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रक्षा बंधन: रहें सावधान, इन्हें नहीं गंदगी का ख्याल और धड़ल्ले से कर रहे मिठाई में केमिकल का प्रयोग

Fri, 09 Aug 2019 05:14 PM IST
कपिल kapil आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
आशुतोष भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 09 Aug 2019 05:14 PM IST
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Raksha Bandhan 2019: Bad materials are being used to make sweets in Meerut city
खुले में गंदगी के बीच रक्षाबंधन के लिए बनाया जा रहा घेवर - फोटो : अमर उजाला

रक्षा बंधन का त्योहार करीब आते ही मेरठ शहर में मिठाई बनाने का काम तेज हो गया है। बढ़ती मांग के अनुसार, हलवाई दिन रात मिठाई बनाने में जुटे हैं। लेकिन इसमें सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कई जगह देखा गया कि खाद्य सामग्री मानक के अनुरूप नहीं है। यहां तक कि मिठाइयों को अधिक दिन तक सुरक्षित रखने के लिए केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग किया रहा है। 

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कंकरखेड़ा फ्लाईओवर के नीचे तीन प्रमुख मिठाई विक्रेताओं की दुकानें हैं। ये सभी मिठाई का निर्माण फ्लाईओवर के नीचे गंदगी के बीच कर रहे हैं। यहां एक तरफ कूड़े का ढेर लगा रहता है तो दूसरी तरफ उनके कारीगरों ने कड़ाही चढ़ा रखी हैं। कूड़े पर बैठ रहीं मक्खियां खाद्य सामग्री को दूषित कर रही हैं। गढ़ रोड नई सड़क और जेल चुंगी आदि स्थानों पर भी खुले में गंदगी के बीच मिठाई बनाई जा रही हैं। मिठाइयों को हफ्तों सुरक्षित रखने के लिए इसमें केमिकल का भी प्रयोग किया जा रहा है।
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निम्न स्तर की सामग्री
मोटा मुनाफा कमाने के प्रयास में कुछ मिठाई विक्रेता निम्न स्तर की सामग्री का प्रयोग करते हैं। इसमें मुख्य रूप से सस्ता मैदा लगाया जाता है। बार बार गरम कर एक ही चाशनी को हफ्तों प्रयोग किया जाता है। कम होने पर उसी चाशनी में चीनी और पानी डालकर उसे बढ़ा दिया जाता है।

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ये होती है मिलावट
- खोए में चावल के आटे का प्रयोग होता है। ऐसे में मिठाई में स्टार्च अधिक हो जाता है।
- मोतीचूर के लड्डू में आर्टिफिशियल रंगों का प्रयोग किया जाता है। ये रंग सेहत पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। 
- काजू कतली की सुंदरता बढ़ाने के लिए चांदी के वर्क के स्थान पर एल्युमिनियम का प्रयोग किया जाता है।   
- पनीर बर्फी बनाने में कॉर्न स्टार्च और यूरिया का प्रयोग किया जाता है। 

मिठाई में इन केमिकल का होता है प्रयोग
मिठाइयों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सोडियम बेनजोनेट, एसकोर्बिक एसिड, प्रोपियोनिक एसिड का प्रयोग किया जाता है। चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा के अनुसार इन एसिड युक्त मिठाइयों के सेवन से पेट और छाती में जलन, पेट में दर्द, सिर दर्द और बेहोशी जैसे लक्षण होते हैं। हालांकि अत्यधिक सेवन और लगातार सेवन सेहत पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 

मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने पर शुरुआत में पेट की समस्या होती है। इसके लगातार सेवन से किडनी व लिवर पर प्रभाव पड़ सकता है। कैंसर जैसी बीमारियों का भी खतरा है। - डॉ. तनुराज सिरोही, मेरठ

मिष्ठान विक्रेता फूड कलर के स्थान पर सिंथेटिक कलर का प्रयोग करते हैं। यह मिठाई एफएसडीए के मानक से बाहर हो जाती हैं। विभाग इस संबंध में कार्रवाई करेगा। - अनिल गंगवार, एफएसओे

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