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Meerut News: पितरों को मोक्ष दिलाती है इंदिरा एकादशी, व्रत आज

Mon, 05 Oct 2026 06:06 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 06:06 PM IST
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Indira Ekadashi grants salvation to ancestors; fast observed today.
व्रत का पुण्य पितरों को समर्पित करने से मोक्ष की प्राप्ति की होने की मान्यता
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पितृपक्ष में पड़ने वाली आश्विन कृष्ण एकादशी का विशेष महत्व
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस वर्ष इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार (आज) है। ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि पितृपक्ष में आने वाली इस एकादशी को पितरों को मोक्ष प्रदान करने वाली माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त इंदिरा एकादशी का व्रत करता है और उसका पुण्य पितरों को समर्पित करता है, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होता है। को भी अधोगति से मुक्ति मिलने और भगवान श्रीहरि विष्णु के चरणों में स्थान प्राप्त होने की मान्यता है। यह भी कहा जाता है कि व्रत करने वाले व्यक्ति के पितर प्रसन्न होकर परिवार को सुख, समृद्धि और वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
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आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि इंदिरा एकादशी की कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मति नगरी के राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक दिन देवर्षि नारद उनके दरबार में पहुंचे और बताया कि राजा के पिता पूर्व जन्म में एकादशी व्रत भंग होने के कारण यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। उन्होंने राजा को आश्विन कृष्ण इंदिरा एकादशी का व्रत पिता के निमित्त करने की सलाह दी। राजा ने विधि-विधान से व्रत किया। मान्यता है कि इसके प्रभाव से उनके पिता को विष्णुलोक की प्राप्ति हुई और राजा इंद्रसेन भी अंत में स्वर्गलोक गए।
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आचार्य पंडित संजय त्रिपाठी ने बताया कि इंदिरा एकादशी के दिन वेदपाठी ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन कराने, वस्त्र आदि दान करने और ससम्मान विदा करने की भी परंपरा है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम और श्रीमद्भागवत का पाठ करना शुभ माना जाता है।
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