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बंधन मुक्त होना है तो धर्म को अपनाना होगा: भारत भूष
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बंधन मुक्त होना है तो धर्म को अपनाना होगा: भारत भूषण
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख शांति समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 20वें दिन रविवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आचार्य 108 भारतभूषण मुनिराज ने कहा कि धर्म ही व्यक्ति को सभी बंधनों से मुक्ति दिलाता है। आत्मा तो शरीर के बंधन में है, परंतु शरीर सांसारिक अजीव वस्तुओं के बंधन में होता है। कभी-कभी तुम इस संसार के झंझट से दूर जाना चाहते हो। ताजगी के लिए घूमने का मन होता तो पर्वतीय क्षेत्र, चलचित्र, पार्क आदि चले जाते हो, परंतु फिर भी अजीव वस्तुओं से नहीं बच पाते हो। यदि तुम्हें बंधनों से मुक्त होना है तो धर्म को अपनाना ही होगा।
रविवार को सुकुमार जैन, अतीत जैन, अमित जैन को स्वर्ण कलश से अभिषेक किया। शांतिधारा करने का सौभाग्य सौरभ जैन, पवन कुमार, आशीष जैन, वेदप्रकाश जैन को मिला। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप का प्रज्ज्वलन सुलेखा जैन, पूजा जैन, रिचा जैन, रचना जैन, गरिमा जैन, बीना जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। देव, शास्त्र, गुरु व आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों पर अर्घ्य चढ़ाए गए। 301 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन किया गया।
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विधान का विसर्जन बीना जैन तथा पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन वीना जैन, वेदप्रकाश जैन ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, शशांक जैन, मनोज जैन, धनपाल जैन का सहयोग रहा।
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख शांति समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 20वें दिन रविवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आचार्य 108 भारतभूषण मुनिराज ने कहा कि धर्म ही व्यक्ति को सभी बंधनों से मुक्ति दिलाता है। आत्मा तो शरीर के बंधन में है, परंतु शरीर सांसारिक अजीव वस्तुओं के बंधन में होता है। कभी-कभी तुम इस संसार के झंझट से दूर जाना चाहते हो। ताजगी के लिए घूमने का मन होता तो पर्वतीय क्षेत्र, चलचित्र, पार्क आदि चले जाते हो, परंतु फिर भी अजीव वस्तुओं से नहीं बच पाते हो। यदि तुम्हें बंधनों से मुक्त होना है तो धर्म को अपनाना ही होगा।
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रविवार को सुकुमार जैन, अतीत जैन, अमित जैन को स्वर्ण कलश से अभिषेक किया। शांतिधारा करने का सौभाग्य सौरभ जैन, पवन कुमार, आशीष जैन, वेदप्रकाश जैन को मिला। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप का प्रज्ज्वलन सुलेखा जैन, पूजा जैन, रिचा जैन, रचना जैन, गरिमा जैन, बीना जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। देव, शास्त्र, गुरु व आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों पर अर्घ्य चढ़ाए गए। 301 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन किया गया।
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विधान का विसर्जन बीना जैन तथा पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन वीना जैन, वेदप्रकाश जैन ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, शशांक जैन, मनोज जैन, धनपाल जैन का सहयोग रहा।