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कोरोना ने फीका कर दिया रटौल का स्वाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है इस आम-ए-खास की पहचान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 23 Jul 2020 10:24 PM IST
सार
- आम की मांग घटी, बागान मालिकों को नुकसान
- रटौल प्रजाति की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है पहचान
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रटौल आम
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संक्रमण के कारण इस बार आम भी बेस्वाद हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बागपत जिले को पहचान दिलाने वाले चांदीनगर के रटौल आम की डिमांड कम हुई है। इसका खामियाजा बागान मालिकों और ठेकेदारों को भुगतना पड़ा। गुरुवार आगे तस्वीरों में जानें कोरोना महामारी के कारण आम के बागान मालिकों और ठेकेदारों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है-
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mango, rataul mango
- फोटो : अमर उजाला
आम की फसल उगाने वाले किसानों और ठेकेदारों को इस बार लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। बागान मालिक अबुल कलाम का कहना है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड तक रटौल आम की डिमांड रहती थी। कोरोना संक्रमण की दहशत के कारण इस बार डिमांड घटी है, इसका सीधा नुकसान ठेकेदारों और बागान मालिकों को हुआ है।
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रटौल आम
- फोटो : अमर उजाला
फल पट्टी क्षेत्र में सुविधा नहीं
पूर्व प्रधान जुनेद फरीदा बताते हैं कि जिले के खेकड़ा, पिलाना और बागपत ब्लॉक को फल पट्टी क्षेत्र घोषित किया गया है। इसी क्षेत्र में रटौल गांव हैं। अकेले रटौल में करीब सात हजार बीघा में आम के बाग हैं।
लॉकडाउन में बागों में इस बार कीटनाशक का छिड़काव नहीं हुआ। इस कारण इस बार अच्छी फसल का बीस फीसदी हिस्सा बीमारी ने खराब कर दिया। इसके बाद डिमांड नहीं हुई। अब शनिवार और रविवार को बंद से हालात मुश्किल हो गए।
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रटौल आम
- फोटो : अमर उजाला
यूपी में नहीं हुए आम महोत्सव
मैंगो फेस्टिवल में रटौल की धाक जमाने वाले अबुल कलाम का कहना है कि इस बार आम महोत्सव नहीं हुए। जिस वजह से वह अपने गांव की आम की प्रजातियों का प्रदर्शन नहीं कर सका।
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रटौल आम
- फोटो : अमर उजाला।
रटौल से पहचान, यह भी है किस्म
आम उत्पादक अबुल कलाम ने बताया कि मखसूस, बर्फीला, मिल कोकोनट, मैंगो मैक्जिमा, बेनजरी स्पेशल, लाइट मैंगो, व्हाइट मैंगो, रटौल मिर्च, रटौल गोला सहित करीब 85 वैरायटी हैं। इन सभी को रटौल किस्म का ही पेटेंट है। अन्य किस्मों का पेटेंट कराने की अब तैयारी चल रही है।
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