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करोड़ों की विवादित जमीन में फंसा जुबैर हत्याकांड
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जुबेर को मारकर करोड़ों की जमीन पर करना था कब्जा
मेरठ। पार्षद जुबैर अंसारी की हत्या का खुलासा बड़ा चौंकाने वाला होगा। हत्या से तीन दिन पहले अब्दुल्लापुर की जमीन को लेकर झगड़ा, भावनपुर थाने में तहरीर देना और दो दिन पहले ही एसएसपी ऑफिस में शिकायती पत्र देना, यह सब जुबेर हत्याकांड की साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 1.67 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को कब्जाने के लिए जुबेर को मारा गया है। पुलिस का हाजी फतेहयाब और जब्बार पर शक और गहरा गया है।
28 अगस्त को शास्त्रीनगर स्थित संतोष हॉस्पिटल के पास जुबेर की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या की थी। 21 दिन बाद पुलिस हत्या का खुलासा करने जा रही थी कि हाजी फतेहयाब के बेटे सालिम ने शनिवार खुद को गोली मारकर जान दे दी। फतेहयाब हत्या के मामले में शक के दायरे में है। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही थी। इसी से क्षुब्ध होकर सालिम ने खुदकुशी करने की बात सुसाइड नोट में लिखी है। पुलिस की गर्दन फंसी तो खुलासा करने से थोड़ा पीछे हट गई। सोमवार को सालिम के शव का सुपुर्द-ए-खाक होने के बाद पुलिस ने फिर से हत्यकांड की जांच आगे बढ़ा दी।
पड़ताल में सामने आया कि इस हत्या के पीछे गहरी साजिश है। जुबेर का अलग-अलग तीन जगह जमीन को लेकर विवाद था। अब्दुल्लापुर, बजोट और देहरादून में जमीन से जुड़े विवाद अहम हैं। पुलिस ने तीनों जगह जांच की। इसमें देहरादून की जमीन पर हत्या होने का शक गहराया। इसका ताल्लुक हाजी फतेहयाब और जब्बार से जुड़ा होना बताया गया। अब्दुल्लापुर की जमीन पर पार्षद हाजी दिलशाद से विवाद है। इसमें समझौते की गुंजाइश थी।
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हत्या का शक दूसरे लोगों पर जाए, इस मंशा से अब्दुल्लापुर की जमीन पर झगड़ा कराकर मामला भावनपुर के थाने तक पहुंचा दिया। इसके बाद 26 अगस्त को जुबैर अंसारी और उसके पार्टनर जिया ने एसएसपी ऑफिस पर जाकर शिकायती पत्र दिया। इसमें जुबेर ने खुद की जान को खतरा बताया। यह घटनाक्रम साजिश का हिस्सा था। एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि हत्या में महत्वपूर्ण बिंदू मिले हैं।
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हत्या के बाद शूटर शुएब ने किया था आत्मसमर्पण
जुबेर की हत्या के दो दिन बाद लिसाड़ीगेट का शुऐब भावनपुर थाने के एक मुकदमे में जमानत तुड़वाकर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर जेल चला गया। जांच में शुऐब का नाम सामने आया तो पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की। बताया गया कि शुऐब शातिर अपराधी है। अभी उससे जानकारी ली जा रही है।
अब जल्द हो जाएगा खुलासा
सालिम की खुदकुशी के बाद जुबेर हत्याकांड में नया मोड़ आ सकता है। जुबेर को .32 बोर की पिस्टल से मारा गया। सालिम की मौत में .32 बोर की पिस्टल बरामद हुई है। वहीं, जावेद पहलवान व पार्षद आरिफ की हत्या में भी .32 पिस्टल इस्तेमाल हुई है। अंदेशा है कि इस पिस्टल से हत्या करने वाले शूटर हैं। सुपारी लेकर जुबैर, जावेद और आरिफ समेत कई लोगों की हत्या की गई है। सालिम के पोस्टमार्टम रिर्पार्ट का पुलिस को इंतजार है। पुलिस जल्द खुलासा करेगी।
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राधना में पुलिस फोर्स की मौजूदगी में सालिम का शव सुपुर्द-ए-खाक
किठौर। दिल्ली में पोस्टमार्टम के बाद सालिम का शव सोमवार शाम पांच बजे किठौर के पैतृक गांव राधना गांव में पहुंचा। कानून व्यवस्था के चलते दो सीओ और तीन थाने की पुलिस के अलावा महिला पुलिस गांव में तैनात किया गया। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में सालिम का शव सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान सपा पूर्व केबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश व बसपा नेता जब्बार अली मौजूद रहे। बताया जाता है कि 20 साल पहले फतेहयाब परिवार के साथ गांव छोड़कर शास्त्रीनगर सेक्टर-13 में रहने लगे थे। फतेहयाब शाहिद मंजूर का करीबी रहा है।
