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कैसे हो मच्छरों का काम तमाम, शोध के नहीं इंतजाम

Thu, 22 Oct 2020 01:59 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2020 01:59 AM IST
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How should mosquitoes work, not research
मेरठ। मच्छरों पर अंकुश लगे तो कैसे, यहां इन पर शोध के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पूरे मंडल की जिम्मेदारी महज एक कीट विज्ञानी और दो इंसेक्ट कलेक्टर पर है। यही वजह है कि इस साल मच्छरों पर शोध नहीं हो सका है।
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डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों से निपटने के लिए 27 साल बाद 2018 में मच्छरों पर शोध कर बचाव के तरीके ढूंढने की कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक कार्यालय में एक कमरा लैब के लिए दिया गया। इसके लिए कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी की नियुक्ति की गई।
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यहां साल 1991 के बाद से कोई कीट विज्ञानी नहीं था।
मच्छर को पकड़ने वाले कलेक्टर, असिस्टेंट टेक्नीशियन, ड्राइवर समेत अन्य करीब 20 से ज्यादा स्टाफ की नियुक्ति की जानी थी। हालांकि सिर्फ दो इंसेक्ट कलेक्टर मिल सके हैं।
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इस तरह की जानी है जांच
लैब में जांच की जानी है कि किस क्षेत्र में ज्यादा मच्छर हैं, इसकी वजह क्या है। कौन सी प्रजाति के हैं। ये कौन सी बीमारी कितनी फैला सकते हैं। उनकी माइक्रोस्कोपिक जांच की जानी होती है। फिर इसकी रिपोर्ट जिला मलेरिया विभाग को दी जाती है। जिससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके।
मादा मच्छर दिन में 70-80 लोगों को बना सकती है निशाना
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि अलग-अलग इलाकों में मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां हैं। ये कई तरह के वायरस और पैरासाइट के जरिए विभिन्न बीमारियां फैलाते हैं। मच्छर बहुत तेजी से बढ़ते और काटते हैं। इसलिए ये मच्छर खतरनाक हैं। मादा मच्छर की उम्र नर के मुकाबले ज्यादा होती है। मादा एडीज एक बार में 50 से 100 अंडे देती है। यह एक दिन में 70 से 80 लोगों को काट सकती है।

स्टाफ कम है, शासन से चल रहा पत्राचार
कीट विज्ञानी डॉ. कीर्ति त्रिपाठी बताती हैं कि शासन से पत्राचार चल रहा है। स्टाफ के लिए नए सिरे से मानक तैयार किए जाने चाहिए। पिछले साल कुछ स्थानों से मच्छर को लेकर शोध किया गया था। जिसमें जिले में करीब 80 फीसदी मच्छर नर मिले थे। जिससे मच्छरजनित बीमारियों की कम फैलाने की आशंका जताई थी।
मच्छर जनित बीमारियों का हाल
2016 2017 2018 2019
डेंगू 195 660 202 215
मलेरिया 211 93 53 61
चिकनगुनिया 1105 00 00 00
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