हरिओम आनंद की आत्महत्या: ललित और मानसी की ऑडियो क्लिप ने उलझाया मामला
- उलझता नजर आ रहा आनंद हॉस्पिटल के मालिक हरिओम आनंद की आत्महत्या का मामला
- मानसी आनंद का आगे आना और गौतम आनंद का चुप्पी साधना भी खड़े कर रहा सवाल
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आनंद हॉस्पिटल के मालिक हरिओम आनंद की आत्महत्या का मामला जितना सरल समझा जा रहा था, अब उतना ही उलझता नजर आ रहा है। इस मामले में शुरू से लेकर अब तक जिस तरह हरिओम आनंद की बेटी मानसी आनंद आगे आ रही हैं और पुत्र गौतम आनंद चुप्पी साधे बैठे हैं। वह भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। वहीं, शेयरधारक ललित भारद्वाज और मानसी के बीच हुई वार्ता के वायरल ऑडियो ने पूरे मामले को ही उलझा दिया है।
हरिओम आनंद की आत्महत्या के बाद मानसी आनंद ने शेयर धारकों पर दबाव बनाने और उसी दबाव के फलस्वरूप हरिओम आनंद द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात कही थी। अगले ही दिन मानसी आनंद ने बयान बदले और शेयरधारकों को क्लीन चिट दे दी। लेकिन इसके बाद फिर से प्रमुख शेयर धारकों जीएस सेठी और ललित भारद्वाज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
मंगलवार को इस पूरे मामले पर जीएस सेठी और ललित भारद्वाज द्वारा एसपी सिटी के यहां बयान दर्ज कराए गए। ललित भारद्वाज के अधिवक्ता ने इस मामले पर पारिवारिक दबाव की बात कहकर सभी को न केवल चौंका दिया, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए। ऐसे में अब यदि पूरे मामले पर शुरू से लेकर अब तक के घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह मामला कहीं न कहीं उलझता नजर आ रहा है।
वायरल ऑडियो में मानसी दे रही क्लीन चिट
आत्महत्या के बाद रात में मानसी और ललित भारद्वाज के बीच जो बात हुई, वह साफ बता रही है कि मानसी को पूरे मामले में ललित या जीएस सेठी से कोई शिकायत नहीं है। लेकिन बाद में ऐसा क्या हुआ कि वह इन दोनों के खिलाफ खड़ी हो गईं।
उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले पर जो सबसे अहम सवाल उठ रहा है वह यह है कि हरिओम आनंद के पुत्र गौतम आनंद अभी तक चुप्पी साधे बैठे हैं। जबकि गौतम आनंद के शेयर जहां मानसी से कहीं बहुत ज्यादा हैं तो वह साल 2019 तक अस्पताल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में भी शामिल रहे। फिर भी उनकी चुप्पी सभी को चौंका रही है।
दूसरा सवाल ये है कि मानसी आनंद आखिर लगातार बयान क्यों बदल रही हैं। इसके साथ ही जीएस सेठी को हरिओम आनंद द्वारा लिखा गया पत्र भी एक रहस्य बन गया है।
यह पत्र टाइप किया हुआ है, लेकिन जब पहले पत्र जारी हुआ तो उस पर न तो हरिओम आनंद के हस्ताक्षर हैं और न ही कोई तारीख है। इसके बाद जब एसएसपी आफिस में पत्र दाखिल हुआ तो उस पर हरिओम आनंद के हस्ताक्षर और तारीख दोनों दर्ज हैं। ऐसी तमाम बातें पूरे मामले को कहीं न कहीं उलझा रही हैं।