महंगाई की मार: अदरक-टमाटर पहुंच से बाहर, दोगुनी महंगी हुईं सब्जियां, अभी और बढ़ेंगे दाम
आम आदमी की पहुंच से सब्जियां दूर हो रही हैं। सब्जियों के दामों ने अचानक आसमान छू लिया है। बाजार में थोक से लेकर फुटकर तक सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं।
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मानसूनी बरसात से हरी सब्जियों पर महंगाई की मार पड़ गई है। जिस टमाटर की फसल को 20 दिन पहले किसानों ने खेतों में ही नष्ट कर दिया था, अब उसी के दाम आसमान छू रहे हैं। फुटकर में टमाटर 120 रुपये प्रति किलो और हरी मिर्च 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। भिंडी, अरबी, तोरई, बैंगन 80 रुपये किलो पर पहुंच गए हैं। लौकी 50 रुपये किलो है। अधिकतर हरी सब्जियां आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। कुछ सब्जियां क्षेत्र के हिसाब से भी महंगी हैं। शारदा रोड पर सब्जियों पर सबसे अधिक महंगाई है।
बताया जा रहा है कि बरसात के कारण हरी सब्जियों की पैदावार गिरी है, जिसका असर मंडी में सब्जियों की आवक पर पड़ा है। अगर मानसून का असर इसी प्रकार रहा तो हरी सब्जियों के दामों में और उछाल आएगा। हालांकि अभी भी किसान की सब्जी सस्ती और व्यापारी की सब्जी दोगुनी से अधिक महंगी है।
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कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते बंद हो जाते हैं। इस कारण शिवरात्रि से पहले लगभग पांच दिन तक सब्जियों की आवक कम हो जाती है। यही कारण है कि कांवड़ यात्रा के दौरान सब्जियों के दाम भी बढ़ जाएंगे।
नवीन सब्जी मंडी से थोक में सब्जियों के रेट और शहर के बाजारों से फुटकर प्रतिकिलो में सब्जियों के रेट
सब्जी एक सप्ताह अब थोक रेट फुटकर रेट
पहले थोक रेट प्रति किलो में प्रति किलो में
टमाटर 15-20 रु. 70-80 रु. 100-120 रु.
लौकी 12 रु. 20 रु. 40-50 रु.
मिर्च 30-40 80-100 130-150 रु.
करेला 08 रु. 15-20 रु. 30-35 रु.
तोरई 30 रु. 50 रु. 70-80 रु.
भिंडी 20 रु. 40 रु. 70-80 रु.
बैंगन 20 रु. 35 रु. 70-80 रु.
अदरक 220 रु. 300 रु. 420-450 रु.
हिमाचल से आ रहा टमाटर
जून से नवीन मंडी में हिमाचल प्रदेश का टमाटर आने लगता है। नवीन सब्जी मंडी एसो. के अध्यक्ष पदम सिंह सैनी का कहना है कि हिमाचल में अधिक बारिश के कारण काफी फसल खराब हो गई है। इस कारण मंडी में टमाटर की आपूर्ति कम हो गई है। प्रतिदिन 25 किलो वजन की तीन से चार हजार पेटी टमाटर की आपूर्ति होती थी, जो अब घटकर 800 पेटी रह गई है। यही कारण है कि टमाटर पर तेजी आई है। इनका कहना है कि बरसात के समय हरी सब्जियों की उपज कम हो जाती है, खासकर बेल वाली सब्जियों के दाम बढ़ने शुरू हो जाते हैं।
सरकार को थोक और फुटकर के सब्जी के रेट के अंतर को कम कराना चाहिए। दाम ज्यादा बढ़ गए हैं। -वर्षा त्यागी, शास्त्रीनगर
चार-पांच दिन में सब्जियों के भाव अधिक बढ़े हैं। इससे पूरे माह का रसोई का बजट बिगड़ गया है। -गीता, लोहियानगर
महंगाई के कारण किलो में नहीं बल्कि पाव में सब्जी खरीदनी पड़ रही है। मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए दिक्कत है। -नीता दीक्षित, ब्रह्मपुरी