इंस्पेक्टर की शहादत: दो मुठभेड़ों से नहीं लिया सबक, फिर की चूक, बलिदान हुए सुनील कुमार
शामली के झिंझाना के उदपुर के ईंट भट्ठे पर हुई मुठभेड़ में शहीद हुए इंस्पेक्टर की जान कहीं एसटीएफ टीम की चूक से तो नहीं चली गई है। इंस्पेक्टर सुनील की मौत के बाद यह सवाल हर कोई उठा रहा है।
विस्तार
शामली के उदपुर गांव के जंगल में हुई मुठभेड़ ने 1994 की गुज्जरहेड़ी और 2018 की जंधेड़ी मुठभेड़ की याद ताजा कर दी। इन दोनों मुठभेड़ों में पुलिस की चूक उदपुर में हुई मुठभेड़ के दौरान भी जारी रही जिसमें फिर से पुलिस के जांबाज इंस्पेक्टर शहीद हो गए।
नब्बे के दशक में चरथावल थाना क्षेत्र के गांव बिरालसी में अमरीश पंडित और प्रदीप ठाकुर के बीच गैंगवार में दर्जनों लोगों की हत्या हुई थी। सात लोगों की हत्या में प्रदीप ठाकुर का नाम सामने आया और प्रदीप पर पचास हजार का इनाम घोषित कर दिया गया।
वर्ष 1994 में एक व दो जनवरी की मध्यरात्रि पुलिस को प्रदीप ठाकुर व उसके साथियों की तितावी के गुज्जरहेड़ी में एक घर पर मौजूद रहने की सूचना मिली। एक सिपाही को मकान के अंदर टोह लेने के लिए भेज दिया। अति उत्साह में सिपाही ने फायर झोंक दिया, जिसमे इनामी प्रदीप का भाई प्रमोद मारा गया और सिपाही भी गोली लगने से शहीद हो गया था।
साबिर एनकाउंटर
वर्ष 2018 में 3 जनवरी को मुकीम गिरोह के साबिर की जंधेड़ी गांव में घेराबंदी की गई। पुलिस साबिर के दुस्साहस से परिचित थी। वह पहले भी पुलिस पर सीधे फायर कर चुका था।
पुलिस की घेराबंदी तोड़ने में उसे महारत हासिल थी। मगर इसके बाद भी टीम के सिपाही अंकित अति उत्साह में कमरे का दरवाजा तोड़ते हुए बदमाशों के कमरे में घुस गया। उस समय भी अंकित ने न तो बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी थी न ही सिर पर हेलमेट, सिर्फ ऊन की टोपी ओढ़ रखी थी। साबिर ने अंकित के सिर को निशाना बनाया। हाालांकि साबिर ढेर हो गया था मगर अंकित शहीद हो गए थे।
पानीपत के इकराम की कार से उदपुर पहुंचे थे चारों बदमाश
झिंझाना के उदपुर गांव के जंगल में मुठभेड़ के बाद अब पुलिस की जांच में सामने आया है कि बदमाश हरियाणा के पानीपत के इकराम नाम के व्यक्ति की कार में सवार होकर पहुंचे थे। उक्त कार इकराम के नाम दर्ज मिली है। पुलिस अब इकराम की तलाश में जुट गई है।