पड़ताल: सवा करोड़ पी गए स्मार्ट कैंट के 21 वाटर एटीएम, जनता को नहीं मिला एक बूंद पानी, बोर्ड की कमाई भी ठप
मेरठ कैंट स्मार्ट कैंट के स्लोगन आपको मेरठ छावनी में लिखे मिल जाएंगे, लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। यहां जनता की प्या बुझाने के लिए लगाए गए वाटर एटीएम खुद ही पानी को मोहताज हैं। 21 स्थानों पर लगे वाटर एटीएम में एक बूंद भी पानी नहीं है।
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तख्तियों पर लिखे कुछ नारों में ही मेरठ कैंट स्मार्ट है। हकीकत एकदम उलट है। सड़कें गड्ढों से छलनी हैं। सवा करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई वाटर एटीएम की स्मार्ट व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। कैंट बोर्ड ने स्मार्ट बनने की दौड़ में शामिल होने के लिए ही 2017 और 2018 में एक करोड़ 25 लाख की कीमत से 21 जगह वाटर एटीएम लगाए थे। आठ वार्डों में इनकी लोकेशन सप्लाई डिपो रोड चौराहा, लालकुर्ती थाने के पास, बेगमपुल, लालकुर्ती घोसीमोहल्ला, सदर शिवचौक, दास मोटर्स के सामने, गांधी बाग, रजबन, बाबा औघड़नाथ मंदिर के पास तय की गई।
तब इन वाटर एटीएम को ऑनलाइन भी किया गया। यानी आप गूगल पर कैंट के नजदीकी वाटर एटीएम को सर्च करें तो जीपीएस आपको वहीं ले जाएगा। अमर उजाला ने इन सभी वाटर एटीएम का जायजा लिया तो कहीं भी पानी नहीं मिला।
सिक्के गिनने के लिए लगाया था स्टाफ
कैंट 21 स्थानों पर लगे वाटर एटीएम से प्रतिदिन 24 घंटे में लगभग 20 हजार लीटर ठंडा पानी बिकता था। पानी की कीमत एक रुपये लीटर रखी गई थी। तब एटीएम से सिक्के निकालने के लिए कैंट बोर्ड की गाड़ी घूमती थी। सिक्कों को गिनने के लिए कैंट बोर्ड में सिक्के गिनने के लिए अलग से कर्मचारी लगाए गए थे। इन वाटर एटीएम से आसपास के लोग कैंपर में ठंडा पानी लेकर जाते थे। कैंट बोर्ड की इस पहल को सभी ने सराहा था।
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वाटर एटीएम पर हो रहा है डायल 112 का प्रचार
वाटर एटीएम जन जागरूकता के लिए पुलिस, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, प्राकृतिक आपदा की सूचना देने के लिए डायल 112 का प्रचार किया जा रहा है।
सिक्के और स्मार्ट कार्ड से चलता था वाटर एटीएम
वाटर एटीएम से पानी लेने के लिए लोगों को एक रुपये के सिक्के और स्मार्ट कार्ड का प्रयोग करना होता था। स्मार्ट कार्ड का रिचार्ज कैंट बोर्ड ऑफिस में होता था। अब यह पूरी व्यवस्था ठप है।
बोर्ड के पास पैसा नहीं, संचालन के लिए नहीं मिल रही कोई संस्था
धन की कमी के चलते वाटर का एटीएम संचालन नहीं हो पा रहा है। कई बार सामाजिक संस्थाओं को जिम्मेदारी देने का प्रयास किया गया है। लेकिन कोई संस्था आगे ही नहीं आ रही है। प्रयास जारी है। - जयपाल तोमर, प्रवक्ता कैंट बोर्ड