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संविधान के बुनियादी सिद्धांतों की हिफाजत जरूरी : त्यागी
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- नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार में हुआ जनवादी लेखक संघ का कार्यक्रम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जनवादी लेखक संघ मेरठ इकाई ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार कचहरी प्रांगण में संविधान दिवस पर विचार गोष्ठी हुई। इसमें संगठन के जिला मंत्री एवं नेशनल काउंसिल सदस्य मुनेश त्यागी ने कहा कि संविधान के बुनियादी ढांचे और उसकी आत्मा पर खतरा मंडरा रहा है। संविधान को बदले बिना ही उसके मूल सिद्धांतों को खोखला कर दिया गया है। इन बुनियादी सिद्धांतों की हिफाजत जरूरी है।
त्यागी ने कहा कि संविधान में वर्णित संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र, सामाजिक न्याय और भाईचारा जैसे सिद्धांतों पर हमले हो रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी, सम्मानजनक जीवन, शिक्षा और रोजगार जैसे मौलिक अधिकारों पर प्रहार किए जा रहे हैं। जिला उपाध्यक्ष डॉ. जीआर मलिक ने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं कमजोर की जा रही हैं।
डॉ. किरण सिंह ने कहा कि संविधान सर्व कल्याण का दस्तावेज है। अध्यक्षता कर रहे रामगोपाल भारतीय ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें संविधान का खुलकर विरोध कर रही हैं। इस अवसर पर जितेंद्र पांचाल, डॉ. ताहिर हंसी, डॉ. सत्येंद्र त्यागी, मंगल सिंह मंगल, धर्मपाल मित्रा रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जनवादी लेखक संघ मेरठ इकाई ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार कचहरी प्रांगण में संविधान दिवस पर विचार गोष्ठी हुई। इसमें संगठन के जिला मंत्री एवं नेशनल काउंसिल सदस्य मुनेश त्यागी ने कहा कि संविधान के बुनियादी ढांचे और उसकी आत्मा पर खतरा मंडरा रहा है। संविधान को बदले बिना ही उसके मूल सिद्धांतों को खोखला कर दिया गया है। इन बुनियादी सिद्धांतों की हिफाजत जरूरी है।
त्यागी ने कहा कि संविधान में वर्णित संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र, सामाजिक न्याय और भाईचारा जैसे सिद्धांतों पर हमले हो रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी, सम्मानजनक जीवन, शिक्षा और रोजगार जैसे मौलिक अधिकारों पर प्रहार किए जा रहे हैं। जिला उपाध्यक्ष डॉ. जीआर मलिक ने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं कमजोर की जा रही हैं।
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डॉ. किरण सिंह ने कहा कि संविधान सर्व कल्याण का दस्तावेज है। अध्यक्षता कर रहे रामगोपाल भारतीय ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें संविधान का खुलकर विरोध कर रही हैं। इस अवसर पर जितेंद्र पांचाल, डॉ. ताहिर हंसी, डॉ. सत्येंद्र त्यागी, मंगल सिंह मंगल, धर्मपाल मित्रा रहे।
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