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उपचुनाव 2018: मुजफ्फरनगर दंगा और कैराना पलायन प्रकरण बनेगा मुद्दा

Thu, 10 May 2018 06:26 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, शामली
यूपी डेस्क, अमर उजाला, शामली Updated Thu, 10 May 2018 06:26 PM IST
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kairana byelection 2018: Muzaffarnagar riots and Kairana migration case issue
फाइल फोटो

मुजफ्फरनगर में वर्ष 2013 में दंगा हुआ था और 2016 में उठा था कैराना पलायन प्रकरण। दोनों ही मामलों को हुए कई साल बीत गए, लेकिन कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में दोनों मुद्दे उभरकर आ रहे हैं। राजनीतिक दलों की जुबां पर यह मुद्दे हावी हो रहे हैं। एक तरफ भाजपा की तरफ से सपा-रालोद पर दंगे और पलायन को लेकर प्रहार किए जा रहे हैं, तो सपा-रालोद भी भाजपा को जिम्मेदार ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।  

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आलम यह है कि दो दिन पूर्व ही शामली में जब भाजपा के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन हुआ, तो मुजफ्फरनगर से भाजपा सांसद संजीव बालियान ने मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगे और कैराना पलायन के लिए सपा पर हमला किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि दंगे के दौरान दर्ज हुए फर्जी मुकदमों को भाजपा खत्म कराना चाहती है, लेकिन कैराना का परिवार उसके विरोध में उतर गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि कैराना पलायन के जिम्मेदार परिवार को ही गठबंधन ने प्रत्याशी बना दिया है। 
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वहीं, बुधवार को सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी के नामांकन के पूर्व कैराना रोड स्थित बैंक्वेट हाल में सभा हुई, तो उसमें भी रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, सपा विधायक नाहिद हसन, पूर्व सांसद अमीर आलम, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह सहित तमाम नेताओं की जुबां पर 2013 का सांप्रदायिक दंगा और कैराना पलायन प्रकरण रहा। सपा और रालोद नेताओं ने खुले मंच से कहा कि मुजफ्फरनगर दंगा भाजपा की देन थी और अब फिर से चुनावी माहौल गरमाने के लिए भाजपा उसकी याद दिला रही है। कैराना पलायन पर भी सपा-रालोद नेताओं ने कहा कि भाजपा ने कैराना को देश और दुनिया में बदनाम किया। विपक्षी दलों का प्रयास है कि दंगा और पलायन प्रकरण के नाम पर ध्रुवीकरण होने से रोका जाए, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में ध्रुवीकरण की वजह से ही भाजपा को फायदा हुआ था और मुजफ्फरनगर तथा कैराना दोनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। देश में आम चुनाव 2019 में होना है, लेकिन कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को उसका सेमीफाइनल माना जा रहा है। इसी के चलते राजनीतिक दलों ने कैराना सीट पर जीत दर्ज कराने के लिए अपनी ताकत झोंक रखी है। अब देखना यह है कि चुनावी माहौल में चल रहे बयानों के तीरों से किसे नुकसान होता है और किसे फायदा मिलता है।
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पढ़ें : जयंत चौधरी बोले- देश में हालात ठीक नहीं, दंगे के दर्द को कुरेदती है भाजपा

जिले के गांव भी हुए थे दंगे में प्रभावित  

वर्ष 2013 में हुए मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगे के दौरान शामली जनपद के कई गांव भी प्रभावित हुए थे। गांव लांक, बहावड़ी, लिसाढ़, हसनपुर आदि में घटनाएं हुई थीं। इन गांवों से पलायन करने वाले लोग कांधला और कैराना क्षेत्र में जाकर बस गए थे। पूर्व में इन गांवों में जाट और मुसलिम मिल जुलकर रहते थे, लेकिन दंगे के कारण दोनों समुदाय के लोगों में खाई पैदा हो गई थी।

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