वेस्ट यूपी में गहरी हैं स्लीपिंग मॉड्यूल की जड़ें, मेरठ समेत कई जिलों में ISI की अंदर तक घुसपैठ
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की घुसपैठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी अंदर तक हो चुकी है। करीब 17 साल में पश्चिम के अलग-अलग जिलों से आईएसआई/आईएस के एजेंट और आतंकियों के साथियों समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं।
कई एजेंटों से पूछताछ में साफ हो चुका है कि मेरठ समेत कई जिलों में आईएसआई के लिए काम करने वाले स्लीपिंग मॉड्यूल की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। बुधवार को एनआईए और एटीएस ने आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के लिए 16 जिलों में एक साथ ही छापेमारी सटीक इनपुट मिलने के बाद की। आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकामयाब करने में सुरक्षा एजेंसियों को सफलता भी हाथ लगी है।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार आईएसआई भारत में नए साल और 26 जनवरी के आसपास आतंकी वारदात को अंजाम दिलाने की फिराक में लगी है। इनपुट के अनुसार आईएसआई का निशाना दिल्ली, एनसीआर और वेस्ट यूपी का कोई जनपद हो सकता है। इसके अलावा इसकी भी चर्चा है कि देश को अस्थिर करने के लिए आईएसआई के निशाने पर प्रमुख नेता और संस्थान हैं। इस इनपुट पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के साथ ही देश की तमाम खुफिया और जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं।
कई संदिग्ध रडार पर
सूत्रों की मानें तो एनआईए और एटीएस के रडार पर मेरठ के कई संदिग्ध हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे स्लीपिंग मॉड्यूल की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है, जिनमें नाम पूर्व में एजेंटों से पूछताछ में सामने आ चुके हैं। उनकी गतिविधियों और संपर्कों को देखा जा रहा है।
एनआईए और एटीएस मेरठ आई थी। उनको एक संदिग्ध युवक की तलाश थी। छापेमारी में एनआईए टीम को पुलिस फोर्स उपलब्ध कराया गया था। उनका मिशन गोपनीय था। जिसकी कोई जानकारी मुझे नहीं है। मेरठ से कोई गिरफ्तार नहीं हुआ। -अखिलेश कुमार, एसएसपी/डीआईजी
4-5 संदिग्ध लोग ले जाने की चर्चा
स्लीपिंग मॉड्यूल पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करते हैं। आईएसआई के ट्रेंड एजेंटों, जासूसों से लेकर आतंकियों को एक तरह से सुरक्षा कवच और सुविधाएं उपलब्ध कराने के अलावा जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराना इन स्लीपिंग मॉड्यूल का काम होता है। इन स्लीपिंग मॉड्यूल के संपर्क काफी गहरे होते हैं। आईएसआई एजेंटों को स्थानीय स्तर पर सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए स्लीपिंग मॉड्यूल साथ रहते हैं।
खासतौर से सैन्य इलाकों में इनकी पूरी मदद ली जाती है। हाल ही में मेरठ में तैनात रहा सेना का सिग्नल मैन कंचन सिंह भी आईएसआई को सूचनाएं साझा करने में पकड़ा गया था। वहीं एनआईए और एटीएस ने खासतौर से मवाना, किठौर और परीक्षितगढ़ में कई जगहों पर दबिश दी। चर्चा है कि चार-पांच संदिग्ध लोगों को अधिकारी उठाकर ले गए।
नईम का नाम सुनकर सब हैरान
एनआईए, एटीएस और पुलिस फोर्स के बुधवार दोपहर रार्धना गांव पहुंचते ही ग्रामीणों में खलबली मच गई। फोर्स ने नईम के घर की घेराबंदी कर ली। बताया गया कि टीम नईम की तलाश में आयी है। नईम का आईएसआई से कनेक्शन है, इसको सुनकर ग्रामीण हैरान रह गए।
नईम की मां सबरीन ने बताया कि उसके बेटे की गुरुग्राम में वेल्डिंग की दुकान है। कुछ दिन से वो दिल्ली के जाफराबाद में रह रहा है। उसेे गांव से गए दो साल हो गए। नईम का एक भाई सऊदी अरब में नौकरी करता है। वो पांच भाइयों में सबसे छोटा है। नईम का रिश्तेदार सिंभावली थानाक्षेत्र के बैट गांव में रहता है। जिसके संपर्क आईएसआई से जुड़े होने पुलिस ने बताए। उसको साथ लेकर फोर्स रार्धना आई थी।
अब तक ये चढ़े हत्थे
26 अक्तूबर 2018 : बुलंदशहर में जाहिद निवासी खुर्जा को गिरफ्तार किया गया
19 अक्तूबर 2018 : मेरठ कैंट से सेना का सिग्नल मैन कंचन सिंह पकड़ा गया
27 नवंबर 2015 : एसटीएफ ने मेरठ कैंट से आईएसआई एजेंट इजाज दबोचा
16 अगस्त 2014 : मेरठ से संदिग्ध आईएसआई एजेंट आसिफ अली गिरफ्तार
10 जनवरी 2009 : सहारनपुर से आईएसआई एजेंट आमिर अहमद उर्फ भूरा गिरफ्तार
12 दिसंबर 2008 : सीआरपीएफ कैंप में आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी फहीम अंसारी गिरफ्तार।
21 जून 2007 : बिजनौर में भारी मात्रा में आरडीएक्स के साथ हूजी के दो आतंकी गिरफ्तार
23 अगस्त 2005 : लश्कर-ए-तैयबा के चीफ कोऑर्डिनेटर अबू रज्जाक मसूद का मुजफ्फरनगर कनेक्शन मिला।
10 मार्च 2005: मेरठ से खलील हुसैन शाह नाम का आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
18 अप्रैल 2004: मेरठ से रूबी बेगम नाम की आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
14 मार्च, 2003: मुजफ्फरनगर से जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी सज्जाद और इत्तफाकुल गिरफ्तार।
15 जुलाई 2002: मुजफ्फरनगर से एक आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
09 जुलाई 2002: मुरादाबाद से हिज्बुल मुजाहिदीन से ताल्लुक रखने वाले पांच आतंकी गिरफ्तार।
21 जून 2002 : पाक को सेना के दस्तावेज मुहैया कराने वाले एजेंट को पकड़ा गया।