष्ट या सुनिश्चित होने तक उसे पीआईओ कहा जाता है। आम तौर पर भारत से सूचनाएं एकत्र कराने और आतंकी गतिविधियों में आईएसआई (इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस) का ही नाम उभरता है। मगर विश्वस्तर पर बदनाम होने के कारण अब आईएसआई के लिए दूसरे विंग भी काम करते हैं। पीएमआई (पाकिस्तान मिलिट्री इंटेलिजेंस), पीआईसी (पाकिस्तान इंटेलिजेंस कम्यूनिटी), एफआईए (फैडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) आदि इनमें प्रमुख हैं।
उधर जासूसी के आरोप में पकड़े गए सेना के जवान कंचन सिंह के बारे में जानकारी जुटाने के लिए खुफिया एजेंसियों ने सैन्य क्षेत्र में डेरा डाला हुआ है। खुफिया एजेंसियों ने सेना के अफसरों से भी बात की लेकिन मेरठ सैन्य अफसरों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। खुफिया एजेंसियां जवान के बारे में ये जानकारी भी जुटा रही हैं कि कहीं उसका मेरठ में किसी सिविलयन से तो संपर्क नहीं था। जवान की एक्टिविटी कहां-कहां पर थी। उसका रूटीन शिड्यूल क्या रहता था। इन सबके बारे में मिलिट्री इंटेलिजेंस काम कर रही है।
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इस कार्रवाई के तुरंत बाद सेना की वेस्टर्न कमान चंडीगढ़ यूनिट ने मेरठ से सिग्नल रेजीमेंट के जवान कंचन सिंह को पकड़ा। कंचन सिंह खास इनपुट मिलने के बाद से मिलिट्री इंटेलीजेंस के निशाने पर था।
क्या है पीआईओ?
पीआईओ (पाकिस्तान इन्टेलिजेंस ऑपरेटिव) पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के समूह का विशेषण है। किसी मामले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का नाम पुष्ट या सुनिश्चित होने तक उसे पीआईओ कहा जाता है। आम तौर पर भारत से सूचनाएं एकत्र कराने और आतंकी गतिविधियों में आईएसआई (इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस) का ही नाम उभरता है। मगर विश्वस्तर पर बदनाम होने के कारण अब आईएसआई के लिए दूसरे विंग भी काम करते हैं। पीएमआई (पाकिस्तान मिलिट्री इंटेलिजेंस), पीआईसी (पाकिस्तान इंटेलिजेंस कम्यूनिटी), एफआईए (फैडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) आदि इनमें प्रमुख हैं।
उधर जासूसी के आरोप में पकड़े गए सेना के जवान कंचन सिंह के बारे में जानकारी जुटाने के लिए खुफिया एजेंसियों ने सैन्य क्षेत्र में डेरा डाला हुआ है। खुफिया एजेंसियों ने सेना के अफसरों से भी बात की लेकिन मेरठ सैन्य अफसरों ने इस बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। खुफिया एजेंसियां जवान के बारे में ये जानकारी भी जुटा रही हैं कि कहीं उसका मेरठ में किसी सिविलयन से तो संपर्क नहीं था। जवान की एक्टिविटी कहां-कहां पर थी। उसका रूटीन शिड्यूल क्या रहता था। इन सबके बारे में मिलिट्री इंटेलिजेंस काम कर रही है।
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