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हैंडपंप और सबमर्सिबल घोटाले में लाखों का खेल, करोड़ों खर्च फिर भी नहीं सुधरे हालात
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Wed, 14 Jun 2017 12:53 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर निगम का जलकल विभाग हैँडपंप और सबमर्सिबल घोटालों के कारण सुर्खियों में रहा है। मैंटिनेंस पर सवा करोड़ की बंदरबांट करने के लिए हर साल घोटाले का तानाबाना बुना जाता है।
इस बार जलकल अधिकारियों ने नवनियुक्त नगरायुक्त से हैंडपंप के मेंटिनेंस और रिबोर की लाखों के भुगतान कीफाइलों पर स्वीकृति करने की तैयारी की है। ऐसी 150 से अधिक फाइले हैं, जिनसे भुगतान कराने की तैयारी है और इनका बजट करीब 40 लाख रुपये का बताया जा रहा है।
ये फाइल भी उन हैंडपंपों की है, जहां या तो काम नहीं हुआ और हुआ भी तो बहुत मामूली। इनमें से कुछ फाइल ऐसी भी हैं, जिसपर तत्कालीन नगरायुक्त रोक लगा चुके हैं। भुगतान के लिए पेश होने वाली सभी फाइलों में खराब हैंडपंप के पाइप बदले हुए बताए गए हैं। चार से पांच हजार एक हैंडपंप पर खर्च दर्शाया गया है। शक के आधार पर कुछ हैंडपंपों को चैक कराया तो गड़बड़झाला सामने आ गया। अब नगरायुक्त ने बिना भौतिक सत्यापन के एक भी फाइल पास करने से इंकार कर दिया है। इसको लेकर ठेकेदारों में हडकंप मच गया है।
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चार साल में चार करोड़ खर्च, फिर भी हैंडपंप खराब
शहर में नगर निगम और जल निगम हैंडपंप लगवाता है। नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक शहर में दस हजार हैंडपंप लगे हैं। जिनकी मरम्मत पर प्रतिवर्ष सवा करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। निगम के रिकार्ड यानी अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों द्वारा तैयार की गई फाइलों पर गौर करें तो वर्ष में एक हैंडपंप कई कई बार ठीक हो रहा है। जो सीधे सीधे सरकारी धन की बंदरबांट दर्शाता है। पिछले चार साल चार करोड़ से भी अधिक रुपये खर्च किए गए। उसके बाद भी शहर के सभी हैंडपंप ठीक नहीं हो सके। वर्ष 2014 में एक करोड़ 25 लाख रुपये हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर पर खर्च हुए हैं।
खराब होती है डोल्ची, फाइल बनती है पाइप की
डोल्ची खराब होने या फिर चेन खराब होने के कारण अधिकतर हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। लेकिन जब जलकल विभाग का ठेकेदार उस हैंडपंप को ठीक करता है तो डोल्ची आदि सामान के साथ साथ हैंडपंप के फूटे तीन-चार पाइप भी बदले हुए दिखा देता है। एक हैंडपंप जो 100 रुपये में ठीक हो जाता है, उस पर तीन हजार तक का खर्च दर्शा दिया जाता है।
ये है नियम
हैंडपंप खराब होने की सूचना पर जलकल विभाग का इंजीनियर स्वयं मौके पर जाता है और मिस्त्री से हैंडपंप को खुलवाकर जांच करता है। इंजीनियर की रिपोर्ट पर हैंडपंप के पार्ट्स बदले जाते हैं। इंजीनियर ही उसका एस्टीमेट तैयार करता है।
ये है लापरवाही
खराब हैंडपंप हो या फिर सबमर्सिबल, ट्यूबवेल किसी पर भी जलकल विभाग के इंजीनियर स्वयं जाकर नहीं देखते हैं। ठेकेदारों की सांठगांठ से लगातार नगर निगम को हैंडपंप मरम्मत के नाम पर चूना लगाया जा रहा है।
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इस बार जलकल अधिकारियों ने नवनियुक्त नगरायुक्त से हैंडपंप के मेंटिनेंस और रिबोर की लाखों के भुगतान कीफाइलों पर स्वीकृति करने की तैयारी की है। ऐसी 150 से अधिक फाइले हैं, जिनसे भुगतान कराने की तैयारी है और इनका बजट करीब 40 लाख रुपये का बताया जा रहा है।
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ये फाइल भी उन हैंडपंपों की है, जहां या तो काम नहीं हुआ और हुआ भी तो बहुत मामूली। इनमें से कुछ फाइल ऐसी भी हैं, जिसपर तत्कालीन नगरायुक्त रोक लगा चुके हैं। भुगतान के लिए पेश होने वाली सभी फाइलों में खराब हैंडपंप के पाइप बदले हुए बताए गए हैं। चार से पांच हजार एक हैंडपंप पर खर्च दर्शाया गया है। शक के आधार पर कुछ हैंडपंपों को चैक कराया तो गड़बड़झाला सामने आ गया। अब नगरायुक्त ने बिना भौतिक सत्यापन के एक भी फाइल पास करने से इंकार कर दिया है। इसको लेकर ठेकेदारों में हडकंप मच गया है।
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चार साल में चार करोड़ खर्च, फिर भी हैंडपंप खराब
शहर में नगर निगम और जल निगम हैंडपंप लगवाता है। नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक शहर में दस हजार हैंडपंप लगे हैं। जिनकी मरम्मत पर प्रतिवर्ष सवा करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है। निगम के रिकार्ड यानी अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों द्वारा तैयार की गई फाइलों पर गौर करें तो वर्ष में एक हैंडपंप कई कई बार ठीक हो रहा है। जो सीधे सीधे सरकारी धन की बंदरबांट दर्शाता है। पिछले चार साल चार करोड़ से भी अधिक रुपये खर्च किए गए। उसके बाद भी शहर के सभी हैंडपंप ठीक नहीं हो सके। वर्ष 2014 में एक करोड़ 25 लाख रुपये हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर पर खर्च हुए हैं।
खराब होती है डोल्ची, फाइल बनती है पाइप की
डोल्ची खराब होने या फिर चेन खराब होने के कारण अधिकतर हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। लेकिन जब जलकल विभाग का ठेकेदार उस हैंडपंप को ठीक करता है तो डोल्ची आदि सामान के साथ साथ हैंडपंप के फूटे तीन-चार पाइप भी बदले हुए दिखा देता है। एक हैंडपंप जो 100 रुपये में ठीक हो जाता है, उस पर तीन हजार तक का खर्च दर्शा दिया जाता है।
ये है नियम
हैंडपंप खराब होने की सूचना पर जलकल विभाग का इंजीनियर स्वयं मौके पर जाता है और मिस्त्री से हैंडपंप को खुलवाकर जांच करता है। इंजीनियर की रिपोर्ट पर हैंडपंप के पार्ट्स बदले जाते हैं। इंजीनियर ही उसका एस्टीमेट तैयार करता है।
ये है लापरवाही
खराब हैंडपंप हो या फिर सबमर्सिबल, ट्यूबवेल किसी पर भी जलकल विभाग के इंजीनियर स्वयं जाकर नहीं देखते हैं। ठेकेदारों की सांठगांठ से लगातार नगर निगम को हैंडपंप मरम्मत के नाम पर चूना लगाया जा रहा है।