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13 साल बाद मिला इंसाफ : अपहरण के बाद हत्या के दो दोषियों को उम्रकैद

Wed, 01 Apr 2026 02:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2026 02:31 AM IST
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Justice delivered after 13 years: Two convicted of kidnapping and murder sentenced to life imprisonment
मेरठ। जनपद के सरूरपुर थाना क्षेत्र के कस्बा करनावल में 13 साल पहले हुए पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू अपहरण और हत्याकांड में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। मंगलवार को एडीजे-20 न्यायालय ने दो दोषियों अमरपाल और सोहनवीर को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अमरपाल पर 16 हजार रुपये और सोहनवीर पर 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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करनावल निवासी राजेंद्र ने 11 फरवरी 2013 को सरूरपुर थाने में अपने बेटे पुष्पेंद्र उर्फ पप्पू के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों का आरोप था कि अमरपाल और सोहनवीर ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुष्पेंद्र का अपहरण किया और फिर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और आरोपियों की निशानदेही पर श्मशान घाट में दबाया गया पुष्पेंद्र का शव बरामद किया था। इसके बाद आरोपियों को जेल भेजकर उनके खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल की गई। न्यायालय ने गवाहों के बयान और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की जिरह सुनने के बाद मंगलवार को करनावल के ही निवासी अमरपाल और सोहनवीर को दोषी करार दिया। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।
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मासूम से यौन हिंसा के दोषी लोकेंद्र को 10 साल की सजा

टॉफी का लालच देकर किया था कुकर्म

मेरठ। आठ साल के मासूम बच्चे के साथ यौन हिंसा करने के करीब नौ साल पुराने मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। मवाना निवासी दोषी लोकेंद्र को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट न्यायालय ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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मामला मवाना थाना क्षेत्र का है जहां 1 जुलाई 2017 को एक पीड़ित पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर के अनुसार उनका आठ साल का बेटा घर के पास ही दुकान से सामान लेने गया था। इसी दौरान रास्ते में आरोपी लोकेंद्र ने मासूम को टॉफी देने के बहाने फुसलाकर अपने घर बुला लिया। वहां आरोपी ने बच्चे को जान से मारने की धमकी दी और उसके साथ कुकर्म (यौन हिंसा) किया।


डरा-सहमा बच्चा जब अपने घर पहुंचा तो उसने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस में शिकायत की। मवाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी लोकेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और वर्ष 2017 में ही उसके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने लोकेंद्र को दोषी पाया। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर दोषी को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
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