सूरत-ए-हाल: स्वास्थ्य विभाग को ढूंढे नहीं मिल रहे एमबीबीएस डॉक्टर, 39 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन आए सिर्फ इतने
Meerut News : स्वास्थ्य विभाग को एमबीबीएस डॉक्टर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। हाल यह है कि एमबीबीएस के लिए 39 आवेदन मांगे गए थे लेकिन, सिर्फ 17 पर ही आवेदन आए हैं।
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मेरठ में स्वास्थ्य विभाग के लिए एमबीबीएस चिकित्सक ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। 39 एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए आवेदन मांगे गए थे, मगर आधे भी आवेदन नहीं आए। सिर्फ 17 आवेदन आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने 15 जनवरी 2024 को 39 एमबीबीएस चिकित्सकों की भर्ती निकाली थी, जो संविदा पर एक साल तक रहेंगे। शासन की अनुमति के बाद इनका कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। इसका मकसद चिकित्सकों की कमी को पूरा करना है। इन्हें 55 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक वेतन दिया जाना है। 65 साल तक उम्र वाले आवेदन कर सकते थे।
साक्षात्कार की तिथि छह फरवरी 2024 थी, लेकिन इस दौरान महज 17 ही आवेदन आए। इनमें से फिलहाल 14 चिकित्सकों का चयन कर लिया गया है। चिकित्सकों के कम आवेदन आने से स्वास्थ्य विभाग भी हैरत में है। स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी चल रही है। चिकित्सकों की स्थायी भर्ती तो नहीं निकल रही है, लिहाजा चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए संविदा पर डॉक्टर रखने के लिए भर्ती निकाली गई।
जिले के सरकारी चिकित्सालयों में चिकित्सकों की काफी कमी
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 84 चिकित्सकों की कमी है। वहीं, जिला अस्पताल में 26 और महिला जिला अस्पताल में 14 महिला चिकित्सकों की कमी है, जबकि स्वास्थ्य विभाग में 39 चिकित्सक मानकों से कम चल रहे हैं।
17 लाख से ज्यादा मरीज आते हैं इलाज के लिए
जिले में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज के लिए हर साल करीब 17 लाख मरीज आते हैं। इनमें करीब सात लाख मरीज एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, साढ़े तीन लाख मरीज पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय और डेढ़ लाख मरीज महिला जिला अस्पताल में आते हैं। इसके अलावा पांच लाख मरीज 12 सामुदायकि स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 26 नगरीय स्वास्थ्य केंद्र (अर्बन हेल्थ सेंटर) पर आते हैं। हालांकि सभी स्थानों पर चिकित्सकों की कमी है।
जो आवदेन आए, उनका साक्षात्कार कराया गया। 14 का चयन कर लिया गया है। आवेदन कम आने का कारण समझ नहीं आ रहा है। - डॉ. अखिलेश मोहन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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सरकारी से ज्यादा निजी चिकित्सा पर जोर
चिकित्सकों का सरकारी से ज्यादा निजी प्रैक्टिस पर जोर है। चिकित्सकों के मुताबिक, इसकी वजह ये है कि वेतन कम हैं और बंदिशें ज्यादा हैं। निजी प्रैक्टिस में पैसा ज्यादा है और अपने हिसाब से शेड्यूल बनाया जा सकता है।
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