कोर्ट का निर्णय: हाजी इकबाल की 525 बीघा जमीन पर कब्जा लेगा प्रशासन, सीबीआई ने की थी छापेमारी
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मुखौटा कंपनियों के जरिए चीनी मिलें खरीदने के मामले में सीबीआई की कार्रवाई के बाद हाजी मोहम्मद इकबाल और उसके परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब सहारनपुर के बेहट तहसील क्षेत्र में हाजी मोहम्मद इकबाल और उसके परिवार के लोगों द्वारा खरीदी गई जमीन को लेकर चल रहे वाद में अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) ने निर्णय सुनाया है। इस निर्णय के मुताबिक हाजी इकबाल और उसके परिवार की 35 हेक्टेयर (करीब 525 बीघा) जमीन को राज्य सरकार में निहित करने, संबंधित भूमि को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करके कब्जा प्राप्त करने का निर्देश उपजिलाधिकारी बेहट को दिया है।
पूर्व में हुई शिकायतों के बाद इस मामले में 25 मई 2018 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी बेहट ने अपनी जांच रिपोर्ट लगाकर आख्या भेजी थी। उसमें हाजी मोहम्मद इकबाल, उनके बेटे वाजिद और अन्य लोगों द्वारा खरीदी गई भूमि के कुल 88 बैनामों का जिक्र किया गया था। इसके बाद मोहम्मद इकबाल और उनके बेटे वाजिद के खिलाफ यह वाद अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) की न्यायालय में पहुंचा। 31 मई 2018 में मोहम्मद इकबाल और उनके बेटे वाजिद के खिलाफ नोटिस जारी किया गया। 25 जून 2018 को विपक्षी मोहम्मद इकबाल और वाजिद की तरफ से अधिवक्ता ने नोटिस को नियमों के विरुद्ध बताया था, तो जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) की तरफ से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता का हवाला देते हुए भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का तर्क पेश किया था।
उधर, शुक्रवार को अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) विनोद कुमार ने दोनों ही वाद पर अपना निर्णय सुना दिया। उसमें अपर जिला मजिस्ट्रेट ने कहा है कि विवेचना के आधार पर मोहम्मद इकबाल पुत्र मोहम्मद अब्दुल वहीद द्वारा स्वयं और अपने नाबालिग बच्चों (मुसय्यदा, मोहम्मद अफजाल, मोहम्मद अब्दुल कादिर, मोहम्मद अलीशान, सहराज) द्वारा खरीदी गई 35.8448 हेक्टेयर भूमि में से 4.826 हेक्टेयर को छोड़कर अवशेष भूमि 31.0188 हेक्टेयर भूमि को समस्त भार से मुक्त घोषित कर राज्य सरकार में निहित किया जाता है। उपजिलाधिकारी बेहट को निर्देश दिया है कि उक्त भूमि का अंकन राजस्व अभिलेखों में कराते हुए उस पर कब्जा प्राप्त किया जाए और एक पक्ष (15 दिन) के भीतर न्यायालय को अनुपालन आख्या भेजी जाए।
इसी तरह मोहम्मद इकबाल के बेटे वाजिद के खिलाफ चल रहे वाद में भी अपर जिला मजिस्ट्रेट ने निर्णय सुनाया है कि 9.21 हेक्टेयर भूमि में से 5.0586 हेक्टेयर भूमि को छोड़ते हुए अवशेष भूमि 4.1514 हेक्टेयर समस्त प्रकार के भार से मुक्त घोषित कर राज्य सरकार में निहित की जाती है और उपजिलाधिकारी बेहट को उक्त भूमि का अंकन राजस्व अभिलेखों में कराकर उस पर कब्जा प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। निर्णय में यह भी उल्लेख है कि यह राजस्व संहिता की धारा 89(2) का उल्लंघन माना गया, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा साढ़े 12 हेक्टेयर से अधिक भूमि को राज्य सरकार में निहित करने का प्रावधान है।
अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) विनोद कुमार का कहना है कि मोहम्मद इकबाल और उनके बेटे वाजिद के खिलाफ चल रहे वाद में निर्णय सुना दिया गया है। निर्णय का पालन करने के संबंध में उपजिलाधिकारी बेहट को पत्र भेज दिया है।
उधर, इस बारे में हाजी मोहम्मद इकबाल के भाई बसपा एमएलसी हाजी महमूद अली का कहना है कि एक साल पूर्व अपर जिला मजिस्ट्रेट के यहां से नोटिस आए थे। उसके बाद हाईकोर्ट और राजस्व परिषद से उनके पक्ष में आदेश हुआ, जिसकी कॉपी छह महीने पहले ही अपर जिला मजिस्ट्रेट के यहां जमा करा दी गई। यदि इसके बाद भी अपर जिला मजिस्ट्रेट ने हमारे खिलाफ कोई निर्णय किया है, तो यह हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना है। वह इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
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