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Meerut News: हिंदू-मुस्लिम सब साथ रहें मिलजुलकर, ऐसा हिंदुस्तान बना दे या अल्लाह
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कव्वाली की प्रस्तुति देती महिला कव्वाल। संवाद
- फोटो : Flawada
कुतुब शाह जमालुद्दीन की याद में चल रहे मेला उर्स में कव्वाली मुकाबले का आयोजन हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
फलावदा। कुतुब शाह जमालुद्दीन की याद में चल रहे मेला उर्स में कव्वाली मुकाबले का आयोजन हुआ। कव्वाल नसीम आरिफ ने पढ़ा कि मेरे नबी ने भी देखा था इस वतन की तरफ, यहां वफा है यही एक इशारा था, फक्त मुझे ही नहीं मेरा मुल्क जहां से अजीज, मेरे नबी को भी हिंदुस्तान प्यारा था।
उद्घाटन पूर्व चेयरमैन नय्यर आलम कुरैशी, पूर्व चेयरमैन अब्दुस समद, पूर्व चेयरपर्सन पुत्र सैयद मोहम्मद ईसा व कांग्रेस नेता सैयद रेहानुद्दीन, मेला सदर नवाबुद्दीन सैफी, नायब सदर नफीस राजा अंसारी, सरदार आलम कुरैशी व कोषाध्यक्ष नईम अनवर कुरैशी, जमील उस्मानी ने संयुक्त रूप से किया।
कव्वाल आलिया इंडियन ने पढ़ा कि जिस पर खुदा खुद भी फिदा है, वह अर्श पर अल्लाह मेहमान बना है, चिश्तिया रंग में आज रंगे हैं, ख्वाजा पिया मेरे दूल्हा बने हैं, मुझे भूल जाने वाले तुझे ये पता नहीं है, मेरे दिल में तू ही तू है कोई दूसरा नहीं है। नसीम आरिफ ने पढ़ा कि कोई फूल तो कोई गुलदान रो पड़े और साथ-साथ में संतान रो पड़े, ऐसी फिजा बनाओ मेरे देशवासियों, हिंदू का घर जले तो मुसलमान रो पड़े। आलिया इंडियन ने जवाब में पढ़ा कि काबे में तेरा जलवा काशी में नजारा है, यह भी हमें प्यारा है वह भी हमें प्यारा है, हिंदू को मिली गीता, इंजील ईसाई को, मुस्लिम के लिए तूने कुरआन उतारा है।
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नसीम आरिफ ने पढ़ा कि तीर दिल के पार भी हो जाएगा, जख्म खुशबूदार भी हो जाएगा, आप हमसे दोस्ती तो कीजिए, धीरे-धीरे प्यार भी हो जाएगा। कव्वाली का मुकाबला देर रात तक चला। मुकाबला सुनने वाले भी ठंड के बावजूद देर रात तक जमे रहे और मुकाबले का खूब आनंद लिया।
इस मौके पर फिरोज आलम कुरैशी, नायाब मिर्जा, सैयद रज़ा ऊद्दीन, सैयद आसिम रिजवी, अनवर मंसूरी, शाहजमा मिर्जा, शहजाद कुरैशी, आशु मेंबर, फैजान मेहरबान कुरैशी, आसिफ यासीन सैफी, मोहम्मद इमरान सैफी नगर अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी, कादिर कुरैशी, वकार फरीदी, शाहबाज आलम, सीमाब रिजवी, मिन्हाज गगसोना, शाहरुख रिजवी, सैयद उबैदुल्लाह गनी, जाकिर कस्सार आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फलावदा। कुतुब शाह जमालुद्दीन की याद में चल रहे मेला उर्स में कव्वाली मुकाबले का आयोजन हुआ। कव्वाल नसीम आरिफ ने पढ़ा कि मेरे नबी ने भी देखा था इस वतन की तरफ, यहां वफा है यही एक इशारा था, फक्त मुझे ही नहीं मेरा मुल्क जहां से अजीज, मेरे नबी को भी हिंदुस्तान प्यारा था।
उद्घाटन पूर्व चेयरमैन नय्यर आलम कुरैशी, पूर्व चेयरमैन अब्दुस समद, पूर्व चेयरपर्सन पुत्र सैयद मोहम्मद ईसा व कांग्रेस नेता सैयद रेहानुद्दीन, मेला सदर नवाबुद्दीन सैफी, नायब सदर नफीस राजा अंसारी, सरदार आलम कुरैशी व कोषाध्यक्ष नईम अनवर कुरैशी, जमील उस्मानी ने संयुक्त रूप से किया।
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कव्वाल आलिया इंडियन ने पढ़ा कि जिस पर खुदा खुद भी फिदा है, वह अर्श पर अल्लाह मेहमान बना है, चिश्तिया रंग में आज रंगे हैं, ख्वाजा पिया मेरे दूल्हा बने हैं, मुझे भूल जाने वाले तुझे ये पता नहीं है, मेरे दिल में तू ही तू है कोई दूसरा नहीं है। नसीम आरिफ ने पढ़ा कि कोई फूल तो कोई गुलदान रो पड़े और साथ-साथ में संतान रो पड़े, ऐसी फिजा बनाओ मेरे देशवासियों, हिंदू का घर जले तो मुसलमान रो पड़े। आलिया इंडियन ने जवाब में पढ़ा कि काबे में तेरा जलवा काशी में नजारा है, यह भी हमें प्यारा है वह भी हमें प्यारा है, हिंदू को मिली गीता, इंजील ईसाई को, मुस्लिम के लिए तूने कुरआन उतारा है।
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नसीम आरिफ ने पढ़ा कि तीर दिल के पार भी हो जाएगा, जख्म खुशबूदार भी हो जाएगा, आप हमसे दोस्ती तो कीजिए, धीरे-धीरे प्यार भी हो जाएगा। कव्वाली का मुकाबला देर रात तक चला। मुकाबला सुनने वाले भी ठंड के बावजूद देर रात तक जमे रहे और मुकाबले का खूब आनंद लिया।
इस मौके पर फिरोज आलम कुरैशी, नायाब मिर्जा, सैयद रज़ा ऊद्दीन, सैयद आसिम रिजवी, अनवर मंसूरी, शाहजमा मिर्जा, शहजाद कुरैशी, आशु मेंबर, फैजान मेहरबान कुरैशी, आसिफ यासीन सैफी, मोहम्मद इमरान सैफी नगर अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी, कादिर कुरैशी, वकार फरीदी, शाहबाज आलम, सीमाब रिजवी, मिन्हाज गगसोना, शाहरुख रिजवी, सैयद उबैदुल्लाह गनी, जाकिर कस्सार आदि मौजूद रहे।