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जिला अस्पताल में ‘सेटिंग’ से तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 26 Mar 2016 02:13 AM IST
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जिला अस्पताल लोगो
- फोटो : अमर उजाला
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स्वास्थ्य विभाग में सेटिंग का खेल बदस्तूर जारी है, जिसके जरिये चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है। सीएमओ कार्यालय से लेकर जिला चिकित्सालय तक सेटिंग हावी है। पंडित प्यारे लाल जिला चिकित्सालय में लेवल-वन का कोई पद नहीं है, लेकिन उसके बाद भी कई चिकित्सकों को तैनाती दी गई है।
इमरजेंसी से लेकर विभागों में लेवल-वन के चिकित्सकों को तैनाती दी गई है, जबकि अस्पताल के अंदर लेवल-वन का कोई भी पद रिक्त नहीं है। ऐसे हालात में सारी व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है, क्योंकि लेवल-वन से ऊपर के चिकित्सक अस्पताल में तैनाती को तैयार नहीं हैं और फिर उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती दी गई है।
ऑपरेशन के दौरान मरीज को थप्पड़ मारने के आरोपों में फंसी महिला चिकित्सक की तैनाती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अभी तक महिला चिकित्सक को करीब ढाई साल का कार्य अनुभव है और वो लेवल-वन की चिकित्सा अधिकारी हैं, जिनकी नियम के तहत जिला चिकित्सालय में तैनाती नहीं हो सकती है। उधर, अन्य विभागों व इमरजेंसी में भी कई चिकित्सक लेवल-वन के तैनात हैं। आरोप लग रहे हैं कि जिला चिकित्सालय में काम ज्यादा होता है, इसलिए सेटिंग कर सीनियर चिकित्सक ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी तैनाती करा लेते हैं, जहां पर काम कम है या फिर घर आने-जाने में सहूलियत है।
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बीते दिनों एक ऐसे ही मामला भी देखने को मिला, जब जिला अस्पताल से एक सर्जन का बलरामपुर स्थानांतरण कर दिया गया और दूसरे चिकित्सक को छुट्टी पर जाना पड़ा तो अस्पताल के सीएमएस ने एडी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ सीएमओ को पत्र लिखकर एक सर्जन की मांग की थी। पहले दो हफ्ते तक कोई चिकित्सक दिया ही नहीं गया, उसके बाद जब अस्पताल में सर्जरी बंद होने की खबरें प्रकाशित हुईं तो सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा ने सरधना सीएचसी पर तैनात सर्जन डॉ. बीर सिंह को जिला अस्पताल भेजा।
जैसे ही डॉ. राजकुमार छुट्टी से लौटे तो डॉ. वीर सिंह को वापस सरधना सीएचसी भेजने की तैयारी की जा रही है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि डॉ. बीर सिंह का वापस सरधना सीएचसी पर भेजने का आदेश जारी भी हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की जा रही है। ऐसे में साफ है कि अब जिला अस्पताल में एक ही चिकित्सक को ओपीडी व सर्जरी दोनों ही काम करने पड़ रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
शासनादेश में स्पष्ट है कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिये, लेकिन इमरजेंसी में ईएमओ पद पर लेवल- वन के चिकित्सा अधिकारी को तैनाती दी जा सकती है, क्योंकि उसमें विशेषज्ञ चिकित्सक की आवश्यकता नहीं होती है। पर यहां तो बाकी जगह भी सीनियर विशेषज्ञ की कमी हैं, क्योंकि कोई भी जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखकर नहीं आना चाहता है।
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इमरजेंसी से लेकर विभागों में लेवल-वन के चिकित्सकों को तैनाती दी गई है, जबकि अस्पताल के अंदर लेवल-वन का कोई भी पद रिक्त नहीं है। ऐसे हालात में सारी व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है, क्योंकि लेवल-वन से ऊपर के चिकित्सक अस्पताल में तैनाती को तैयार नहीं हैं और फिर उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनाती दी गई है।
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ऑपरेशन के दौरान मरीज को थप्पड़ मारने के आरोपों में फंसी महिला चिकित्सक की तैनाती पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अभी तक महिला चिकित्सक को करीब ढाई साल का कार्य अनुभव है और वो लेवल-वन की चिकित्सा अधिकारी हैं, जिनकी नियम के तहत जिला चिकित्सालय में तैनाती नहीं हो सकती है। उधर, अन्य विभागों व इमरजेंसी में भी कई चिकित्सक लेवल-वन के तैनात हैं। आरोप लग रहे हैं कि जिला चिकित्सालय में काम ज्यादा होता है, इसलिए सेटिंग कर सीनियर चिकित्सक ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी तैनाती करा लेते हैं, जहां पर काम कम है या फिर घर आने-जाने में सहूलियत है।
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बीते दिनों एक ऐसे ही मामला भी देखने को मिला, जब जिला अस्पताल से एक सर्जन का बलरामपुर स्थानांतरण कर दिया गया और दूसरे चिकित्सक को छुट्टी पर जाना पड़ा तो अस्पताल के सीएमएस ने एडी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ सीएमओ को पत्र लिखकर एक सर्जन की मांग की थी। पहले दो हफ्ते तक कोई चिकित्सक दिया ही नहीं गया, उसके बाद जब अस्पताल में सर्जरी बंद होने की खबरें प्रकाशित हुईं तो सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा ने सरधना सीएचसी पर तैनात सर्जन डॉ. बीर सिंह को जिला अस्पताल भेजा।
जैसे ही डॉ. राजकुमार छुट्टी से लौटे तो डॉ. वीर सिंह को वापस सरधना सीएचसी भेजने की तैयारी की जा रही है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि डॉ. बीर सिंह का वापस सरधना सीएचसी पर भेजने का आदेश जारी भी हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की जा रही है। ऐसे में साफ है कि अब जिला अस्पताल में एक ही चिकित्सक को ओपीडी व सर्जरी दोनों ही काम करने पड़ रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
शासनादेश में स्पष्ट है कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिये, लेकिन इमरजेंसी में ईएमओ पद पर लेवल- वन के चिकित्सा अधिकारी को तैनाती दी जा सकती है, क्योंकि उसमें विशेषज्ञ चिकित्सक की आवश्यकता नहीं होती है। पर यहां तो बाकी जगह भी सीनियर विशेषज्ञ की कमी हैं, क्योंकि कोई भी जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखकर नहीं आना चाहता है।