Meerut: मुख्यमंत्री के सामने उठेगा औद्योगिक गलियारे का मुद्दा, 2 अगस्त को किसान करेंगे शक्ति प्रदर्शन
खरखौदा में गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों ने अब अपनी लड़ाई सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने का फैसला किया है। किसानों ने दो अगस्त को नंगलामल में शक्ति प्रदर्शन का ऐलान किया है।
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शनिवार को धरना स्थल पर आयोजित किसान पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि मुख्यमंत्री का संभावित दौरा दो अगस्त को मुंडाली क्षेत्र के नंगलामल गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर में होता है तो किसान वहीं पहुंचकर उनसे मुलाकात करेंगे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासनों पर अब भरोसा नहीं रह गया है। इसलिए मुख्यमंत्री से ही हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
सीएम के नंगलामल शिव मंदिर पहुंचने की संभावना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दो अगस्त को नंगलामल स्थित प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने की संभावना है। संभावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। किसानों ने बताया कि वे पिछले करीब 20 माह से भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि 11 जून को अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे थे। उस दौरान किसानों की मांगों को उचित बताते हुए अधिकारियों की समिति बनाकर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया था। किसानों का आरोप है कि एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इन मांगों को लेकर है किसानों का धरना
बैठक में किसानों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांग है कि अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाए और बाजार मूल्य का चार गुना भुगतान किया जाए। साथ ही प्रत्येक प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को औद्योगिक क्षेत्र में स्थायी रोजगार की लिखित गारंटी दी जाए। धरनारत किसानों ने निर्णय लिया कि मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को देखते हुए सभी प्रभावित गांवों के किसान दो अगस्त को नंगलामल पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री से मुलाकात कर समस्याओं से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघर्ष समिति के अध्यक्ष सोपाल सिंह के नेतृत्व में निर्णय लिया गया कि यदि मुख्यमंत्री से मुलाकात का अवसर नहीं मिला अथवा मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।