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पांच दिन में कैसे होगी डोर टू डोर ओबीसी जनगणना
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sun, 23 Apr 2017 09:55 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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महानगर के परिसीमन में एससी की जनसंख्या को लेकर नगर निगम प्रशासन पहले ही आरोपों में घिरा है। ऐसे में ओबीसी की जनगणना में निगम प्रशासन की जल्दबाजी पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। क्योंकि अभी तक पूरी तरह से ओबीसी जनगणना शुरू ही नहीं हो पाई है। जबकि जनगणना पूरी करने के लिए 27 अप्रैल अंतिम तिथि है। बड़ा सवाल यह है कि पांच दिन में डोर टू डोर जनगणना कैसे पूरी हो जाएगी।
जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर निगम प्रशासन ने चार दिन पहले टाउन हॉल में कई विभागों के कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की बैठक लेकर ओबीसी जनगणना की जिम्मेदारी सौंपी थी। सभी को अंतिम तिथि से भी अवगत कराया गया था। लेकिन इसका असर शनिवार तक देखने को नहीं मिला। अभी तक भी शहर में कई जगह सुपरवाइजर और प्रगणक जनता के बीच नहीं पहुंचे हैं। जिससे माना जा रहा है कि जिस प्रकार एससी की जनसंख्या के आंकड़े परिसीमन रिपोर्ट में रखे गए, उसी तरह ओबीसी की जनगणना भी कर दी जाएगी। सवाल उठ रहे हैं कि ओबीसी की जनगणना के आंकड़े डोर टू डोर इकट्ठा किए जाएंगे या फिर अनुमानित गणित लगाकर आंकड़े तैयार किए जाएंगे। जनगणना को लेकर महानगर के ओबीसी नेता भी नजरें गड़ाए बैठे हैं।
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जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर निगम प्रशासन ने चार दिन पहले टाउन हॉल में कई विभागों के कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की बैठक लेकर ओबीसी जनगणना की जिम्मेदारी सौंपी थी। सभी को अंतिम तिथि से भी अवगत कराया गया था। लेकिन इसका असर शनिवार तक देखने को नहीं मिला। अभी तक भी शहर में कई जगह सुपरवाइजर और प्रगणक जनता के बीच नहीं पहुंचे हैं। जिससे माना जा रहा है कि जिस प्रकार एससी की जनसंख्या के आंकड़े परिसीमन रिपोर्ट में रखे गए, उसी तरह ओबीसी की जनगणना भी कर दी जाएगी। सवाल उठ रहे हैं कि ओबीसी की जनगणना के आंकड़े डोर टू डोर इकट्ठा किए जाएंगे या फिर अनुमानित गणित लगाकर आंकड़े तैयार किए जाएंगे। जनगणना को लेकर महानगर के ओबीसी नेता भी नजरें गड़ाए बैठे हैं।
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