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Meerut News: जेल में बंदी और कैदियों ने मनाया दशहरे का जश्न, मुस्कान-साहिल, रविता-अमरदीप सदमे में बैठे
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सौरभ की हत्या में मुस्कान-साहिल को और अमित कश्यप की हत्या में रविता-अमरदीप को हुई है फांसी की सजा
दशहरे की छुट्टी के बाद आज तैयार होंगे हाईकोर्ट में अपील करने के कागजात, हाईकोर्ट लेगा आगे का निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंदियों और कैदियों ने दशहरे का जश्न मनाया। इस दौरान सौरभ हत्याकांड के फांसी की सजा पाए मुस्कान-साहिल और अमित हत्याकांड के रविता व अमरदीप अपनी-अपनी बैरकों में खामोश बैठे हुए थे। जेल प्रशासन की तरफ से उनको जेल के अंदर मंदिर जाने और जश्न में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया और अपनी बैरकों में सदमे में बैठे रहे। चारों को अपनी फांसी का डर सता रहा है। वहीं दशहरे की छुट्टी खत्म होने के बाद आज बुधवार को कागजात तैयार किए जाएंगे। जिसके बाद हाईकोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ अपील डाली जाएगी।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल में दशहरे का पर्व बंदी और कैदी मनाते हैं। पूजा पाठ और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मुस्कान-साहिल, रविता और अमरदीप ने इस बार दशहरे के त्योहार पर कोई इच्छा व्यक्त नहीं की। न ही किसी प्रकार के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि अब त्योहारों की छुट्टी खत्म हो गई है। बुधवार को सभी कागजात तैयार वकील करेंगे। जिसके बाद चारों दोषियों की फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कराई जाएगी।
ओमपाल का अभी तक नहीं बिका मकान, सदमे में आए
मेरठ। सौरभ ने ओमपाल का इंदिरा नगर में मकान किराए पर लिया हुआ था। जिसमें वह अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी पीहू के साथ रहता था। हत्या भी ओमपाल के मकान में की थी। ओमपाल का कहना है कि सौरभ की हत्या के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। इस घर को ''हत्या वाला मकान'' कहते हैं। सौरभ की हत्या के बाद से मकान बंद पड़ा है।
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ओमपाल का कहना है कि इससे मुझे काफी नुकसान हो रहा है। पहले इसी किराए से हमारे घर का खर्च चलता था। अब घर पर पुलिस का ताला लगा है। चाबी भी पुलिस के पास ही है। मेन गेट से लेकर अंदर तक सब कुछ सील है। हम अपना मकान इस्तेमाल तक कर पा रहे हैं। जब से यह प्रकरण हुआ है लोगों ने हमारे मकान को बदनाम करना शुरू कर दिया है। लोग मेरा मकान तक देखना पसंद नहीं करते। इस घटना के बाद से हमारी जिंदगी खराब हो गई है।
उन्होंनें बताया कि 2022 से सौरभ का परिवार यहां हमारे मकान में किराए पर रहता था। 3500 रुपये महीना किराए पर मकान उन्हें दिया था। बाद में बढ़कर किराया 6 हजार रुपये हो गया था। उन्होंने अपने घर से सील हटाने की मांग पुलिस अधिकारियों से की है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि मकान की सील को नियमानुसार खोलने के निर्देश एसओ ब्रह्मपुरी को दिए गए हैं।
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दशहरे की छुट्टी के बाद आज तैयार होंगे हाईकोर्ट में अपील करने के कागजात, हाईकोर्ट लेगा आगे का निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंदियों और कैदियों ने दशहरे का जश्न मनाया। इस दौरान सौरभ हत्याकांड के फांसी की सजा पाए मुस्कान-साहिल और अमित हत्याकांड के रविता व अमरदीप अपनी-अपनी बैरकों में खामोश बैठे हुए थे। जेल प्रशासन की तरफ से उनको जेल के अंदर मंदिर जाने और जश्न में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया और अपनी बैरकों में सदमे में बैठे रहे। चारों को अपनी फांसी का डर सता रहा है। वहीं दशहरे की छुट्टी खत्म होने के बाद आज बुधवार को कागजात तैयार किए जाएंगे। जिसके बाद हाईकोर्ट में फांसी की सजा के खिलाफ अपील डाली जाएगी।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल में दशहरे का पर्व बंदी और कैदी मनाते हैं। पूजा पाठ और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मुस्कान-साहिल, रविता और अमरदीप ने इस बार दशहरे के त्योहार पर कोई इच्छा व्यक्त नहीं की। न ही किसी प्रकार के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि अब त्योहारों की छुट्टी खत्म हो गई है। बुधवार को सभी कागजात तैयार वकील करेंगे। जिसके बाद चारों दोषियों की फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कराई जाएगी।
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ओमपाल का अभी तक नहीं बिका मकान, सदमे में आए
मेरठ। सौरभ ने ओमपाल का इंदिरा नगर में मकान किराए पर लिया हुआ था। जिसमें वह अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी पीहू के साथ रहता था। हत्या भी ओमपाल के मकान में की थी। ओमपाल का कहना है कि सौरभ की हत्या के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। इस घर को ''हत्या वाला मकान'' कहते हैं। सौरभ की हत्या के बाद से मकान बंद पड़ा है।
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ओमपाल का कहना है कि इससे मुझे काफी नुकसान हो रहा है। पहले इसी किराए से हमारे घर का खर्च चलता था। अब घर पर पुलिस का ताला लगा है। चाबी भी पुलिस के पास ही है। मेन गेट से लेकर अंदर तक सब कुछ सील है। हम अपना मकान इस्तेमाल तक कर पा रहे हैं। जब से यह प्रकरण हुआ है लोगों ने हमारे मकान को बदनाम करना शुरू कर दिया है। लोग मेरा मकान तक देखना पसंद नहीं करते। इस घटना के बाद से हमारी जिंदगी खराब हो गई है।
उन्होंनें बताया कि 2022 से सौरभ का परिवार यहां हमारे मकान में किराए पर रहता था। 3500 रुपये महीना किराए पर मकान उन्हें दिया था। बाद में बढ़कर किराया 6 हजार रुपये हो गया था। उन्होंने अपने घर से सील हटाने की मांग पुलिस अधिकारियों से की है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि मकान की सील को नियमानुसार खोलने के निर्देश एसओ ब्रह्मपुरी को दिए गए हैं।