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विवादों के घेरे में आए जनप्रतिनिधियों पर हाईकमान की नजर

Mon, 10 Aug 2020 01:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2020 01:54 AM IST
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High command's eye on public representatives who are surrounded by controversies
भाजपा के पांच विधायक किसी न किसी विवाद में चर्चाओं में आए
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कोरोना संक्रमण काल के दौरान भाजपा के जनप्रतिनिधि भी किसी न किसी विवाद के घेरे में आते जा रहे हैं। हाल ये है कि संगठन से भी इनका सही तालमेल कहीं नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में अधिकांश जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर अब जनता के बीच सवाल उठने शुरू हो गए हैं तो संघ परिवार भी साल 2022 के मद्देनजर इनसे खासा नाराज नजर आ रहा है।
हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक मवाना के एक डिग्री कालेज की जमीन के विवाद को लेकर खासे चर्चा में है। इसे लेकर पंचायत तक बैठ चुकी है और केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान तक को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। यह मामला अभी भी ठंडा नहीं हुआ है। इसके अलावा भी कई मामले हस्तिनापुर क्षेत्र के चर्चा में है। हाल ही में दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर पर संघ परिवार से जुड़े अधिवक्ता ने जान का खतरा बताकर आरोप लगाए हैं। जिसमें विधायक द्वारा अधिवक्ता पर जानलेवा हमला करने और पिस्टल छीनने वालों को संरक्षण देने का मामला पिछले कई सालों से चल रहा है।
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कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल के करीबी कंकरखेड़ा के एक भाजपा और व्यापारी नेता को लेकर कैंट विधायक कई बार विवादित हो चुके हैं। पिछले दिनों अमलतास विवाह मंडप के मालिक के साथ हुई घटना की जांच अभी तक चल रही है। सरधना विधायक संगीत सोम और श्रम कल्याण बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष सुनील भराला के बीच विवाद पिछले दिनों पूरी तरह चर्चा में रहा। जिसमें तमाम ऑडियो वायरल हुए।
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वहीं, नया मामला सिवालखास विधायक जितेंद्र सतवाई का है। जितेंद्र सतवाई ने पार्षद पति से जान को खतरा बताया है। लेकिन पार्षद पति ने पलटवार करते हुए विधायक पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। पार्षद पति का कहना है कि वह एक मुर्गी फार्म कंपनी के संचालन में जितेंद्र सतवाई से मिला था और विधायक को दस लाख रुपये दे चुका है। लेकिन विधायक अभी भी उस पर पैसे देने का दबाव बना रहे हैं और झूठा मुकदमा दर्ज करा रहे हैं।
संगठन में भी तालमेल की है कमी
इन सारे विवादों के बीच कहीं न कहीं संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच भी सामंजस्य नजर नहीं आ रहा है। जिला और महानगर इकाई दोनों में ही जनप्रतिनिधियों और संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच कहीं न कहीं दूरी साफ नजर आती है।
चहेते अधिकारियों की नियुक्ति का दबाव
जनप्रतिनिधियों को लेकर एक चर्चा जनता के बीच आम है। दो जनप्रतिनिधि जनपद में ऐसे हैं जो अपने खास लोगों को थानेदार बनाए हुए हैं। इनके क्षेत्र में अपराध भले ही बेकाबू हों और जनता की सुनवाई न हो रही हो। लेकिन ये थानेदार इन जनप्रतिनिधियों की जी हुजूरी के चलते अपनी कुर्सी पर काबिज हैं।

संघ और प्रांतीय नेतृत्व की है नजर
इस पूरे मामले को लेकर संघ परिवार लगातार रिपोर्ट तैयार कर रहा है। वहीं, प्रांतीय नेतृत्व की भी नजर है। माना जा रहा है कि इन सबके जहां जल्दी ही हाईकमान से पेच कसने की तैयारी हो रही है। वहीं, 2022 में कई का पत्ता भी साफ करने की तैयारी है। ऐसे में नये चेहरों की तलाश अभी से शुरू कर दी गई है।
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