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यहां भी है धरोहरों को सौंदर्यीकरण का इंतजार
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सैफपुर स्थित दुर्वासा ऋषि का तालाब
- फोटो : BHESUMA
बहसूमा। केंद्र सरकार द्वारा बजट में इस बार सैफपुर फिरोजपुर की प्राचीन धरोहर के सौंदर्यीकरण के लिए बजट मिला है। सैफपुर फिरोजपुर के महर्षि तपोस्थली तालाब को पर्यटन विभाग की टीम का इंतजार है। अभी तक टीम के नहीं पहुंचने से लोगों में मायूसी है।
महाभारतकाल में हुआ निर्माण
फिरोजपुर महादेव मंदिर पर महाभारत के समय में महर्षि दुर्वासा ऋषि ने तपस्या की थी। उन्होंने इस तालाब का निर्माण कराया था। अवशेष को देखकर लगता है कि उस समय तालाब का स्वरूप बेहद सुंदर रहा होगा।
गंगा से आता था पानी
मंदिर में उक्त तालाब में गंगा में पानी आता था। इसके लिए गंगा तक पक्की नाली बनी हुई थी। वह नाली अब नहीं रही, लेकिन कुछ अवशेष बचे हैं। यदि जीर्णोद्धार नही कराया गया तो महाभारतकालीन की यह धरोहर समाप्त हो जाएगी।
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तालाब की है मान्यता
सैफपुर फिरोजपुर महादेव मंदिर के पुजारी धर्मपाल का कहना है कि तालाब में नहाने से हाथ पैर का दर्द समाप्त हो जाता है। पहले इसमें दूर-दूर से लोग नहाने आते थे, लेकिन अब यह सिलसिला बंद है।
बंद हुई सुरंग
इस तालाब के पास से ही हस्तिनापुर तक सुरंग भी थी। क्योंकि पांडवों ने हस्तिनापुर को राजधानी बनाया था। रखरखाव के अभाव में सुरंग बंद हो गई।
वर्तमान स्थिति
यह तालाब शासन प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। इसकी मरम्मत कराने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। रखरखाव के अभाव में इस बार बारिश में तालाब की एक दीवार भी गिर गई थी। अब सरकार ने पर्यटन विभाग की तरफ से इसके सौंदर्यीकरण के लिए बजट दिया है। इससे लोगों को प्राचीन धरोहर को बचाने की उम्मीद जगी है।
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महाभारतकाल में हुआ निर्माण
फिरोजपुर महादेव मंदिर पर महाभारत के समय में महर्षि दुर्वासा ऋषि ने तपस्या की थी। उन्होंने इस तालाब का निर्माण कराया था। अवशेष को देखकर लगता है कि उस समय तालाब का स्वरूप बेहद सुंदर रहा होगा।
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गंगा से आता था पानी
मंदिर में उक्त तालाब में गंगा में पानी आता था। इसके लिए गंगा तक पक्की नाली बनी हुई थी। वह नाली अब नहीं रही, लेकिन कुछ अवशेष बचे हैं। यदि जीर्णोद्धार नही कराया गया तो महाभारतकालीन की यह धरोहर समाप्त हो जाएगी।
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तालाब की है मान्यता
सैफपुर फिरोजपुर महादेव मंदिर के पुजारी धर्मपाल का कहना है कि तालाब में नहाने से हाथ पैर का दर्द समाप्त हो जाता है। पहले इसमें दूर-दूर से लोग नहाने आते थे, लेकिन अब यह सिलसिला बंद है।
बंद हुई सुरंग
इस तालाब के पास से ही हस्तिनापुर तक सुरंग भी थी। क्योंकि पांडवों ने हस्तिनापुर को राजधानी बनाया था। रखरखाव के अभाव में सुरंग बंद हो गई।
वर्तमान स्थिति
यह तालाब शासन प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। इसकी मरम्मत कराने के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। रखरखाव के अभाव में इस बार बारिश में तालाब की एक दीवार भी गिर गई थी। अब सरकार ने पर्यटन विभाग की तरफ से इसके सौंदर्यीकरण के लिए बजट दिया है। इससे लोगों को प्राचीन धरोहर को बचाने की उम्मीद जगी है।