जन्माष्टमी 2019: लोगों की सेहत से खिलवाड़, मावा बनाने में धड़ल्ले से कर रहे केमिकल का प्रयोग
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दूध और मावे की डिमांड बढ़ गई है। ऐसे में मिलावटखोर बाजार में मिलावटी मावा भी सप्लाई कर रहे हैं। मांग अधिक होने के चलते कई जगह भट्टियों पर मिलावटी मावा तैयार किया जा रहा है। मावा तैयार करने में वाशिंग पाउडर, रिफाइंड, पाउडर और ऑयल समेत अन्य केमिकल मिलाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पिछले 20 दिन में लिए गए 20 नमूनों में दो फेल पाए गए हैं।
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त्योहारों पर मिठाई, रसगुल्लों और मावे से बने अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार पर भी दूध और मावे की डिमांड बढ़ गई है। डिमांड अधिक है, लेकिन मांग के हिसाब से मावे की आपूर्ति नहीं हो पाती। मिलावटखोरों का खेल इसके बाद शुरू होता है। जिले में 15 से अधिक जगह ऐसी हैं, जहां मावे की ऐसी भट्टियां चल रही हैं, जहां मिलावट का यह खेल होता है। नकली मावा बनाने के लिए पहले शुद्ध दूध से क्रीम निकाल ली जाती है। जिसके बाद सिंथेटिक दूध में यूरिया, डिटरजेंट, रिफाइंड और वनस्पति घी मिलाया जाता है। यही नहीं, मावे को ज्यादा दिन तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें शक्कर मिला दी जाती है। खाद्य विभाग भी यह स्वीकार करता है कि कुल नमूनों में करीब 60 फीसदी फेल हो जाते हैं। जाहिर है कि मिलावट का खेल खूब चल रहा है।
यहां किया जाता है सप्लाई
बागपत से रोजाना मावा दिल्ली के अलावा सोनीपत और मेरठ, गाजियाबाद में भी बड़ी मात्रा में सप्लाई किया जाता है। मिठाई तैयार करने के लिए स्थानीय दुकानदार भी इस मावे को खरीद रहे हैं। जो स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदेह है।
इन गांवों में बनता है मावा
जनपद के मिलाना, फौलादनगर, झुंडपुर, गढ़ी कांगरान, दाहा, निरपुड़ा, भड़ल, दोघट, टीकरी, पुसार, बरनावा, बिनौली, रमाला, वाजिदपुर, गुराना, बड़ौली, सरूरपुर में मावे की भट्टियां संचालित की जाती हैं। इन गांवों में कुछ भट्टियां ऐसी हैं, जहां मिलावटी मावा तैयार किया जाता है।
बीस नमूने लिए, अब तक दो फेल
खाद्य विभाग के अभिहित अधिकारी चितरंजन का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को देखते हुए अब तक 20 नमूने लिए गए हैं। इनमें दो की रिपोर्ट आई है। बागपत और बड़ौत से लिए गए दोनों नमूने फेल पाए गए हैं।
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