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कर्मों के आधार पर तय होता है मानव जीवन : राजेश सेठी
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थापर नगर आर्य समाज में आयोजित कार्यक्रम।
- आर्य समाज थापर नगर की ओर से रविवारीय सत्संग का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर की ओर से रविवारीय सत्संग में मुख्य वक्ता राजेश सेठी ने कहा कि मनुष्य यह मान लेता है कि उसने अपने पुरुषार्थ और बुद्धि से जो धन एवं पदार्थ अर्जित किए हैं, वे उसके अपने हैं। वास्तव में मनुष्य किसी भी वस्तु को अपने साथ नहीं ले जा सकता। उन्होंने कहा कि मानव जीवन कर्मों के आधार पर तय होता है।
उन्होंने कहा कि धन, बुद्धि, शारीरिक शक्ति और जीवन स्वयं परमात्मा की कृपा से प्राप्त होते हैं। मानव जीवन भी पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है। अन्न, जल, प्राणवायु तथा खनिज सहित संसार के सभी भोग्य पदार्थ ईश्वर की व्यवस्था से ही प्राप्त होते हैं। इसलिए मनुष्य को परमात्मा के प्रति कृतज्ञ रहकर इनका सदुपयोग करना चाहिए।
सेठी ने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को लोभ और आसक्ति से मुक्त होकर संसार के पदार्थों का उपभोग करने का अधिकार दिया है। किसी दूसरे के धन या संपत्ति पर दृष्टि न रखते हुए त्यागपूर्वक जीवन व्यतीत करना ही सुख का मार्ग है। वैदिक सिद्धांतों के अनुसार परमात्मा ने जीवात्माओं के कल्याण के लिए ही समस्त भोग्य पदार्थों की रचना की है। कार्यक्रम में आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान सुनीता एवं मुकेश कनौजिया रहे। कार्यक्रम डॉ. अंकित आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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इस दौरान सुभाष मल्होत्रा, विमल मरवाह, मंजू वासुदेव, प्रीति सेठी सहित अन्य गायकों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुतियां दीं। संचालन मनीष शर्मा ने किया। कार्यक्रम में भानु बत्रा, आनंद वर्धन झा, श्रेय बत्रा, विजय बंसल, कृष्ण कुमार वर्मा, करुणा सागर बाली, सुमन आनंद, ऋचा सेठी, आशीष सेठी और प्रमोद कुमार सिंह रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आर्य समाज थापरनगर की ओर से रविवारीय सत्संग में मुख्य वक्ता राजेश सेठी ने कहा कि मनुष्य यह मान लेता है कि उसने अपने पुरुषार्थ और बुद्धि से जो धन एवं पदार्थ अर्जित किए हैं, वे उसके अपने हैं। वास्तव में मनुष्य किसी भी वस्तु को अपने साथ नहीं ले जा सकता। उन्होंने कहा कि मानव जीवन कर्मों के आधार पर तय होता है।
उन्होंने कहा कि धन, बुद्धि, शारीरिक शक्ति और जीवन स्वयं परमात्मा की कृपा से प्राप्त होते हैं। मानव जीवन भी पूर्व जन्मों के कर्मों के आधार पर परमात्मा द्वारा प्रदान किया गया है। अन्न, जल, प्राणवायु तथा खनिज सहित संसार के सभी भोग्य पदार्थ ईश्वर की व्यवस्था से ही प्राप्त होते हैं। इसलिए मनुष्य को परमात्मा के प्रति कृतज्ञ रहकर इनका सदुपयोग करना चाहिए।
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सेठी ने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को लोभ और आसक्ति से मुक्त होकर संसार के पदार्थों का उपभोग करने का अधिकार दिया है। किसी दूसरे के धन या संपत्ति पर दृष्टि न रखते हुए त्यागपूर्वक जीवन व्यतीत करना ही सुख का मार्ग है। वैदिक सिद्धांतों के अनुसार परमात्मा ने जीवात्माओं के कल्याण के लिए ही समस्त भोग्य पदार्थों की रचना की है। कार्यक्रम में आचार्य सत्य प्रकाश शास्त्री के ब्रह्मत्व में देवयज्ञ संपन्न हुआ। यजमान सुनीता एवं मुकेश कनौजिया रहे। कार्यक्रम डॉ. अंकित आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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इस दौरान सुभाष मल्होत्रा, विमल मरवाह, मंजू वासुदेव, प्रीति सेठी सहित अन्य गायकों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुतियां दीं। संचालन मनीष शर्मा ने किया। कार्यक्रम में भानु बत्रा, आनंद वर्धन झा, श्रेय बत्रा, विजय बंसल, कृष्ण कुमार वर्मा, करुणा सागर बाली, सुमन आनंद, ऋचा सेठी, आशीष सेठी और प्रमोद कुमार सिंह रहे।