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संसद में फिर गूंजा हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा, यूपी में 14 लाख केस लंबित

Wed, 25 Jul 2018 08:51 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 25 Jul 2018 08:51 PM IST
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High court issue raised in Parliament, 14 lakh cases pending in UP
राज्यसभा सांसद विजयपाल सिंह तोमर - फोटो : अमर उजाला

संसद में फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए हाईकोर्ट बेंच का मुद्दा उठाया गया। राज्यसभा सांसद विजयपाल सिंह तोमर ने शून्यकाल के दौरान सदन में यह मांग उठाई।

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उन्होंने कहा कि यह मांग करीब 60 वर्षों से चल रही है। सहारनपुर से इलाहाबाद हाईकोर्ट की दूरी 750 किलोमीटर है। मेरठ जो केंद्र में है वहां से हाईकोर्ट की दूरी 620 किलोमीटर है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां की आबादी लगभग 22 करोड़ है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के दृष्टिकोण से हाईकोर्ट इलाहाबाद में स्थित है, उसकी एक बेंच लखनऊ में है, जो मात्र 200 किलोमीटर दूर है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, राजस्थान और मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों से कम दूरी पर हैं।
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उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आसाम में एक से अधिक बेंच हैं, जबकि उनकी आबादी उत्तर प्रदेश से बहुत कम है। उत्तर प्रदेश के साथ ऐसा अन्याय क्यों? जहां तक देश में मुकदमों के लंबित होने का सवाल है पूरे देश में जिला कोर्ट में 3 करोड़ 20 लाख, उच्च न्यायालयों में 42 लाख तथा उच्चतम न्यायालय में 55 हजार केस लंबित हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, आसाम में भी गुवाहाटी की दो सर्विस बेंच हैं। राज्य के रीआर्गेनाइजेशन एक्ट 1956 में 3 स्टेट को टच नहीं किया गया है, जिनमें उत्तर प्रदेश व बिहार को अलग रखा गया है। ऐसे में संसद को पूर्ण अधिकार है नई बेंच बनाने का। संसद ने ही 1976 में कानून बनाकर झारखंड में बेंच बनाई थी। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की राय लेना जरूरी नहीं है।

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यूपी में 14 लाख केस लंबित

अकेले उत्तर प्रदेश में 14 लाख केस पेंडिंग हैं, जिनमें से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जनपदों के आधे से अधिक नौ लाख केस पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें आती हैं चली जाती हैं, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता न्याय की आस में लगी रहती है। दो दो बार प्रदेश सरकारों ने प्रस्ताव दिया है। जसवंत सिंह आयोग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए संस्तुति की है कि उत्तर प्रदेश में भी गोरखपुर, वाराणसी, आगरा, तथा मेरठ में बेंच बना दी जाए तो जनहित में उचित रहेगा। गौरतलब है कि वेस्ट यूपी के वकील कई साल से बेंच की स्थापना की मांग कर रहे हैं। अभी हाल में मुजफ्फरनगर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने भी संसद में हाईकोर्ट बेंच की मांग उठाई थी।

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