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मेरठ। पार्षद जुबैर अंसारी की हत्या का खुलासा बड़ा चौंकाने वाला होगा। हत्या से तीन दिन पहले अब्दुल्लापुर की जमीन को लेकर झगड़ा, भावनपुर थाने में तहरीर देना और दो दिन पहले ही एसएसपी ऑफिस में शिकायती पत्र देना, यह सब जुबेर हत्याकांड की साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। 1.67 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को कब्जाने के लिए जुबेर को मारा गया है। पुलिस का हाजी फतेहयाब और जब्बार पर शक और गहरा गया है।
28 अगस्त को शास्त्रीनगर स्थित संतोष हॉस्पिटल के पास जुबेर की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या की थी। 21 दिन बाद पुलिस हत्या का खुलासा करने जा रही थी कि हाजी फतेहयाब के बेटे सालिम ने शनिवार खुद को गोली मारकर जान दे दी। फतेहयाब हत्या के मामले में शक के दायरे में है। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही थी। इसी से क्षुब्ध होकर सालिम ने खुदकुशी करने की बात सुसाइड नोट में लिखी है। पुलिस की गर्दन फंसी तो खुलासा करने से थोड़ा पीछे हट गई। सोमवार को सालिम के शव का सुपुर्द-ए-खाक होने के बाद पुलिस ने फिर से हत्यकांड की जांच आगे बढ़ा दी।
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पड़ताल में सामने आया कि इस हत्या के पीछे गहरी साजिश है। जुबेर का अलग-अलग तीन जगह जमीन को लेकर विवाद था। अब्दुल्लापुर, बजोट और देहरादून में जमीन से जुड़े विवाद अहम हैं। पुलिस ने तीनों जगह जांच की। इसमें देहरादून की जमीन पर हत्या होने का शक गहराया। इसका ताल्लुक हाजी फतेहयाब और जब्बार से जुड़ा होना बताया गया। अब्दुल्लापुर की जमीन पर पार्षद हाजी दिलशाद से विवाद है। इसमें समझौते की गुंजाइश थी।
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हत्या का शक दूसरे लोगों पर जाए, इस मंशा से अब्दुल्लापुर की जमीन पर झगड़ा कराकर मामला भावनपुर के थाने तक पहुंचा दिया। इसके बाद 26 अगस्त को जुबैर अंसारी और उसके पार्टनर जिया ने एसएसपी ऑफिस पर जाकर शिकायती पत्र दिया। इसमें जुबेर ने खुद की जान को खतरा बताया। यह घटनाक्रम साजिश का हिस्सा था। एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि हत्या में महत्वपूर्ण बिंदू मिले हैं।
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हत्या के बाद शूटर शुएब ने किया था आत्मसमर्पण
जुबेर की हत्या के दो दिन बाद लिसाड़ीगेट का शुऐब भावनपुर थाने के एक मुकदमे में जमानत तुड़वाकर कोर्ट में आत्मसमर्पण कर जेल चला गया। जांच में शुऐब का नाम सामने आया तो पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की। बताया गया कि शुऐब शातिर अपराधी है। अभी उससे जानकारी ली जा रही है।
अब जल्द हो जाएगा खुलासा
सालिम की खुदकुशी के बाद जुबेर हत्याकांड में नया मोड़ आ सकता है। जुबेर को .32 बोर की पिस्टल से मारा गया। सालिम की मौत में .32 बोर की पिस्टल बरामद हुई है। वहीं, जावेद पहलवान व पार्षद आरिफ की हत्या में भी .32 पिस्टल इस्तेमाल हुई है। अंदेशा है कि इस पिस्टल से हत्या करने वाले शूटर हैं। सुपारी लेकर जुबैर, जावेद और आरिफ समेत कई लोगों की हत्या की गई है। सालिम के पोस्टमार्टम रिर्पार्ट का पुलिस को इंतजार है। पुलिस जल्द खुलासा करेगी।
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राधना में पुलिस फोर्स की मौजूदगी में सालिम का शव सुपुर्द-ए-खाक
किठौर। दिल्ली में पोस्टमार्टम के बाद सालिम का शव सोमवार शाम पांच बजे किठौर के पैतृक गांव राधना गांव में पहुंचा। कानून व्यवस्था के चलते दो सीओ और तीन थाने की पुलिस के अलावा महिला पुलिस गांव में तैनात किया गया। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में सालिम का शव सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान सपा पूर्व केबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश व बसपा नेता जब्बार अली मौजूद रहे। बताया जाता है कि 20 साल पहले फतेहयाब परिवार के साथ गांव छोड़कर शास्त्रीनगर सेक्टर-13 में रहने लगे थे। फतेहयाब शाहिद मंजूर का करीबी रहा है।