Raksha bandhan 2020: चीन के सामान पर रोक के बाद बढ़ा स्वेदेशी बाजार, बहनें रोज तैयार कर रहीं ढाई लाख राखी
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। रक्षा बंधन पर भी महिलाओं को इस बार मौका मिला तो उन्होंने कर दिखाया। इस बार चीन के उत्पाद की मांग घटने के बाद नया अवसर खुला। चाइनीज राखी बाजार से गायब हो गई तो स्वदेशी की मांग बढ़ी।
ऐसे में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दुकानदारों ने काम के अधिक आर्डर दिए। यही वजह है कि जिले में रोजाना ढाई लाख राखी तैयार की गई। सिंघावली अहीर गांव के बाबा मोहन राम स्वयं सहायता समूह की संचालक महेंद्री बताती हैं कि करीब 25 सौ महिलाएं, इस वक्त रोजाना ढाई लाख राखी बना रही हैं। आपूर्ति दिल्ली की जाती है और जिला बागपत से देशभर में राखी को भेज दिया जाता है।
जिले में चल रहे 4269 समूह
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के जरिए जिले में 4269 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। करीब 40 हजार महिला पुरुष इन ग्रुप से जुड़े हैं। वर्तमान में करीब 50 ग्रुप राखी बनाने का काम कर रहे हैं।
यह ग्रुप भी बना रहे राखी
रक्षा बंधन पर बड़ौत का महाज्ञान, बिनौली का वहीदन स्वयं सहायता समूह समेत अन्य ग्रुप राखी बना रहे हैं।
जानिए, राखी की कीमत
सिंघावली अहीर गांव के बाबा मोहन राम ग्रुप की संचालित महेंद्री का कहना है कि उनके ग्रुप पांच से लेकर 50 रुपये तक की राखी बना रहे हैं। पांच रुपये में धागे और मोती से राखी बनती है, जबकि 50 रुपये की राखी में नग लगाए जाते हैं और फैंसी डिजाइन बनाए जाते हैं।
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